अग्निशमन विभाग में कर्मचारियों की कमी

अग्निशमन विभाग में कर्मचारियों की कमीजिले में आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए जिला अग्निशमन विभाग है।

जितेन्द्र चौहान, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

रायबरेली। पिछले एक हफ्ते में आग लगने की तीन घटनाएं हो चुकी हैं। हर वर्ष यही होता है। गर्मी आते ही जब गेहूं की कटाई का सीजन शुरू होता है। वैसे ही शुरू हो जाता है चिंगारी से खेत जलने का सिलसिला। जिले में आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए जिला अग्निशमन विभाग है।

ये विभाग कितना मुस्तैद है आगजनी से निपटने के लिए ये जानने की कोशिश की गाँव कनेक्शन संवाददाता ने तो पता चला कि विभाग खुद संसाधनों की कमी से जूझ रहा है और उसके पास पर्याप्त स्टाफ तक नहीं है।

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रायबरेली जिले से अग्निशमन विभाग के चार स्थायी केन्द्र हैं जो लालगंज, बछरावां, सलोन और नगर क्षेत्र में इसके अतिरिक्त ऊंचाहार में एक अस्थायी केन्द्र हर गर्मी में बना दिया जाता है। विभागीय सूचना के अनुसार ऊंचाहार को स्थायी केन्द्र बनाने का प्रस्ताव शासन के पास काफी दिनों से लम्बित है पर अभी तक प्रस्ताव पास नहीं हुआ है।

संसाधनों की बात की जाए तो नगर क्षेत्र के केन्द्र में पर्याप्त संसाधन हैं। यहां चार बड़ी दमकल तथा दो छोटी दमकल की गाड़ियां हैं। इसी तरह बछरावां, लालगंज और सलोन के केन्द्र में एक बड़ी दमकल तथा एक छोटी दमकल की गाड़ी है। एक-एक बड़ी दमकल गाड़ी सरेनी और महराजगंज में तैनात है जो केन्द्र के अभाव में क्षेत्रीय थाने में खड़ी की गयी है। इनमें बड़ी गाड़ी की क्षमता छह हजार लीटर और छोटी गाड़ी की क्षमता ढाई हजार लीटर क्षमता की है। सबसे बड़ी समस्या अग्निशमन विभाग की ये है कि विभाग स्टाफ की जबरदस्त कमी से जूझ रहा है।

जिले में विभाग में 119 पद सृजित हैं पर केवल 51 पद पर ही कर्मचारी तैनात हैं। इसके कुछ दिक्कतें तो हैं पर फिर भी जहां से भी सूचना प्राप्त होती है। हमारे जवान मुस्तैदी से वहां पहुंचकर जान-माल की रक्षा करते हैं।
राजीव कुमार पाण्डेय, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, रायबरेली

जिले के मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजीव कुमार पाण्डेय ने बताया, “जिले में विभाग में 119 पद सृजित हैं पर 51 पद पर ही कर्मचारी तैनात हैं। इसके कुछ दिक्कतें तो हैं पर फिर भी जहां से भी सूचना प्राप्त होती है। हमारे जवान मुस्तैदी से वहां पहुंचकर जान-माल की रक्षा करते हैं।” रायबरेली जिले में 18 ब्लाक हैं, 19वें ब्लाक का सृजन हो रहा है। ऐसे में जिले की 797 ग्रामसभाओं को आगजनी से बचाने का जिम्मा फिलहाल इन 51 कर्मचारियों के भरोसे है।

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