तो क्या योगी सरकार में बदलेगा देवी पाटन मंदिर का स्वरूप

तो क्या योगी सरकार में बदलेगा देवी पाटन मंदिर का स्वरूपदेवी पाटनी मंदिर।

निशांत रंजन

बलरामपुर। उत्तर प्रदेश के जिला बलरामपुर से 25 किलो मीटर दूर स्थितं माँ पाटेश्वरी देवी पाटन मंदिर 51 शक्तिपीठो में से एक हैं। भाजपा सरकार के बनते ही यहां के स्थानीय लोगों में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से काफी उम्मीद लगाए बैठे हैं। देवी पाटन मंदिर की बात करें तो यह मंदिर के मंहत गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर के मंहत द्वारा बनाए जाते है। और ये भी नाथ सम्प्रदाय के होते है। पाटन मंदिर के मंहत भी सूबे के मुख्यमंत्री की तरह कानो में कुंडल पहनते हैं और भगवा वस्त्र धारण किए होते हैं। ऐसे में लोगो की सरकार से देवी पाटन मंदिर व तुलसीपुर के समस्या को दूर होने की आश लगाए हैं।

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शाक्ति पीठ देवी पाटन मंदिर की स्थापना गुरु गोरक्षनाथ ने की थी और इसी स्थल से उन्होंने ने सिद्धि प्राप्त की थी जो कि गोरक्षनाथ तपोस्थली के रूप में भी जाना जाता है।

नवरात्र से लगता है एक महीने तक मेला

देवी पाटन मंदिर में नवरात्र के दिनो में बड़ी संख्या में बाहरी जिलों से व आस पास के इलाकों से श्रद्धालु आते है इसके साथ ही नेपाल से सटे होने के कारण नेपाल से भी काफी भक्त माँ पाटेश्वरी देवी के दर्शन को आते हैं। दर्शन पूजन के लिए बासंतीय नवरात्र में लगने वाले एक महीने के मेले में मंदिर परिसर में दुकान लगाए रहते है व नेपाल से भी छोटे व्यापारी दुकान लगाने पाटन मंदिर आते हैं।

सरकारी योजनाओं को नहीं मिलता लाभ

सिद्धि शक्ति पीठ होने के बावजूद यह अति पिछड़ा इलाका है। तुलसीपुर जिले में सरकारी योजनाएं न के बराबर लोगो तक पहुँचती हैं। मंदिर तक पहुचने के पयाप्त साधन नहीं हैं। सड़क मार्ग की खस्ता हालत हैं। नवरात्र के समय में बाहर से आएं भक्तों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है और साथ ही साथ दर्शन करने आएं लोगों धर्मशाला तक नहीं मिलता हैं। जिससे वह लोग मंदिर परिसर के बाहर खुले में सोते हैं। दूर दराज के क्षेत्रो से बड़ी संख्या में महिलाएं व बुजुर्ग पाटेश्वरी देवी के दर्शन के लिए आते हैं। जिनको साफ पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल पाती हैं।

ऐसे में अबकि बार मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने नवरात्र में सभी शाक्ति पीठो में दशनाथियों के लिए सुविधा मुहैया कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।

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