सपा-बसपा के नेताओं में भगदड़ और बीजेपी की सेंधमारी के बड़े सियासी मायने हैं

Rishi MishraRishi Mishra   29 July 2017 8:25 PM GMT

सपा-बसपा के नेताओं में भगदड़ और बीजेपी की सेंधमारी के बड़े सियासी मायने हैंअमित शाह की अगवानी के लिए जुटी भीड़।

लखनऊ। अमित शाह के उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान दूसरे दलों के एमएलसी में हुई ‘भगदड़’ की पठकथा कई दिनों पहले से लिखी जा रही थी। ये सेंधमारी योगी सरकार के मंत्रियों के लिए सुरक्षित स्थान तलाशने की कवायद का हिस्सा है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम और कई मंत्री प्रदेश में किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं और सरकार में रहने के लिए जरुरी है कि वो विधानसभा या विधानपरिषद के सदस्य जरुर हों।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शनिवार को तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे तो उससे बड़ी ख़बर सपा और बसपा के नेताओं के इस्तीफे और उनके बीजेपी में शामिल होने की बनी। सपा के तीन और बसपा के एक एमएलसी ने इस्तीफा विधानपरिषद के सभापति को दे दिया। ये लगभग तय माना जा रहा है कि वो बीजेपी का दामन थामेंगे। ख़बर तो ये भी है विधानसभा चुनाव के पहले अखिलेश की साइकिल से उतरने वाले अंबिका चौधरी भी भाजपा के साथ आएंगे तो नसीमुद्दीन सिद्दीकी के नाम भी भी चर्चा है।

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सपा से राणा यशवंत सिंह, लखनऊ में प्रॉपर्टी को लेकर चर्चित रहे बुक्कल नवाब और मधुकर जेटली ने विधानपरिषद के साथ पार्टी को भी टाटा कर दिया। झटका बहनजी की बीएसपी को भी लगा है, हाथी पर सवार होकर विधानपरिषद पहुंचे ठाकुर उदयवीर सिंह ने पद से इस्तीफा दे दिया है।

दरअसल इऩ नेताओं की अपनी जरूरतें जरूर होंगी लेकिन बीजेपी को भी इनकी जरूरत है। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से भाजपा सांसद हैं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर सीट से तो डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा मेयर थे। नियमत: मंत्री बनने के लिए जरूरी है कि वो विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य हो। ये सदस्य शपथ लेने के 6 महीने के अंदर बनना अनिवार्य है। इसके साथ ही सरकार में शामिल महेंद्र कुमार सिंह, मोहसिन रजा, स्वतंत्रदेव सिंह भी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में जरूरी है या तो इनके लिए कोई विधायक अपनी सीट छोड़े और वहां उपचुनाव हों जिसपर ये लोग दावेदारी करना या फिर दूसरा उपाय एमएलसी है। माना जा रहा है बीजेपी थिंक टैंक ने इऩ नेताओं के लिए एमएससी की सुरक्षित सीट चुनी है।

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शाह के अगले दो दिन के प्रवास के दौरान उपचुनाव को लेकर तस्वीर एक दम साफ हो जाएगी। क्योंकि योगी अदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य को लोकसभा सीट से इस्तीफा देना है, जहां दोबारा चुनाव होंगे। ख़बर ये भी है कि दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को कहीं न कहीं समायोजित कर बीजेपी अपने वरिष्ठ नेताओं और पार्टी के लिए सपर्मित और पहुंच वाले कुछ नेताओं को संतुष्ट करेगी।

मगर भूमाफिया का तमगा लिए बुक्कल नवाब और जेटली कैसे आएंगे!

सपा एमएलसी बुक्कल नवाब के पास भूमाफिया का तमगा है। लखनऊ के शीशमहल क्षेत्र में अनेक सरकारी भूखंडों पर कब्जा और कई अवैध बिल्डिंगों के निर्माण में बुक्कल नवाब फंसे हुए हैं। उन पर कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। ऐसे में योगी सरकार में बुक्कल का भाजपा में आना आत्मघाती होगी। दूसरा नाम मधुकर जेटली का है। सियासी हलकों में उनको लाइजनर माना जाता है।

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मधुकर मुलायम सिंह यादव की पसंद थे, मगर कभी भी अखिलेश को पसंद नहीं आए। कहा जाता है कि लखनऊ मेट्रो के मामले में मधुकर जेटली की दखल पर डाॅ ई श्रीधरन नाराज हो गए थे। जिसके बाद में उन्होंने इस बात की शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से की थी। अखिलेश ने मधुकर को वाह्य सहायतित परियोजना विभाग के सलाहकार पद से हटा दिया था। मगर बाद में मुलायम सिंह के दबाव में मधुकर को दोबारा एमएलसी पद दे दिया गया था। मधुकर क्या काम करते हैं ये किसी को भी नहीं पता है। ऐसे में इन दो नामों को भाजपा किस तरह से जस्टीफाइ करेगी ये एक बड़ा सवाल होगा।

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