राजकीय निर्माण निगम में भ्रष्टाचार से शुरू हुई अफसरों की रार सतह पर

राजकीय निर्माण निगम में भ्रष्टाचार से शुरू हुई अफसरों की रार सतह परराजकीय निर्माण निगम

लखनऊ। राजकीय निर्माण निगम में भ्रष्टाचार के आरोप प्रत्यारोप के बीच अफसरों की रार सतह पर आ गई। संयुक्त प्रबंध निदेशक हेम शर्मा ने प्रबंध निदेशक आरके गोयल पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा शनिवार को दे दिया। जबकि हेम शर्मा पर एमडी का आरोप है कि उनके खिलाफ फर्जी डिग्री के जरिये इंजीनियरिंग करने की जांच चल रही है।

फिलहाल इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। अफसरों की इस लड़ाई के पीछे सबसे बड़ी वजह वह घोटाले बताए जा रहे हैं, जिसमें करोड़ों रुपये की बंदरबांट की गई है। अब जबकि सरकार बदल चुकी है, सीबीआई भी विभिन्न मामलों में राजकीय निर्माण निगम में पूछताछ शुरू कर चुकी है तब अफसर अपनी-अपनी खाल बचाने में लगे हुए हैं।

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निर्माण निगम के हज़ारों करोड़ का काम पिछले 10 साल की दो सरकारों में हुआ। जिसमें घपलों के अनेक आरोप लगे। लोकायुक्त तक जांच हुई है। जिसकी शुरुआत बसपा कालीन स्मारकों के निर्माण में हुए अपव्यय के मामलों में कई परतें खुलीं। जिसकी जांच लोकायुक्त तक पहुंची। कई मुकदमे दर्ज किये गये। मगर मामला समय के साथ रफा-दफा कर दिये गये। इसके बाद में सपा सरकार में प्रदेश और प्रदेश के बाहर हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट राजकीय निर्माण निगम ने बनाए। जिनमें समय समय पर आरोप लगे।

तेलंगना की राजधानी हैदराबाद में हुए निर्माण की जांच सीबीआई के पास है। जिसमें आरएनएन के बड़े अफसरों की गर्दन फंसी हुई है। पिछले महीने सीबीआई की टीम इस मामले में जांच करने के लिए आरएनएन के दफ्तर भी पहुंची थी। जिसके बाद अब में एमडी और ज्वाइंट एमडी के बीच रार छिड़ी हुई है। हेम शर्मा जो कि भविष्य में प्रबंध निदेशक बनने के दावेदार भी थे, उन पर आरोप लगा कि जाली मार्कशीट के दम पर वह अब तक आरएनएन में नौकरी कर रहे थे।

इस मामले में एमडी आरके गोयल ने जांच भी शुरू करवा दी थी। इसके बाद में अब हेम शर्मा आरके गोयल में अनेक आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि, गोयल ने उनको प्रताड़ित कर दिया है। इसलिए उन्होंने पद से इस्तीफा देकर वीआरएस की मांग की है।

सीबीआई की डायरी में दर्ज एमडी कौन?

उत्तर प्रदेश की राजकीय निर्माण निगम के भष्ट्र निर्माण के पोल को सीबीआई ने एक डायरी के माध्यम से खोल दी है। मामला हैदराबाद मे एक मेडिकल कालेज निर्माण से जुडा हुआ है। जो कर्मचारी राज्य बीमा निगम के माध्यम से राजकीय निर्माण निगम को एजेन्सी चुनकर दिया गया था। इस डायरी में किसी एमडी का उल्लेख है। जिनके नाम पर घूस ली जाती थी। इस करोडो के कार्य को लेने के लिये देश की कई कम्पनियो ने अपने हाथ पैर मारे पर काम को हैदराबाद की कम्पनी विजय निर्माण कम्पनी को दिया गया ।

रिश्वत की बात डायरी के जॉच उपरान्त सीबीआई ने पाया तो इस मामले मे 5 अप्रैल 2017 को नौ लोगो के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज किया। जिसमे राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर जीपी वर्मा और अनुराग गोयल भी हैं। डायरी मे रिश्वत लेनदेन का पूरा ब्यौरा दर्ज है। जिससे यह बात पुख्ता हो रही है कि दिसम्बर 2014 और मई 2015 तक कुल 20 ट्रान्जेक्शन हुये जिसमें दो करोड रूपये रिश्वत लेनी की बात सामने आयी। डायरी से खुलासा हुआ कि राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर जीपी वर्मा को दिसम्बर 2014 को विजय निर्माण कम्पनी के एनके राव ने पांच लाख और विजय निर्माण निगम के प्रशान्त ने दिसम्बर 2014 मे ही तीन लाख रूपये दिये।

दूसरे प्रोजेक्ट मैनेजर अनुराग गोयल को जनवरी 2015 मे विजय निर्माण कम्पनी के किसी यादव ने 20 लाख इसी कम्पनी के भूपेन्द्र ने 2015 मार्च मे 20 लाख रूपये घूस के तौर पर दिये। इस मामले में सबसे चौकाने वाली बात यह थी कि एक पांच लाख का ऐसा ट्रान्जेक्शन हुआ जो अदिति झान्झी नामक व्यक्ति को दिया गया। जिसके माध्यम से यह पैसा किसी एमडी को ट्रान्सफर होने थे। अदिति झान्झी के बारे मे कहा जाता है कि यह एमडी का खास आदमी हैं और एमडी के नाम पर वह कम्पनियो से रिश्वत की रकम वसूलता है। अब गौर करने वाली बात यह है कि यह एमडी कौन है इस पर सीबीआई की नजर आकर रूकी हुई है। सीबीआई उस एम0डी की तलाश मे अपने सारे सुत्रो को काम पर लगा दिया है। इस मामले मे सारे सबूत इक्टठे होने के बाद उस एमडी को पूछताछ के लिये सीबीआई सम्मन भेजेगी। इस मामले मे एन्टीकरप्शन ब्रान्च ने पांच अप्रैल 2017 को जो मुकदमा दिल्ली मे नौ लोगो के खिलाफ दर्ज किया है। उसमे निर्माण निगम के प्रोजेक्ट अधिकारी जीपी वर्मा और अनुराग गोयल, विजय निर्माण कम्पनी के निदेशक एन0कृष्णा राव, विजय निर्माण कम्पनी के पॉच अधिकारी विनोद ए0ई,महेन्द्र जे0ई0,नरेन्द्रा जे0ई0,जवाहर एकाउन्टेन्ट,कौशिक एकाउन्ट डिपार्टमेन्ट के हैं।

फर्जी मार्कशीट मामले में हेम शर्मा की जांच जारी है। इसलिए उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। जब तक जांच पूरी नहीं होती है, उनको वीआरएस नहीं दिया जा सकता है। मेरे ऊपर लगाए गए प्रताड़ना के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं।

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