संकटग्रस्त विकासखण्डों के लिए बनेगा राज्य भू-जल संरक्षण मिशन 

संकटग्रस्त विकासखण्डों के लिए बनेगा राज्य भू-जल संरक्षण मिशन प्रतीकात्मक फ़ोटो 

लखनऊ। भू-गर्भ जल स्तर को बढ़ाने के लिए जन सहभागिता की आवश्यकता है। हमें अति दोहन के खिलाफ जागरुकता पैदा करनी होगी तथा किसानों को जल संरक्षण के बारे में विस्तार से बताना होगा। प्रदेश के सभी तालाबों को चिन्हित कर उन्हें फिर से जीवित करने एवं वर्षा जल को संचित करने की आवश्यकता है।

गिरते भू-गर्भ जल स्तर पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है : प्रो एसपी बघेल

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ये बातें प्रदेश के लघु सिंचाई एवं भू-गर्भ जल मंत्री प्रो0 एसपी बघेल ने शनिवार को गोमती नगर स्थित इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में भू-जल सप्ताह के अन्तर्गत राज्य स्तरीय समापन समारोह में कहीं। उन्होंने कहा कि गिरते भू-गर्भ जल स्तर पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। प्रदेश में भू-जल संसाधनों के समग्र प्रबंधन हेतु वर्तमान में संचालित विभिन्न विभागीय योजनाओं को एकीकृत कर एक नवीन योजना ‘राज्य भू-जल संरक्षण मिशन‘ प्रस्तावित किया गया है।

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प्रो0 बघेल ने नदियों को जीवनदायिनी बताया और कहा कि नमामि गंगे की तर्ज पर नमामि यमुना की भी शुरुआत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि सभी नदियों को स्वच्छ एवं अविरल किया जाएगा। संकटग्रस्त विकास खण्डों में एकीकृत रिचार्ज प्लान के माध्यम से भू-जल की स्थिति में अपेक्षित सुधार लाए जाने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के प्रत्येक जनपद में ‘भू-जल सेना‘ का गठन भी किया जा रहा है जिससे कि पूरे प्रदेश में भू-जल के प्रति जनजागरुकता पैदा की जा सके।

जल पुरुष के रुप में विख्यात श्री राजेन्द्र सिंह ने कहा कि भू-जल का संकट झेल रहे पश्चिमी उ0प्र0 में फसल चक्र और वर्षाचक्र दोनों को समझने की जरुरत है और उसके अनुसार हमें अपनी फसल उगानी होगी जिससे उत्पादकता भी बढ़ेगी और पानी की बचत भी होगी।

विशेष सचिव, लघु सिंचाई एवं भू-गर्भ जल श्रीमती संदीप कौर ने कहा कि जिस तरह से जल संरक्षण के लिए बच्चों को भू-जल सप्ताह के माध्यम से जागरुक किया जा रहा है, वह एक सराहनीय कदम है और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि विद्यार्थियों को अभी से जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाए जाने से भविष्य में जल संकट दूर किया जा सकेगा।

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कार्यक्रम में बाबा भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के एसोसिएट प्रोफेसर श्री वेंकटेश दत्ता ने उ0प्र0 में ‘‘भू-जल अर्थव्यवस्था एवं चुनौती‘‘ तथा अध्यक्ष परमार्थ संस्था, बुन्देलखण्ड श्री संजय सिंह ने ‘बुन्देलखण्ड में भू-जल भरण के प्रयास एवं जनसहभागिता‘ विषय पर ज्ञानवर्धक प्रस्तुतीकरण दिया। वरिष्ठ वैज्ञानिक सी0डी0आर0आई0 डा0 पी0के0 श्रीवास्तव ने भू-जल संरक्षण के प्रयासों को साइटून विधा के द्वारा रोचक तरीके से प्रस्तुत किया।

निदेशक, भूगर्भ जल विभाग, श्री वी0के0 उपाध्याय ने प्रदेश में भूगर्भ जल की स्थिति की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि राजधानी एवं पूरे प्रदेश में विभिन्न स्कूल-कालेजों के बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से भूजल संरक्षण व संवर्धन हेतु अपनी सक्रिय भागीदारी दी। समारोह में आंचलिक विज्ञान नगरी में गत 16 से 21 जुलाई, 2017 तक हुए विभिन्न कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कार वितरित किए गए।

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