आवारा मवेशियों को पाला, चंदा लगाकर चारे का कर रहे इंतजाम

आवारा मवेशियों को पाला, चंदा लगाकर चारे का कर रहे इंतजामग्रामीणों ने खेतों को नुकसान पहुंचाने वाले लगभग दो सैकड़ा मवेशियों को पाल लिया है।

प्रदीप मिश्रा, स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

उन्नाव। तहसील क्षेत्र के गाँव मेहरवानखेड़ा के ग्रामीणों ने आवारा मवेशियों से अपने खेत बचाने के लिए खास रणनीति अपनाई है। यहां के ग्रामीणों ने क्षेत्र के ही पूर्व जिला पंचायत सदस्य की मदद से खेतों को नुकसान पहुंचाने वाले लगभग दो सैकड़ा मवेशियों को पाल लिया है। ग्रामीणों की इस पहल ने आसपास के क्षेत्र के लोगों के लिए आवारा मवेशियों से छुटकारा पाने और फसल बचाने के लिए नजीर पेश की है।

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बताते चलें कि क्षेत्र में हजारों की संख्या में घूम रहे आवारा मवेशियों ने किसानों की नींद हराम कर दी थी। किसान मवेशियों से फसल बचाने के लिए खेतों की निगरानी करने को मजबूर हो गए थे। मवेशियों के झुंड से फसल को बचाया जा सके इसके लिए किसानों ने तारबंदी तक की लेकिन यह विकल्प काम नहीं कर सका। तारबंदी से बड़ी संख्या में मवेशी भी घायल हुए।

इस बीच ग्रामीणों ने मवेशियों से फसल को बचाने और मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए तीन माह पूर्व एक खास पहल की और उन्हें पालने का मन बनाया। जिस पर मेहरवानखेड़ा में रहने वाले पूर्व जिलापंचायत सदस्य शिव सिंह ने ग्रामीणों की मदद करते हुए उनके लिए जमीन उपलब्ध कराई। शिव सिंह ने अपनी निजी जमीन पर अन्य ग्रामीणों के सहयोग से तारों का बाड़ा बना कर आवारा मवेशियों को उसी में पाल लिया। मौजूदा समय में बाड़े के अंदर दो सौ से अधिक मवेशी पले हुए हैं। यह मवेशी भूखे न रहे इसके लिए ग्रामीणों ने चंदा लगा कर भूसा, पुआल और पानी की व्यवस्था भी की है।

प्रशासन से मांगी मदद

आवारा मवेशियों को पालने वाले शिव सिंह ने बताया कि उपजिलाधिकारी को इस बात से लिखित रूप से अवगत कराया गया था कि वह किसानों की फसलों को आवारा जानवरों से बचाने के लिए बाड़ा बना रहे हैं। साथ ही ग्रामीणों की मदद से उनके चारे का भी इंतजाम किया है। लेकिन यह व्यवस्था अधिक समय तक नहीं चल सकेगी। उन्होंने प्रशासन से भी मदद करने की मांग की है। मवेशियों की सेवा कर रहे उमा शंकर, गिरिजा शकर, दुर्गा शंकर ने बताया कि वह लोग चंदा एकत्रित कर जानवरों का पेट भर रहे हैं।

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