‘हमार लाल ठीक है कौनो टीका-वीका नाई लगवाएक है’ मीना मंच के बच्चे इन्हें भी कर रहें जागरूक

Karan Pal SinghKaran Pal Singh   18 Nov 2017 4:14 PM GMT

‘हमार लाल ठीक है कौनो टीका-वीका नाई लगवाएक  है’ मीना मंच के बच्चे इन्हें भी कर रहें जागरूकसोनभद्र में मीना मंच की छात्राएं महिलाओं को बच्चों के टीकाकरण के लिए जागरूक करतीं।

सोनभद्र। गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं से लेकर बड़ों के लिए टीकाकरण जरूरी होता है। संक्रामक रोग से बचाने और उसकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए टीका लगाया जाता है। उत्तर प्रदेश में अभी 76 प्रतिशत ही टीकाकरण होता है, जिसे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहे हैं। प्रदेश में टीकाकरण के लिए सरकार अनेकों कार्यक्रम चला रही हैं। इसके अलावा यूनीसेफ की प्रदेश के स्कूलों में गठित मीना मंच के बच्चे गाँव-गाँव जाकर गर्भवतियों, शिशुओं का टीकाकरण करवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

सोनभद्र जिला मुख्यालस से लगभग 95 किमी दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित आदिवासी क्षेत्र म्योरपुर ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय काचन के मीना मंच के बच्चे राधा, पुजा कुमारी, प्रभावति, सोनामती यादव, सोनू बाल विवाह, बाल मजदूरी, स्कूल से ड्राप आउट बच्चे के साथ-साथ गाँव-गाँव जाकर गर्भवतियों और नवजातों को समय पर टीका लगवाने के लिए जागरूक कर रहे हैं।

काचन गाँव की एनएम दीदी सुनीता बताती हैं, "गाँव की गोंड जनजाति की रजनी देवी (23 वर्ष) की डिलिवरी दो महीने पहले डिलिवरी करवाई थी। बच्चा थोड़ा कमजोर था तो डॉक्टरों ने उसे अपना दूध पिलाने को कहा था साथ ही उसे भी खाने-पीने को कहा था। डॉक्टरों ने रजनी को बच्चे का समय-समय पर टीका लगवाने का एक कार्ड दिया था।" सुनीता आगे बताती हैं, "एक महीने से ऊपर हो गया है, लेकिन अभी तक बच्चे का टीकाकरण नहीं हुआ है। जब मैंने उसके पति से कहा तो उसने कहा कि हमार लाल ठीक है। उसे कौनो टीका-वीका नहीं लगवाएक। जब यह बात मैँने मीना मंच के बच्चों की टोली को बताया तो उन्होंने रजनी के घर जाकर रजनी और उसके पति से बात की। बच्चे को टीका न लगवाने से होने वाले नुकसान को बताया। अब रजनी अपने बच्चे को समय-समय पर टीका लगवा रही है।"

काचन गाँव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाली कक्षा आठ की मीना मंच की छात्रा पूजा कुमारी (15 वर्ष) बताती हैं, "हम गाँव में सर्वे कर रहे थे तभी वहां हमें गाँव की एएनएम दीदी मिली। एएनएम दीदी ने हमें बताया कि गाँव की एक महिला जो आपने बच्चे को जन्म के बाद से एक बार भी टीका नहीं लगवाया है। दीदी ने बताया कि उनके बार-बार कहने पर भी बच्चे का टीकाकरण नहीं करवा रही है।"

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पूजा आगे बताती है, "हम मीना मंच के बच्चे एक साथ उस महिला (रजनी देवी) के पास उसके घर गए। रजनी के घर पर उसका पति भी था। हम बच्चों ने दोनों को एक साथ बैठा कर बच्चे को होने वाली बीमारी के बारे में बताया, साथ ही टीकाकरण से बच्चों के स्वास्थ्य में होने वाले फायदे को भी बताया। एएनएम दीदी ने भी हमारे साथ विस्तार से दोनों को टीकाकरण के फायदे गिनाएं। हमारी और एएनएम की बात सुनकर रजनी और उसके पति ने बच्चे का टीकाकरण कराने का वादा किया और अब समय-समय पर बच्चे का टीकाकरण करवाते हैं।"

मीना मंच के बच्चे गाँव-गाँव जाते हैं जहां ग्रामीणों को अपने बच्चों का टीकाकरण करवाने के लिए जागरूक करते हैं। साथ ही पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो पिलावाने के लिए भी प्रेरित करते रहते हैं।

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टीका नहीं लगवाने से होती है मौत : यूनिसेफ

हाल में जारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वे के आंकड़ों की मानें तो भारत में सिर्फ 62 फीसद बच्चों का पूरा टीकाकरण होता है। यूनिसेफ की रिपोर्ट कहती है कि हर साल पांच लाख से ज्यादा बच्चे ऐसी बीमारियों से जान गंवा देते हैं, जिनके टीके होते हुए भी वो लगवाते नहीं हैं। इनमें भी निमोनिया व डायरिया सबसे आगे हैं। वर्ष 2016 में ही पांच साल से कम उम्र के तीन लाख से अधिक बच्चों की मौत निमोनिया व डायरिया के कारण हुई थी।

यूपी में हर वर्ष 3.5 लाख बच्चों की हो जाती है मृत्यु

उत्तर प्रदेश में अभी 76 प्रतिशत ही टीकाकरण होता है, जिसे बढ़ाने के लिए सरकार कार्यरत है। प्रदेश में हर वर्ष पांच साल से कम आयु के औसतन 3.8 लाख बच्चों की टीकाकरण न होने से मौत हो जाती है। 2020 तक 80 फीसद और 2030 तक शत प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है।

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भारत में 2020 तक 90 फीसदी बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा भारत के सभी बच्चों के लिए वर्ष 2020 तक टीकाकरण कवरेज के उद्देश्य को प्रसारित करने के लिए 25 दिसंबर 2014 को मिशन इंद्रधनुष का शुभारंभ किया गया था। मिशन इंद्रधनुष में 2020 तक 90 फीसद बच्चों को टीकाकरण के दायरे में लाने का लक्ष्य है। इसके अंतर्गत सात बीमारियों गलघोंटू (डिप्थीरिया), काली खांसी (परट्यूसिस), बच्चों को होने वाली टीबी, टिटनेस, पोलियो, हिपेटाइटिस-बी व खसरा के टीके लगाए जाते हैं। कुल 25 बीमारियां ऐसी हैं, जिनके टीके बाजार में मौजूद हैं और समुचित टीकाकरण कर बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

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