गन्ने में मिठास बढ़ी, पर नहीं हुआ किसानों का भुगतान

Sundar ChandelSundar Chandel   18 Nov 2017 11:39 AM GMT

गन्ने में मिठास बढ़ी, पर नहीं हुआ किसानों का भुगतानशुगर मिलों ने 15 नवंबर तक 7 लाख बोरे चीनी का उत्पादन कर लिया था।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। मेरठ जोन में 16 शुगर मिले हैं, जिनमें से 11 शुगर मिल लगभग एक माह से संचालित हैं। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार शुगर मिलों ने 15 नवंबर तक 7 लाख बोरे चीनी का उत्पादन कर लिया था। अगेती प्रजाति का रकबा ज्यादा होने के चलते इस बार गन्ने में चीनी भी ज्यादा निकल रही है, इसके बावजूद भी 14 दिन में भुगतान के दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। मवाना, नंगलामल, मोदीनगर, किनौनी आदि मिलों पर गन्ना डाल रहे किसानों ने भुगतान न मिलने पर गन्ना उपायुक्त से नाराजगी जताई है। साथ ही आन्दोलन की चेतावनी दी है।

प्रदेश में कुल 119 चीनी मिले हैं, जिनमें से 16 मिल अकेले मेरठ मंडल में संचालित हैं। जिनमें से 11 ने एक माह पहले से पेराई सत्र शुरू कर दिया था। पिछले सत्र की तुलना में लगभग 20 दिन पहले पेराई शुरू हो गई, जिसका फायदा शुगर मिल जमकर उठा रहे हैं। पिछले सत्र में मिल प्रबंधन भगुतान को लेकर लेट सत्र शुरू होने का बहाना करता रहता था, लेकिन इस बार जहां अगेती प्रजाति से चीनी उत्पादन अच्छा मिल रहा है, वहीं बाजार में चीनी के दाम भी अच्छे हैं। इसके अलावा सरकार ने भी 14 दिन में किसानों के खाते में पैसा देने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद भी किसानों का पैसा समय से नहीं मिल रहा है।

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मिलों पर किसानों का अभी 926 करोड़ बकाया है, निजी पर 773 और सहकारी मिलों पर 153 करोड़ बाकी है। बकायेदार मिलों में सबसे पहले मोदी, बजाज, यदु, उत्तम, राणा और सिंभावली मिल शामिल हैं। मिल जहां किसानों का पुराना भुगतान करने में आनाकानी कर रही हैं, वहीं इस बार का पैमेंट भी तय समय में नहीं दे रही है, जिससे किसान आहत हैं।

गाँव दौसा निवासी बले सिंह (57 वर्ष) बताते हैं, “नई सरकार आने से एक आस जगी थी कि अब मिल जल्दी भुगतान कर देंगी। इसी आस के चलते काम फिक्स किए थे, लेकिन मिल से फिर से पुराने रवैया अपना रही हैं। जिससे शादी, मकान सहित अन्य काम पेंडिंग हो गए हैं।“

गाँव सीकरी निवासी जोगिन्द्र (43 वर्ष) बताते हैं, “मिल चले एक माह बीत गया। पहले दिन से ही मैं पर्ची डाल रहा हूं, लेकिन अभी तक तो कोई पैमेंट आया नहीं।“ गांव सकौती निवासी बबलू (34 वर्ष) बताते हैं, “दावे सिर्फ अखबार की लाइन बनकर रह जाते हैं। मिल भी अभी तक पमेंट नहीं दे रहा है।”

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गन्ना उपायुक्त ने दी चेतावनी

किसानों की शिकायत पर गन्ना उपायुक्त हरपाल सिंह ने चीनी मिल प्रबंधन को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “चीनी बिक्री से मिलने वाला सारा पैसा एस्क्रो एकाउंट में जमा करें, जिसमें से 85 फीसदी पैसा किसानों को भुगतान के लिए दिया जाए। सभी मिल 14 दिन के अंदर किसानों को पैसा देना सुनिश्चित करें, अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें।”

छोटे किसानों को पर्चियां पहले

गन्ना उपायुक्त ने चीनी मिल समितियों को यह भी कहा कि छोटे किसानों की पर्चियां पहले जारी की जाएं, ताकि उनका गेहूं समय बोया जा सके। इसके अलावा गन्ना पर्ची का मोबाइल पर प्राप्त एसएमएस से तौल की व्यवस्था कराएं। क्रय केन्द्रों पर गन्ना लोडिंग व अनलोडिंग के नाम पर किसी प्रकार का पैसा न लिया जाए। बिना सीआईसी बैठक के किसी प्रकार का सट्टा संसोधन न किया जाए।

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अब घटतौली रोकने के लिए अंतरजनपदीय व अंतरविभागीय टीम बनाई जाएगी। इस बार शत-प्रतिशत इलेक्ट्रानिक कांटो द्वारा ही गन्ना क्रय किया जाएगा। क्षेत्र में पड़ने वाले सभी चीनी मिलों को चेतावनी दी है कि जिस भी केन्द्र पर इलेक्ट्रानिक कांटा नहीं पाया गया, उसके खिलाफ कार्रवाई निश्चित है।
हरपाल सिंह, गन्ना उपायुक्त, मेरठ

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