Top

समितियों के फेर में फंसे गन्ना किसान

Sundar ChandelSundar Chandel   30 Aug 2017 2:42 PM GMT

समितियों के फेर में फंसे गन्ना किसानसमितियां पिछले 12 सालों से किसानों के पैसे का ब्याज खा रही हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। गन्ना किसानों को गन्ना भुगतान के लिए शुगर मिलें ही नहीं, बल्कि गन्ना समितियां भी जमकर पीड़ा पहुंचा रही हैं। गन्ना विकास समितियों द्वारा पिछले 12 साल से गन्ना मुल्य किसानों के खाते तक नहीं पहुंचाया गया। जबकि समितियां पिछले 12 सालों से किसानों के पैसे का ब्याज खा रही हैं।

उप गन्ना आयुक्त द्वारा मेरठ गन्ना विकास समीति में मारे गए छापे में करीब एक करोड़ छह लाख रुपए का अनपेड गन्ना मूल्य पकड़ा गया है। इस तरह का मामला प्रदेश की सभी समितियों में होने की आशंका जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त ने मामले की पूरी रिपोर्ट गन्ना आयुक्त के पास भेज दी है।

शुगर मिल व किसानों के बीच गन्ना विभाग व गन्ना विकास समितियां व परिषद सेतु का काम करती हैं। समितियों के जरिये ही गन्ना किसान शुगर मिलों पर अपना गन्ना आपूर्ति करते हैं। अनुबंध शर्तों के मुताबिक खरीदे गए गन्ने का भुगतान शुगर मिल गन्ना समितियों को देती है। इसके बाद समितियां उस भुगतान को सदस्य किसानों के बैंक खातों में भेजती है। इसके बावजूद पात्र गन्ना किसानों पर उनका हक नहीं पहुंचने पर समितियों की मंशा पर सवाल खड़ा होता है।

लापरवाही से मर रहा हक

मेरठ परिक्षेत्र के गन्ना उपायुक्त हरपाल सिंह बताते हैं,“ समिति कर्मियों की लापरवाही के चलते किसानों तक उनका संपूर्ण गन्ना मूल्य भुगतान नहीं पहुंच रहा है। गन्ना सुपरवाइजरों द्वारा समिति सदस्यों का बैंक खाता अपडेट नहीं करने की स्थिति में भुगतान की समस्या सामने आती है। पेराई सत्र के बीच में शुगर मिल बदलने या गांव में दो मिलों के सेंटर होने पर किसान द्वारा मूल सेंटर की बजाय किसी कारणवस दूसरे मिल के सेंटर पर गन्ना डाल दिया जाता है। ऐसे में संबंधित मिल में उस किसान का बैंक खाता नहीं होने पर उसका पैसा समिति के नान अकाउंट में रखा जाता है।”

मेरठ गन्ना समिति की जांच में एक करोड़ छह लाख का घालमेल है। बाकी समितियों में भी इस तरह के मामले होने की संभावना है। सुपरवाइजरों को हिदायत दी गई है कि वह पात्र किसानों तक गन्ना भुगतान पहुंचाएं।
हरपाल सिंह, उन गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र

सभी समितियों में हो जांच तो मिलेगा घपला

मेरठ मंडल में 16 गन्ना समितियां काम कर रही हैं। उप गन्ना आयुक्त के छापे के बाद अब सभी गन्ना समितियों पर जांच की तलवार लटक गई है। जनपद सहित पूरे प्रदेश में गन्ना समितियों पर अनपेड गन्ना भुगतान होने की संभावना जताई गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार यदि प्रदेश भर की गन्ना समितियों की जांच कराई जाए तो करोड़ों का घालमेल निकलकर सामने आ जाएगा। पिछले 12 सालों से अनपेड गन्ने का भुगतान भी समितियां ही खा रही हैं।

मेरठ परिक्षेत्र के गन्ना उपायुक्त हरपाल सिंह बताते हैं,“ मेरठ गन्ना समिति में छापा मारकर अनपेड की स्थिति चेक की गई है। इसमें वर्ष 2005-6 से लेकर 2015-16 तक का करीब एक करोड़ छह लाख रुपया अनपेड मिला है। समिति ने अभी वर्ष 2016 व 2017 का हिसाब नहीं दिया है। उप गन्ना आयुक्त ने गत पेराई सत्र का हिसाब देने के साथ पूरा अनपेड किसानों के खाते में भेजने का आदेश दिया है।”

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.