आरा चलने से पहले पहुंच जाते हैं ‘पेड़ वाले बाबा’

आरा चलने से पहले पहुंच जाते हैं ‘पेड़ वाले बाबा’पेड़ वाले बाबा

लखनऊ। जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश की सरकारें पर्यावरण की रक्षा के लिए अपने राजनीतिक का्र्यकाल में नई-नई परियोजनाओं का दिखावा करती हैं और करोड़ों पेड़ लगाने के बाद उनकी देख-भाल करना भूल जाती हैं वहीं दूसरी तरफ राज्य का ही एक ऐसा व्यक्ति है जिसने पेड़ लगाने के लिए अपनी नौकरी ही छोड़ दी।

अब इनके जीवन का लक्ष्य हर घर के सामने पेड़ लगाना ही रह गया है इतना ही नहीं अगर कहीं कोई पेड़ कट रहा है तो उसे बचाने के लिए भी पहुंच जाते हैं। इनका नाम है आचार्य चन्द्र भूषण तिवारी और लोग इनको ‘पेड़ वाले बाबा’ के नाम से भी जानते हैं।

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पेड़ वाले बाबा ने 26 जनवरी 2006 में प्रण लिया था कि एक लाख पेड़ लगाएंगे, जिसे 15 अगस्त 2015 को पूरा भी कर लिया है। उन्होंने पीजीआई, सरस्वतीपुरम योजना, मानसरोवर योजना, मोहनलालगंज जेल सहित कई जगह पर वृक्षारोपण किया है। आचार्य चन्द्र भूषण तिवारी बताते हैं, ‘’मैं जब किसी के यहां पेड़ लगाता हूं तो उन्हें अपनी बेटी कहकर देता हूं कि मेरी बेटी है इसे बेटी की तरह रखना।”

पेड़ वाले बाबा आचार्य चन्द्र भूषण तिवारी की कहानी भी बहुत दिलचस्प है। मूल रूप से देवरिया जि़ले के भटपर्रानी ब्लॉक के भटवा तिवारी गाँव के रहने वाले चन्द्र भूषण तिवारी का बचपन से पेड़-पौधों के प्रति बचपन से ही लगाव था। चन्द्र भूषण तिवारी बताते हैं, ‘’गाँव के जिस स्कूल में पढ़ते थे वहां हर शनिवार बालसभा होती थी।

मैं भी उसमें हिस्सा लेता था। बाद में मैं अपने गाँव में भी बालसभा कराने लगा। इस दौरान मैं लोगों को आम, जामुन और कटहल के पौधे भी देता था। गाँव के लोग मुझसे ही पौधा लगवाते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि मेरे हाथ से कोई भी पौधा लगाओ लग जाता है।” कई बार उनकी लोगों से पेड़ कटने से रोकने के लिए झड़प भी हो जाती है। एक बार मडिय़ाव में पेड़ काटने से रोकने पर पुलिस से इनकी झड़प भी हो गयी थी। उन्होंने बताया, “मेरी कोशिश रहती है कि एक भी पेड़ न कटने पाए इसलिए अगर कहीं भी पाता चलता है कि वहां पर पेड़ कट रहा है मैं पहुंच जाता हूं।”

उत्तर-पूर्व के राज्यों में 600 से अधिक वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में आई कमी-

  • देश में कुल वन आच्छादित क्षेत्र 701,673 वर्ग किमी. है जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 21.34 प्रतिशत है। जबकि वृक्ष आच्छादित क्षेत्र 92,572 वर्ग किलोमीटर है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 2.82 प्रतिशत है।
  • देश में पेड़ों तथा वनों का समग्र क्षेत्रफल 794,245 वर्ग किलोमीटर (79.42 मिलियन हेक्टेयर) है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 24.16 प्रतिशत है।
  • 2013 के पिछले मूल्याकंन की तुलना में वन आच्छादित क्षेत्रफल में 3775 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई वहीं वृक्ष आच्छादित क्षेत्रफल में 1306 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है।
  • भारत के समग्र वन क्षेत्रों में एक चौथाई उत्तर-पूर्व के राज्यों में है। पिछले मूल्यांकन की तुलना में उत्तर-पूर्व के राज्यों में 628 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में कमी आई है।
  • राज्यों की दृष्टि से सर्वाधिक वनों के क्षेत्रफल में तमिलनाडु (2501 वर्ग किलोमीटर), दूसरे स्थान पर केरल (1317 वर्ग किलोमीटर) तथा तीसरे स्थान पर जम्मू एवं कश्मीर (450 वर्ग किलोमीटर) में कुल वन क्षेत्र में वृद्धि हुई हैं।
  • देश में वन क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य मध्य प्रदेश (77,462 वर्ग किलोमीटर) है। उसके बाद अरुणाचल प्रदेश (67,248 वर्ग किलोमीटर) तथा छत्तीसगढ़ (55,586 वर्ग किलोमीटर) तीसरे स्थान पर है। (वर्ष 2015 की यह रिपोर्ट भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा द्विवार्षिक आधार पर जारी की गई है।

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