शिक्षक फरमारहे आराम बच्चे कर रहे मौज 

शिक्षक फरमारहे आराम बच्चे कर रहे मौज सरकार प्राथमिक विद्यालयों की हालत सुधारने के लिए हर साल करोड़ों रुपए खर्च करती है।

अनिल चौधरी, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

पीलीभीत। केंद्र और प्रदेश सरकार प्राथमिक विद्यालयों की हालत सुधारने के लिए हर साल करोड़ों रुपए खर्च करती है। बावजूद यहां पर शिक्षा का स्तर सुधरने का नाम नहीं ले रहा है।

प्रदेश में कई ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जहां शिक्षकों की कमी है। वहीं कुछ ऐसे भी स्कूल हैं, जहां दो-चार बच्चों पर दो-दो टीचर हैं। जो टीचर हैं, वो भी बच्चों को पढ़ाने की जगह आराम फरमाते नजर आते हैं। जनपद मुख्यालय से 10 किमी दूर मरौरी ब्लाक के जूनियर हाईस्कूल पिपरावाला का भी कुछ ऐसा ही हाल है।

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यहां 121 बच्चों का नाम पंजीकृत है, लेकिन मौके पर मात्र 26 बच्चे ही विद्यालय में पाये गए। 121 बच्चों के लिए विद्यालय में पांच अध्यापक नियुक्त हैं, जबकि नियमानुसार चार अध्यापकों की नियुक्ति विद्यालय में होनी चाहिए। इस विद्यालय में एक भी अध्यापक बच्चों को पढ़ाते हुए नहीं मिला।

अध्यपकों को अपनी जिम्मेदारी को सही तरीके से निभानी चाहिए। लापरवाह अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एमके अंसारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

एक सहायक अध्यापिका अन्जू अग्रवाल अपनी कक्षा में दो बच्चों को घेर कर अपनी कुर्सी पर आराम से नींद फरमा रही थीं। इसी तरह का हाल प्राथमिक नवदिया दहला का भी मिला, जहां 80 बच्चों का नाम पंजीकृत हैं, लेकिन विद्यालय में मात्र 10 बच्चे ही उपस्थित थे। इस विद्यालय में 03 अध्यापकों की नियुक्ति है, जो अपने छोटे से बच्चे को कक्षा में खिलाने के साथ साथ 10 बच्चों को घेरकर बैठी थीं।

बच्चों की कम संख्या के बारे में जब गाँव कनेक्शन रिपोर्टर ने ग्रामीण धर्मेन्द्र व सत्यप्रकाश से पूछा कि आप अपने बच्चों को स्कूल क्यों नहीं भेजते। उन्होंने कहा,‘ स्कूल में अध्यापक पढ़ाते ही कहां हैं। सारा दिन मोबाइल पर ही लगे रहते हैं। अध्यापिकाएं अपने बच्चों को खिलाकर अपना समय व्यतीत करती हैं।’

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