तकनीक के इस्तेमाल से गोंडा के डीएम ने ऐसे कसी थी नकल पर नकेल

तकनीक के इस्तेमाल से गोंडा के डीएम ने ऐसे कसी थी नकल पर नकेलपरीक्षा के दौरान एक कॉलेज में जांच पड़ताल करते तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन। फाइल फोटो

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरे मंच से उस जिले को नकल की मंडी कहा था, सरकार और प्रशासन के सामने नकल माफिया के गठजोड़ को तोड़ पाना एक चुनौती थी, लेकिन एक डीएम ने अपनी इच्छा शक्ति और तकनीकी के इस्तेमाल से नकल रोक कर दिखाई।

गोंडा। इस बार जब उत्तर प्रदेश में 10वीं और 12वीं के नतीजे आए तो आंकड़े चौकाने वाले थे। लोगों की नजर टॉपर के अलावा गोंडा के नतीजों पर भी थी। आंकड़ों में करीब 30- 40 फीसदी की गिरावट हुई। हाईस्कूल के बीते वर्ष के नतीजे 92 प्रतिशत की तुलना में इस बार 64 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 96 प्रतिशत की तुलना इस वर्ष मात्र 54 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हुए।

नकल के लिए बदनाम गोंडा में तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने तकनीकी, सख्ती और जागरुकता की ऐसी रणनीति बनाई कि नकल माफिया का सिंडिकेट टूट गया। जिला प्रशासन ने परीक्षा के काफी पहले से नकल रोकने की रणनीति तैयार कर ली थी, लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव के दौरान एक जनसभा में जिले को नकल की मंडी करार दिया, तो प्रशासन ने इसे एक चुनौती की तरह लिया।

गोंडा के ईमानदार लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों को एक चुनौती के तौर पर लिया, प्रशासन, पुलिस, जनता सब ने नकल के धब्बे को मिटाने की कोशिश की। हम लोगों ने अच्छी रणनीति, सोशल मीडिया का बेहतर इस्तेमाल और सूझबूझ से इस मुश्किल से लगने वाले काम को कर दिखाया।
आशुतोष निरंजन (आईएएस) तत्कालीन डीएम, गोंडा

बोर्ड के नतीजों के बाद गांव कनेक्शन से खास बात में फोन पर गोंडा के तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन बताते हैं, “गोंडा के ईमानदार लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों को एक चुनौती के तौर पर लिया, प्रशासन, पुलिस, जनता सब ने नकल के धब्बे को मिटाने की कोशिश की। हम लोगों ने अच्छी रणनीति, सोशल मीडिया का बेहतर इस्तेमाल और सूझबूझ से इस मुश्किल से लगने वाले काम को कर दिखाया।” आशुतोष (आईएएस) इस वक्त कानपुर के केस्को के एमडी के पद पर तैनात हैं। वो नतीजें पर खुशी जताते हुए कहते हैं, “ गोंडा से पास और फेल हुए छात्र-छात्राओं को मेरी बधाई, सब को ये याद रखना चाहिए कि ‘नंबर’ लंबी रेस में बहुत ज्यादा काम नहीं आते, लेकिन आप की मेहनत और ईमानदारी हमेशा साथ रहती है और रिजल्ट देती है।”

आशुतोष निरंजन।

कैसे कसी नकल पर नकेल

पूरे जिले को चार जोन, 30 सेक्टर में बांटते हुए न केवल वहां वरिष्ठ जनपद स्तरीय अधिकारियों को तैनात किया गया, बल्कि जिले के सभी 224 परीक्षा केंद्रों पर कमसे कम दो और ज्यादा से ज्यादा 4 स्टेटिक व सुपर स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात किये गए। ज़िला प्रशासन ने WhatsApp पर बोर्ड एग्जाम गोंडा वन, टू और थ्री नाम से तीन ग्रुप बनाए गए, जिनमें जिले के सभी नवनियुक्त राजस्व लेखपालों, चकबंदी लेखपालों, ग्राम पंचायत अधिकारियों, कृषि विभाग के तकनीकी सहायकों, लोक निर्माण, सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, समाज कल्याण निर्माण निगम समेत सभी कार्यदाई संस्थाओं के अवर अभियंताओं, सहायक अभियंताओं, अधिशासी अभियंताओं समेत जिले के सभी जनपद स्तरीय अधिकारियों तथा मंडल के करीब 3 दर्जन अधिकारियों ( कुल संख्या करीब 700) के WhatsApp नंबर को जोड़ा गया।

जिले को चार जोन, 30 सेक्टर में बांटते हुए न केवल वहां वरिष्ठ जनपद स्तरीय अधिकारियों को तैनात किया गया, बल्कि जिले के सभी 224 परीक्षा केंद्रों पर कमसे कम दो और ज्यादा से ज्यादा 4 स्टेटिक व सुपर स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात किये गए।

इन अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने परीक्षा केंद्र अथवा क्षेत्र की जानकारी इन्हीं सोशल मीडिया के तीनों ग्रुप पर मिलती थी। अगले दिन पहली पाली में सुबह 7.30 बजे से होने वाली परीक्षा की ड्यूटी ग्रुप पर पहले रात 11:00 बजे के बाद पोस्ट की जाती थी और दूसरी पाली में होने वाली परीक्षा की ड्यूटी उसी दिन 11:00 बजे के बाद पोस्ट की जाती थी, जिससे नकल माफियाओं को यह पता न चल सके कि उनके यहां कौन सा अधिकारी या कर्मचारी ड्यूटी पर पहुंच रहा है।

ग्रुप पर दी जाती थी ड्यूटी की सूचना

whats app ग्रुप पर ही अपनी ड्यूटी की सूचना पाकर सभी स्टेटिक व सुपर स्टेटिक मजिस्ट्रेट परीक्षा शुरू होने से आधे घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाते थे। इसकी पुष्टि के लिए वे केंद्र के गेट पर पहुंच कर एक सेल्फी लेकर ग्रुप पर पोस्ट करते थे। साथ ही उन्हें परीक्षार्थियों के केंद्र पर प्रवेश के समय गेट पर उनकी तलाशी की फोटो भी ग्रुप पर पोस्ट करना होता था। पूरे समय तक सभी स्टेटस व सुपर स्टेटिक मजिस्ट्रेट परीक्षा केंद्र पर घूमते रहते थे और परीक्षा समाप्त होने के बाद, उत्तर पुस्तिकाओं को सील कराने के उसकी फोटो ग्रुप पर पोस्ट करके परीक्षा केंद्र से रवाना होते थे। हर विषय में स्टेटिक मजिस्ट्रेट व सुपर स्टेटिक मजिस्ट्रेट का परीक्षा केंद्र बदल दिया जाता था, जिससे कोई भी नकल माफिया किसी से सेटिंग ना कर सके।

प्रशासन के साथ इस अभियान में समाज से जुड़े लोग शामिल रहे। वरिष्ट पत्रकार बीके द्विदेदी बताते हैं, निश्चित रुप से नकल गोंडा पर दाग थी, इसे मिटाने की तैयारी 2016 के रिजल्ट आने के बाद से ही शुरु हो गई थी, डीएम साहब (आशुतोष निरंजन) ने केद्र व्यवस्थापकों, बच्चों से शपथ दिलाई, लेकिन सबसे बेहतर रहा उनका वह्ट्सएप का इस्तेमाल रहा। वो सूचना विभाग के निदेशक रह चुके थे और उसका सही इस्तेमाल किया। नतीजे आपके सामने हैं।

निश्चित रुप से नकल गोंडा पर दाग थी, इसे मिटाने की तैयारी 2016 के रिजल्ट आने के बाद से ही शुरु हो गई थी, डीएम साहब ने केद्र व्यवस्थापकों, बच्चों से शपथ दिलाई, लेकिन सबसे बेहतर रहा उनका WhatsApp का इस्तेमाल रहा।
बीके दिवदेदी, वरिष्ट पत्रकार, गोंडा

औचक निरीक्षण के लिए बनाया गया 'सचल दल'

इसके साथ ही 'सचल दल' नाम से एक अन्य ग्रुप भी WhatsApp पर बनाया गया था, जिसमें सभी आधा दर्जन सचल दल प्रभारियों व उनके सदस्यों के मोबाइल नंबर को जोड़ा गया था। इन सचल दल प्रभारियों को भी रोजाना परीक्षा शुरू होने से 2 घंटे पहले इसी ग्रुप पर सूचना दी जाती थी कि उन्हें किन विद्यालयों और किस रूट पर औचक निरीक्षण के लिए पहुंचना है। सभी सचल दल प्रभारी पूर्व निर्देशानुसार कार्यवाही करते हुए ग्रुप पर नियमित रिपोर्टिंग करते थे, जिसकी मानिटरिंग जिलाधिकारी द्वारा की जाती थी और किसी भी ग्रुप पर किसी भी समस्या का समाधान भी उनके द्वारा तत्काल किया जाता था।

जब गोंडा में हो सकता है तो पूरे प्रदेश में क्यों नहीं ?

उत्तर प्रदेश की बोर्ड परीक्षाओँ में नकल को लेकर बीजेपी ने सपा और बसपा दोनों सरकारों पर निशाना साधा। और जब वो सत्ता में रही नकेल पर काफी हद तक रोक रही। कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह की सरकारों के दौरान वो दिखाई भी दिया था। लेकिन गोंडा के नतीजे किसी भी सरकार और प्रशासन के लिए एक नजीर हैं, जब एक डीएम अपनी इच्छाशक्ति से ऐसा कर सकता है तो बाकी जिलों में क्यों नहीं।




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