‘मेरी बेटी कभी आत्महत्या नहीं कर सकती, मुख्यमंत्री जी एक बार जांच करवा दीजिए’

‘मेरी बेटी कभी आत्महत्या नहीं कर सकती, मुख्यमंत्री जी एक बार जांच करवा दीजिए’बेटी की मौत का न्याय मांगने योगी के दरबार में पहुंची महिला

लखनऊ। पसीने से तरबतर रामादेवी राय (उम्र 46 वर्ष) मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर सड़क किनारे बदहवास बैठी हुई थी। आँखों में आंसू भरे हुए थे और भरी आवाज़ में बस इतना ही बोल रही थीं, “मुख्यमंत्री जी हमें कोई सुन नहीं रहा है। पुलिस अधिकारी भगा रहे हैं। हमें न्याय चाहिए।”

झांसी की रहने वाली रामादेवी राय की बेटी हिमानी राय (21 वर्ष) इंडियन कन्वेंट स्कूल में शिक्षिका थी। 21 मार्च को स्कूल की छत से संदिग्ध हालत में गिरने से मौत हो गयी थी। रामादेवी राय घटना के बाद पुलिस और स्थानीय नेताओं के पास न्याय की मांग करने गईं, लेकिन उन्हें कोई सुनने वाला नहीं है। मृतका हिमानी राय की बैग से एक सुसाइड नोट भी मिला था। जिसमें उन्होंने इंडियन कन्वेंट की प्रिंसिपल मधु और प्रबंधक राकेश को आत्महत्या करने के लिए जिम्मेदार बताया था। पुलिस राकेश को गिरफ्तार कर चुकी है।

मृतक का भाई गौरव राय

मृतक हिमानी राय की माँ रामादेवी रोते हुए कहती हैं, “मेरी बेटी तो चली गयी। अब वो लौट के तो नहीं आने वाली लेकिन मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी को न्याय मिले। उसको मारने वालों को सजा मिले। मेरी बेटी बहुत होनहार थी। हम गरीब है तो बेटी के पैसे से घर का खर्च में सहायता मिल जाती थी। स्कूल प्रशासन ने उसकी हत्या कर दी है।

आत्महत्या नहीं हत्या है.

मृतक हिमानी राय की बैग से एक सुसाइड नोट भी मिला था। जिसमें उन्होंने इंडियन कन्वेंट की प्रिंसिपल मधु और प्रबंधक राकेश को आत्महत्या करने के लिए जिम्मेदार बताया था। पुलिस राकेश को गिरफ्तार कर चुकी है।

हिमानी आत्महत्या की हैं इस बात को उनके भाई गौरव राय नकारते हुए बताते हैं, "मैं हर दिन अपनी बहन को छोड़ने और लाने जाता था। उस रोज भी सुबह छोड़कर आया था और दोपहर में जब लेने गया तो स्कूल की प्रिंसिपल मधु ने गुस्से में कहा कि अभी मीटिंग चल रही है तुम जाओ ये आधे में चली जाएगी। मैं घर वापस आ गया। आधे घंटे बाद फोन आया कि हिमानी गिर गयी है। हम जब तक स्कूल पहुंचे स्कूल वाले मेरी बहन को अस्पताल लेकर चले गए थे। एक दिन अस्पताल में रहने के बाद मेरी बहन की मौत हो गयी।

पेपर लीक का था आरोप

मृतक हिमानी राय के भाई गौरव राय बताते हैं कि मेरी बहन स्कूल के अलावा बच्चों को कोचिंग भी देती थी। कोचिंग लेने वाले कुछ बच्चे स्कूल के भी थे। उन्होंने अपने स्कूल के कुछ बच्चों को परीक्षा के पहले ही पेपर दे दिया था, जिसको लेकर स्कूल प्रबंधन मेरी बहन को परेशान कर रहा था। वो मांफी भी मांग ली थी लेकिन वो लोग उस पर लगातार दबाव बना रहे थे। इससे वो परेशान तो थी लेकिन आत्महत्या नहीं कर सकती है।

गौरव हिमानी की कुछ तस्वीरें दिखाते हुए बताते हैं कि अगर कोई छत से गिरकर आत्महत्या करता है तो उसका सर फट जाता है, लेकिन मेरी बहन के सर पर कुछ नहीं हुआ था बल्कि उसके नाख़ून उखड़े हुए थे।

सहयोग-दिति बाजपेई

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