बच्चों ने गाँव-गाँव लगाए नारे, ‘पढ़ी-लिखी लड़की, रोशनी घर की’

Divendra SinghDivendra Singh   16 Nov 2017 10:00 PM GMT

बच्चों ने गाँव-गाँव लगाए नारे, ‘पढ़ी-लिखी लड़की, रोशनी घर की’बदायूं में मीना मंच के बच्चों ने गाँव-गाँव जाकर सर्वे किया।

दिवेन्द्र सिंह/शुभम कौल

बदायूं। 'पढ़ी-लिखी लड़की रोशनी घर की’…, ‘चाचा ताऊ भूल न जाना, अपने बच्चों को स्कूल ले जाना’। मीना मंच के बच्चे जब गाँव-गाँव की गलियों से घरों के बाहर नारे लगाते हुए निकल रहे थे तो हर कोई उन्हें उत्सुकता से देख रहा था। बच्चे घर-घर जाते और बड़े-बुजर्गों से बातचीत करते और हाथों में लिए कागज में बार-बार कई सारी बातें लिखते। यह नजारा था बदायूं के एक गाँव का।

कौन विद्यालय नहीं और क्यों नहीं आ रहा है, किसके घर में शौचालय नहीं है और जिनके घर में है भी, वो क्यों खुले में शौच के लिए जाते हैं, ऐसे कई मुद्दों पर मीना मंच के बच्चों ने गाँव-गाँव जाकर ग्रामीणों से बात कर जानकारी इकट्ठा की।

माता-पिता को समझाया, स्कूल भेजिए

पुष्पा छठवीं कक्षा में नाम लिखाने के बाद स्कूल में नहीं जाती थी, तब पूर्व माध्यमिक विद्यालय गंगपुर पुख्ता की मीना मंच की सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली सुमन कुमारी ने पुष्पा और उनकी माता-पिता को समझाया कि उसे स्कूल भेजें। पुष्पा की माँ श्यामा देवी कहती हैं, "बेटी है, पढ़-लिख कर क्या करेगी, पहले तो मैंने भी मना किया कि नहीं भेजेंगे, लेकिन तब स्कूल की लड़कियां कई बार आईं और बताया कि इसे स्कूल भेजो, अब पुष्पा स्कूल जाने लगी है।"

पुष्पा जैसे हम भी थे

सुमन कुमारी ने पुष्पा की मां को समझाते हुए कहा, "हम लोग भी पहले पुष्पा की तरह ही थे, लेकिन अब देखो मीना मंच की मदद से हम दूसरों को स्कूल भेज रहे हैं, पुष्पा भी हमारी तरह से ये भी मीना मंच में आ जाएगी।" ऐसे कई लड़के और लड़कियों को अब स्कूल जाने लगे हैं, कई लड़के जो पहले खेत में काम करते थे अब पढ़ने आते हैं।

मीना मंच के बच्चों ने गाँव-गाँव जाकर किया सर्वे

यूनिसेफ और गाँव कनेक्शन के साझा प्रयास से 14 से 20 नवम्बर के बीच उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में चल रहे कार्यक्रम के तहत मीना मंच के बच्चों ने बदायूं ज़िले में गाँव-गाँव जाकर सर्वे किया, इस सर्वे में कुछ अहम मुद्दे शामिल रहे, जिसमें बाल विवाह, बाल मज़दूरी जैसे कई अहम मुद्दों पर बात हुई। सर्वे में एक्शन ऐड और गैर सरकारी संस्था श्रमिक समाज शिक्षा संस्थान के कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया।

रश्मि ने रोका अपना बाल विवाह

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राएं भी मीना मंच से जुड़ी हैं, मीना मंच से जुड़ी रश्मि ने अपना बाल विवाह रोक दिया था। रश्मि की छोटी बहन अनूपा इस बार आठवीं में पढ़ रहीं हैं। अनूपा बताती हैं, "चाचा ने दीदी की शादी तय कर दी थी, लेकिन दीदी ने शादी से मना कर दिया, उन्होंने कहा कि मुझे पढ़ना है, उन्होंने विरोध जताया तो आखिर में सब मान गए, अब दीदी आगे पढ़ रही हैं।"

बच्चों और बड़ों सब में बदलाव आया

मीना मंच के जिला समन्वयक महेंद्र सिंह बताते हैं, "हमारा प्रयास रहता है कि लड़का-लड़की सबको समान शिक्षा मिले, मीना मंच से जुड़कर बच्चों और बड़ों सब में बदलाव आया है।"

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