गन्ना ढुलाई भाड़े के नाम पर किसानों से धोखा  

गन्ना ढुलाई भाड़े के नाम पर किसानों से धोखा  गन्ना किसान

मेरठ। सरकार से हजारों करोड़ रूपए की रियायत झटकने के बाद भी शुगर इंडस्ट्री किसानों से धोखाधड़ी करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रही है। एसएपी की पहली किस्त 325 रूपए प्रति कुंतल के हिसाब से भुगतान करने की सुविधा के बाद भी शुगर मिलें भाड़े के नाम पर किसानों को धोखा दे रही हैं।

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पर्ची पर बिना कुछ दर्षाए 8.75 रूपए प्रति कुंतल गुपचुप तरीके से काटकर किसानों के खाते में शेष पैमेंट भेजा जा रहा है, जबकि लास्ट किस्त से ढुलाई काटने का नियम गन्ना विभाग ने बनाया है। कुछ जागरूक किसानों ने इसका विरोध गन्ना अधिकारियों से किया है।

अब तक 20 करोड़ रूपए काट चुकी मिलें

मंडल की शुगर मिलें अब तक लगभग 20 करोड़ रूपए किसानों का भाड़े के नाम पर काट चुकी हैं। जबकि सीधे-साधे किसानों को यह भी नहीं पता है कि उनका पैसा क्यों काटा जा रहा है। किसानों को अभी तक भी पांच रूपए प्रति कुंतल का ही भाडे़ का रेट पता है, जो पिछले साल काटा गया था। क्षेत्र के कुछ जागरूक किसानों का कहना है कि हर वर्ष भाड़े का पैसा लास्ट किस्त से काटा जाता था, फिर इस बार पहली किस्त से क्यों काटा जा रहा है। किसानों ने आन्दोलन की चेतावनी दी है।

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पर्ची पर नहीं कुछ अंकित

सरकार की और से मिल चलने से पहले ही अरली प्रजाति 325 और सामान्य प्रजाति 310 रुपए प्रति कुंतल रेट घोषित हो चुका है। लेकिन शुगर मिल प्रबंधन अभी भी पर्ची पर कोई रेट और भाड़े का ब्यौरा अंकित नहीं कर रहा है। जबकि पहली किस्त का भुगतान भी किसानों को हो चुका है। ऐसे में किसान यही समझ रहे हैं कि लास्ट किस्त से पांच रुपए प्रति कुंतल ढुलाई काटकर भुगतान होगा। जबकि शुगर मिल पहली किस्त से ही 8.75 रूपए प्रति कुंतल के हिसाब से पैसे काट चुका है।

ये भी है नियम

गन्ना खरीद एवं आपूर्ति अधिनियम व जीएसआर के मुताबिक शुगर मिलों को खरीदे गए गन्ने का पैमेंट 14 दिन के अंदर करना होता है। अगर मिल ऐसा नहीं करती हैं तो उस पर 15 फीसदी की दर से देय गन्ना मूल्य भुगतान पर विलंब ब्याज लगाने व किसानों से ढुलाई भाड़ा नहीं काटने का प्रावधान है।

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क्या कहते हैं किसान

मवाना शुगर मिल क्षेत्र के गाँव पाली निवासी अरूण कुमार (32 वर्ष) बताते हैं कि पर्ची पर अभी रेट व भाड़ा कुछ भी अंकित नहीं है। भुगतान पहली बार ही काफी काटकर दिया गया। कई बार समितियों के चक्कर लगाने पर पता चला कि 8.75 रूपए प्रति कुंतल ढुलाई काटी गई है। जबकि उन्हे पांच रूपए प्रति कुंतल के रेट का ही पता है।

मंडल की सभी मिलों को पर्ची पर पूरी जानकारी देने के लिए कहा गया है। यदि इसके बावजूद भी लापरवाही बरती जा रही है। तो जांच कर कार्रवाई निश्चित है। साथ ही ढुलाई के रेट का भी किसानों को पता होना जरूरी है।
हरपाल सिंह, गन्ना उपायुक्त

गांव निढावली निवासी समय नानक चंद (54 वर्ष) बताते हैं कि जितना पैसा काटा जा रहा है, कम से कम किसान को तो पता होना चाहिए, लेकिन पर्ची पर बस गन्ने का वजन अंकित है। ऐसे में उन्हे क्या पता कि कितना पैसा उनका गुपचुप तरीके से काट लिया जा रहा है।

450 करोड़ कटता है ढुलाई भाड़ा

प्रदेश की शुगर मिलें औसत एक सत्र में करीब 50 से 55 करोड़ कुंतल गन्ना सेंटरों के माध्यम से खरीदती हैं। गन्ने को सेंटर से मिलों तक ले जाने के लिए शुगर मिल 8.75 प्रति कुंतल से ढुलाई भाड़ा वसूलती है, जबकि किसानों को अभी भी पांच रूपए प्रति कुंतल का ही पता है। इस तरह से प्रदेश में एक सत्र में करीब 450 करोड़ रूपए ढुलाई भाड़े के नाम पर वसूला जाता है।

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आन्दोलन की चेतावनी

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत कहते हैं, “जितना भी पैसा आप काट रहे हो, इसका जिक्र पर्चियों पर होना जरूरी है। जब पर्चियों पर कुछ नहीं लिखा होगा, तो किसान अपने माल का कैसे हिसाब रख सकेगा। शुगर मिलों की हटधर्मिता चलने नहीं दी जाएगी।

रालोद नेता राजकुमार सांगवान ने कहा, “इस तरह से पैसा वसूलना किसानों के साथ धोखा है। जो बर्दाश्त से बाहर है। गन्ना विभाग के अधिकारियों से इसकी जानकारी लेकर विरोध प्रदर्षन की रूप रेखा तैयार की जाएगी।”

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