ग्राम पंचायत में तालाब तो है, लेकिन उनमें पानी नहीं, कैसे बुझेगी पशुओं की प्यास  

Mohit AsthanaMohit Asthana   7 May 2017 6:49 PM GMT

ग्राम पंचायत में तालाब तो है, लेकिन उनमें पानी नहीं,  कैसे बुझेगी पशुओं की प्यास  तालाबों में पानी न होने की वजह से पशु-पक्षियों को गला तर करने के लिए पानी नहीं मिल रहा है।

विमल यादव, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

औरैया। विकास खंड अछल्दा की ग्राम पंचायत गुनौली में काफी बड़ा तालाब बना हुआ है। तालाब में धूल उड़ रही है। तालाबों में पानी न होने की वजह से पशु-पक्षियों को गला तर करने के लिए पानी नहीं मिल रहा है।

जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर अछल्दा ब्लाक के गाँव गुनौली में गाँव से लगा हुआ एक तालाब है। जिसकी बाउंड्री मनरेगा के तहत बनवा दी गई है। तालाब पर अगर नजर डालें तो इतना बड़ा है कि वह अगर भर दिया जाए तो पशु-पक्षियों के लिए पानी की समस्या नहीं रहेगी। मुकेश कुमार (25 वर्ष) निवासी गुनौली का कहना है, “प्रधान ने अभी तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया है।

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पानी भरवाने के लिए कहा गया तो प्रधान ने यह कहकर टाल दिया कि बजट ही नहीं आया है तो कहां से भराएं?” यहीं के अक्षय मिश्रा (28 वर्ष) का कहना है, “प्रधान गाँव की सफाई पर भी कोई ध्यान नहीं देते हैं। तालाब में पानी न होने की वजह से पशु-पक्षी परेशान रहते हैं।”तालाब में बबूल के पौधे खड़े हैं। इससे पता चलता है कि तालाब में न इस साल पानी भरने का प्रयास किया गया और न ही पिछले साल। आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? तालाब में पानी भरने के लिए बजट आता है। अगर बजट न आए तो प्रधान को अपने पैसे से तालाब में पानी भराने का आदेश है।

प्रधान नहीं दे पाईं सटीक जवाब

प्रधान राधिका दीक्षित से जब तालाब न भराए जाने के संबंध में बात की गई तो वह कोई सटीक जवाब नहीं दे पाईं। क्योंकि वो प्रधान तो सिर्फ नाम की है जब कि सारा काम उनके पति ही करते हैं। इसलिए उन्हें यही नहीं मालूम है कि तालाब कैसे भरा जाए।

गाँवों में पानी की किल्लत

अश्वनी द्विवेदी, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

लखनऊ। गर्मी का मौसम आते ही गाँवों में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। कुएं और तालाब सूख गए हैं। इंसानों के साथ ही पशु-पक्षियों के लिए भी पीने के पानी का संकट गहरा गया है। माल, बीकेटी, मोहनलालगंज, सरोजनीनगर, गोसाईगंज, चिनहट विकास खण्डों के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों के गाँवों में मनरेगा के तहत बने अधिकांश तालाब सूख गये हैं।

जलस्तर भी दिन-प्रतिदिन नीचे गिरता जा रहा है। राजधानी लखनऊ के आठों ब्लाकों में करीब 518 तालाबों की खोदाई कराई गई थी। तालाबों की खोदाई कराने का मकसद था कि भूगर्भ जल का संरक्षण हो सके। इसमें लखनऊ के अंतर्गत आने वाले सभी आठों ब्लाकों में लगभग 203.84 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तालाबों की खोदाई कराई गई थी।

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इससे प्रतिवर्ष लगभग 21,872 लाख लीटर अतिरिक्त जल संग्रह करने की योजना बनी थी। इसके साथ ही 7381.80 लाख लीटर अतिरिक्त भूजल रिचार्ज होने की उम्मीद थी, लेकिन तालाब तो खोद दिए गए, लेकिन उनमें पानी का अता-पता नहीं है। ग्राम उद्वतपुर निवासी दिनेश पाल (35 वर्ष) बताते हैं, “सरकार की योजनाएं अच्छी हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं हो पाया, तालाब सिर्फ नाम के हैं।” बीकेटी के ग्राम पंचायत खेसरावा के प्रधान सौरभ सिंह ने बताया, “ पता नहीं कौन सी इंजीनियरिंग का प्रयोग तालाब में हुआ है, जो वर्षा का जल तालाब तक पहुंचता ही नहीं।”

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