आंधी-तूफान से आम की फसल को भारी नुकसान, आम के दाम भी गिरे

आंधी-तूफान से आम की फसल को भारी नुकसान, आम के दाम भी गिरेआंधी से गिरे पेड़।

सुरेन्द्र कुमार

लखनऊ। बुधवार को आई तेज आंधी ने मलिहाबाद में आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। जहां पहले से ही क्षेत्र में आम की फसल केवल 30 प्रतिशत थी, वहीं अब क्षेत्र में लगभग तीन प्रतिशत आम के पेड़ आंधी मे धराशाही हुए हैं। इससे पहले इस क्षेत्र के बागों की बिक्री मार्च के आखिरी हफ्ते तक 70 प्रतिशत हो चुकी थी। आंधी आने से यहां के आम किसानों को भारी नुकसान हुआ है। तेज हवा से गिरे आमों को जब मण्डियों में बेंचने के लिए ले जाया गया तो वहां इस आम का रेट मात्र 3 से 4 रुपया किलो ही मिला।

खेती किसानी से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

फलपट्टी क्षेत्र माल, मलिहाबाद और काकोरी में करीब साढ़े 36 हेक्टेयर भू-भाग पर आम के बाग हैं। मलिहाबाद क्षेत्र के निवासियों का मुख्य व्यवसाय आम है जिस पर यहां के लोग अपने पूरे साल के घरखर्च के लिए निर्भर रहते हैं। इस आंधी ने बागवानों की तो जैसे कमर ही तोड़ दी है। आंधी से बागों में लगे सभी पेड़ झकझोर उठे हैं।

पेड़ों के साथ गिरे आम भी।

नत्थूखेड़ा गांव के बागवान अरविन्द सिंह (45 वर्षीय) बताते हैं, “पास पांच बीघा आम के बाग हैं। इसमें 40 प्रतिशत आम की फसल आयी थी। तेज आंधी से बाग में करीब तीन प्रतिशत आम जमीन पर गिर गए हैं।” उन्होंने आगे बताया कि बृहस्पतिवार सुबह जब इन आमों को बिनकर मण्डियों में पहुंचाया गया तो वहां इस आम का रेट सही नहीं मिला और इससे किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है।

फरवरी में ही आम के बागों की खरीददारी कर ली थी। कुदरत की मार से उनमें पहले ही 30 प्रतिशत बौर आया था। जो आम बैठा भी, उसे इस आंधी ने बर्बाद कर दिया। अगर एक-दो आंधी ऐसी ही और आ गयीं तो बागों मे कुछ नहीं बचेगा।
बागवान छेदीलाल, मनकौटी गांव, मलिहाबाद

ढ़ेढ़ेमऊ गांव के बागवान मदनबहादुर सिंह (60 वर्षीय) कहते हैं, “आम अभी चटनी बनाने लायक ही है। आम में अभी जाली नहीं पड़ी है जिससे आम मे परिपक्वता अभी नहीं आई है क्योंकि इस आम का बाजारों में उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। जिससे उसकी छिलाई कर खटाई बनायी जा रही है।” बागवानों का कहना है कि आम उत्पादन यहां का मुख्य व्यवसाय होने से प्रदेश सरकार को इसमें हुए भारी नुकसान की ओर ध्यान देना चाहिए जिससे बागवानों को कुछ राहत मिल सके।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top