अवैध कब्जा करने वाले सावधान हो जाएं, योगी सरकार के इस अभियान से बचना मुश्किल

अवैध कब्जा करने वाले सावधान हो जाएं, योगी सरकार के इस अभियान से बचना मुश्किलकन्नौज में एसडीएम की निगरानी में अवैध जमीन से कब्जा हटवाया गया।

दिवेन्द्र सिंह/अजय मिश्रा/ इश्तेयाक अहमद/ सुंदर चंदेल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी ग्राम पंचायत और निजी जमीनों पर कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं। योगी सरकार ने पहली बार राजस्व और पुलिस विभाग के साझा सहयोग से जो अभियान शुरू किया है उसे काफी सफलता मिल रही है। जमीन कब्जा मुक्त कराने के श्रावस्ती जिले के मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। सरकार की योजना मार्च तक हर तरह की जमीन को कब्जा मुक्त कराने की है।

जमीन विवाद को लेकर खासे विवादित राज्य उत्तर प्रदेश में विशेष भूमि विवाद निस्तारण अभियान माह चलाया जा रहा है। बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में जमीन कब्जा मुक्त कराने का वादा किया था, सरकार बनने के बाद एंटी भू-माफिया बिग्रेड बनी। लेकिन गांव के लिए 1 जनवरी से अब विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

सरकार ने हर गांव के लिए बाकायदा एक कैलेंडर जारी किया है, जिसमें तय है कि राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीमें कब किस गांव जाएंगी। नए अभियान के तहत उन जमीनों से भी कब्जा हट गया है, जिस पर 50-50 वर्षों से दबंग जमे हुए थे। अभियान का पूरा ब्यौरा http://bor.up.nic.in/bhraman/index2.html पर उपलब्ध है। यहां लोग ये भी देख सकते हैं किन उनके गांव में कौन सी टीम और कब आने वाली है।

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कन्नौज जिला प्रशासन ने दो तहसीलों से करीब 800 बीघा चरागाह वाली जमीन कब्जा मुक्त कराई है। ये जमीन पशुओं के चरने के लिए थी, लेकिन दबंगों ने कब्जा कर रखा था। प्रशासन अब आरोपियों से जुर्माना भी वसूलने की तैयारी में है।

कन्नौज में एसडीएम सदर शालिनी प्रभाकर की निगरानी में अवैध जमीन से कब्जा हटवाया गया।

कन्नौज में एसडीएम तिर्वा डॉ. अरूण कुमार सिंह बताते हैं, ‘‘तहसील क्षेत्र के 12 गांवों में करीब 700 बीघा जमीन अवैध कब्जे से मुक्त हो चुकी है। सिर्फ कलसान में ही 450 बीघा सरकारी जमीन को मुक्त कराया जा चुका है। हमीरपुर, फूलपुर, बलनपुर और उमर्दा में अभियान चल रहा है। कलसान में 37 हेक्टेयर जमीन पर 24 सालों से लोग काबिज हैं।’’ इसी तहत कन्नौज से सटे औरैया जिले में भी प्रशासन ने एक मुर्गी फार्म और कुछ खेतों को जुतवाकर करीब 25 बीघा जमीन कब्जा मुक्त कराई है। इसी तरह की कार्रवाई इटावा, अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में रोस्टर के मुताबिक चल रही है।

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जमीन कब्जा मुक्त कराने की इस संयुक्त टीमों के मॉडल को वर्ष 2014 में श्रावस्ती के जिलाधिकारी ने अपने यहां लागू किया था। तराई के इस जिले पुलिस और राजस्व की टीमों के इस एकजुट प्रयास को काफी सफलता मिल थी। बताया जा रहा है पिछले वर्ष आईएएस वीक में कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी से श्रावस्ती जिला प्रशासन के मॉडल की तारीफ की। मुख्यमंत्री की सराहना के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया।

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दरअसल जमीन से जुड़ा मामला राजस्व का होता है। पुलिस का काम कानून व्यवस्था का है। लेकिन व्यक्ति पहले पुलिस के पास पहुंचता है, फिर कचेहरी। इसके साथ कभी लेखपाल नहीं मिलता था तो तहसीलदार साहब मौजूद नहीं होते थे। राजस्व की टीम होती थी तो पुलिस टीम उपलब्ध हो पाती थी, लेकिन अब सरकार ने हर गांव के लिए दो टीमें बना दी हैं, एक राजस्व परिषद की दूसरी पुलिस।

कन्नौज एसडीएम तिर्वा डॉ. अरूण कुमार।

अंबेडकरनगर जिले में पिछले दो दिन चले अभियान को काफी सफलता मिली है। नए मॉडल में काम करने अधिकारी और कर्मचारी भी खुश हैं। अंबेडकरनगर में कोतवाली अकबरपुर में टीम 12 में राजस्व टीम लीडर अजय कुमार वर्मा (राजस्व निरीक्षक) बताते हैं, “अभियान काफी सफल है, क्योंकि पूरी टीम एक साथ जाती है। जिसमें राजस्व, पुलिस, ग्राम विकास विभाग सब होते हैं तो जो फैसला होना होता है मौके पर हो जाता है। पहले हम लोग उन मामलों को देखते हैं, आम लोगों से जुड़े होते हैं। जैसे रास्ता (चकरोट) चरागाह, तालाब आदि) तो मौके पर कब्जा हटाकर कार्रवाई करते हैं।’

वो आगे बताते हैं, “पहले दिन हम लोग अफजल गांव गए वहां रास्ते कई वर्षों से कब्जा कर रखा था, गन्ना बोया था और ट्यूबवेल लगा रखा था। जांच के बाद मौके पर गन्ना कटवाया गया और जेसीबी से ट्यूबवेल हटाकर रास्ता बनवाया गया। इसी तरह कननपट्टी गांव में आंगनबाडी की प्रस्तावित जमीन पर कब्जा था उसे हटवाया।”

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राजस्व निरीक्षक की माने तो जब इतनी बड़ी टीम एक साथ पहुंचती है तो कब्जाने वाला भी टामलमोट नहीं कर पाता। विशेष भूमि विवाद निस्तारण अभियान के तहत पहले उन मामलों पर कार्रवाई होती है, जो काफी पुराने, जिनमें बार-बार शिकायत होती है। इसके साथ ही कोर्ट से जुडे मामलों में सर्वसम्मति होने पर सुलझाने की कोशिश होती है। फिलहाल मार्च तक का हर गांव का कैलेंडर तैयार है।

औरैया के भाग्यनगर के पास केसमपुर के मजरा बिलंदपुर में प्रधान ने ही 7 बीघा जमीन कब्जा रखी थी। एसडीएम और तहसीलदार ने खुद मौके पर पहुंच कर न सिर्फ मुर्गी फार्म तोड़ा बल्कि बाकी जमीन पर खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलवा दिया गया। औरैया की नायब तहसीलदार निधि पांडेय ने कब्जा हटाने के बाद कहा- अब अगर दोबारा जमीन पर कब्जा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होगी।

औरेया के जिलाधिकारी श्रीकांत मिश्रा बताते हैं, “फिलहाल तीन ब्लाकों की ग्राम पंचायतों की 25 बीघा जमीन खाली करा दी गई है। इस दौरान अगर किसी के द्वारा दखलंदाजी की जाती है उसके बख्शा नहीं जायेगा।” अभियान से ग्रामीण भी खुश नजर आ रहे हैं। कन्नौज से 32 किलोमीटर दूर तिर्वा तहसील के भुन्ना गांव निवासी श्याम स्वरुप चतुर्वेदी (54 वर्ष) बताते हैं, वर्षों से अवैध कब्जे थे जो कोई हिला नहीं पाया था, अब हट रहे हैं। सरकारी जमीन पर ही विकास कार्य होते हैं, जो पशुओं को चरने की जगह मिलेगी, बाजार, अस्पताल स्कूल कुछ भी बन सकेग।

कन्नौज की एसडीएम (सदर) शालिनी प्रभाकर बताती हैं, हमने वो चरागाह भी कब्जा मुक्त कराया है जो 50 वर्षों से कब्जे में था। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। अब सब आरोपियों से जुर्माना वसूला जाएगा। हमारी टीम ने 10 हेक्टेयर पर 25-25 कब्जेदारों को चिन्हि किया है। कन्नौज में रोज ट्रैक्टर और जीसेबी चल रहे हैं। कुछ लोगों पर धारा 67 के तहत मुकदमा भी किया जा रहा है।”

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वहीं कलसान गांव की प्रधान रजनी सिंह सेंगर के प्रतिनिधि राकेश सिंह बताते हैं, "गरीब जनता को काफी फायदा होगा। पशु पालकों में खुशी है। जिनको जानवर बंधने और चराने की जगह नही मिलती थी अब राहत मिलेगी। ऐसे लोगों के जानवर अगर खेत मे चले जाते थे तो कब्जेदार मारने को दौड़ते थे। मेरे यहाँ 450 बीघा चारागाह समेत 700 बीघा जमीन पर कब्जा है। अब तक 150 बीघा खाली हो चुकी है।"

क्या है श्रावस्ती मॉडल

श्रावस्ती जिले के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ओपी सिंह श्रावस्ती मॉडल के बारे में बताते हैं, "श्रावस्ती मॉडल की शुरुआत साल 2014 में तत्कालीन जिलाधिकारी निखिल चन्द्र शुक्ला (रिटायर) ने की थी। इसमें भूमि विवाद की समस्या से निपटने के लिए राजस्व व पुलिस की टीम साथ गाँव जाकर विवाद को खत्म करते हैं, जहां भूमि विवाद है वहां पर हफ्ते में एक दिन पूरी टीम जाकर कब्जा मुक्त कराती है।"

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श्रावस्ती जिले में अभियान चला था जो सफल रहा। उसी को मॉडल बनाते हुए पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। इसमें हर थाना क्षेत्र में दो-दो टीम गठित की गई हैं। एक टीम में 10 लोग हैं। पांच पुलिस के और पांच राजस्व विभाग के। एक टीम को दो-दो गाँव दिए गए हैं। लक्ष्य हर गाँव को जमीन के विवाद से मुक्त कराना है। इस अभियान से काफी समाधान भी हो रहा है। सरकारी जमीन ही नहीं अन्य निजी विवाद भी इसमें निपटाए जा रहे हैं। आम लोग जमीन जुड़ी शिकायतों के लिए योगी सरकार ने एंटी भूमाफिया पोर्टल ( http://jansunwai.up.nic.in/abmp.html ) भी बनाया था।

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