नीट के आधार पर आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार का आदेश रद्द

नीट के आधार पर आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार का आदेश रद्दइलाहाबाद उच्च न्यायालय

लखनऊ (भाषा)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश के आयुर्वेदिक, यूनानी एवं होम्योपैथिक कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) के आधार पर तैयार मेरिट सूची के जरिए प्रवेश देने के राज्य सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है।

अदालत ने कल राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए साझा प्रवेश परीक्षा कराये और प्रवेश प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी करे। न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय की पीठ ने अमित कुमार एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर उक्त निर्देश दिये थे।

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याचिका दायर करने वालों ने राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि आयुष पाठ्यक्रमों के छात्रों को नीट की मेरिट सूची के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। उनका तर्क था कि नीट के लिए आवेदन 31 जनवरी को मंगाये गये थे, जिसमें उक्त शर्त का उल्लेख नहीं था कि आयुष के प्रवेश नीट मेरिट सूची के आधार पर किये जाएंगे लेकिन अचानक सरकार ने आदेश जारी कर दिया।

याचिका में कहा गया कि इसके अलावा केंद्र सरकार ने अपने एक आदेश में कहा है कि नीट मेरिट सूची के आधार पर आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश 2018-19 शैक्षिक सत्र से होंगे और यदि 2017-18 सत्र से यह संभव नहीं है तो राज्य सरकार साझा प्रवेश परीक्षा के जरिए प्रवेश दे सकती है।

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पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने नीट के आधार पर आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश का विकल्प चुना, जिससे आयुष स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इच्छुक विद्याथर्यिों के प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के मौलिक अधिकार का हनन हुआ। कई विद्याथर्यिों ने संभवत: नीट के लिए दिये विज्ञापन के तहत आवेदन नहीं किया होगा क्योंकि उन्हें कभी यह नहीं बताया गया कि आयुष स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश 201718 के शैक्षिक सत्र में नीट के जरिए ही होगा।

अदालत ने सरकारी वकील से कहा था कि वह मंगलवार तक इस संबंध में विस्तृत निर्देश हासिल कर उसके समक्ष प्रस्तुत करे। राज्य सरकार के जवाब पर विचार करने के बाद पीठ ने राज्य सरकार के दस जुलाई के आदेश को रद्द कर दिया।

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