बाल अपराधों में अपनों ने ही दिया उम्र भर का दर्द, उत्तर प्रदेश सबसे आगे

Abhishek PandeyAbhishek Pandey   30 Nov 2017 9:11 PM GMT

बाल अपराधों में अपनों ने ही दिया उम्र भर का दर्द, उत्तर प्रदेश सबसे आगेफोटो साभार: इंटरनेट

लखनऊ। देश में बाल अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने पास्को जैसा कानून बनाया, इसके बावजूद नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की ओर से 2016 की जारी रिपोर्ट में बाल अपराध के हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं।

बाल अपराधों में सबसे ऊपर उत्तर प्रदेश

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के खिलाफ अपराधों में उत्तर प्रदेश में इस सूची में सबसे ऊपर है, उसके बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का स्थान है। 2016 में बाल अपहरण और अपहरण के मामलों की संख्या 54,723 हो गई, जिसमें से 9, 657 उत्तर प्रदेश में थे, महाराष्ट्र से 7,956 और मध्य प्रदेश से 6,106 थे। दूसरी ओर, आकड़ों में नाबालिगों से रेप के 25 प्रतिशत मामलों में दोषी उनको काम देने वाला मालिक या फिर उनके साथ काम करने वाला कर्मचारी होता है। इन आकड़ों से यह भी पता लगा कि देश में बाल मजदूरी अब भी जोरों पर है।

यौन अपराध में भी उत्तर प्रदेश आगे

वर्ष 2016 में यौन अपराध कानून अधिनियम (पीओसीएसओ) के तहत देशभर में 36,022 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से यूपी ने 4,954 मामले दर्ज किए, इसके बाद महाराष्ट्र (4,815) और मध्य प्रदेश (4,717) के मामले सामने आए।

इस वर्ष बाल अपराधों में बड़ी छलांग

एनसीआरबी के मुताबिक, पिछले तीन सालों में बच्चों के खिलाफ अपराध में बढ़ती प्रवृत्ति देखी गई है। 2016 में 1,06,958 बाल अपराध मामलों के साथ 13.6% बढ़ोत्तरी के साथ सबसे बड़ी छलांग दर्ज की गई। इससे पहले 2015 में 94,172 दर्ज किए गए थे। बच्चों के अपहरण और अपहरण के मामलों में कुल मामलों का 52.3% है, इसके बाद पीओसीएसओ (34.4%) के तहत दर्ज मामलों का पता चला है।

बाल अपराध रोकने में सबसे अहम रोल पुलिस का होता है, लेकिन सूबे के थानों में किशोर सेल तो बना है, पर इस सेल को देखने और सुनने वाला कोई पुलिस अधिकारी तैनात नहीं है। देश में बाल अपराध रोकने के लिए जेजे एक्ट सहित पास्को एक्ट तक है, लेकिन इस धाराओं को लागू करा पाने में अक्सर पुलिस नाकाम नजर आती है।
संगीता शर्मा, सदस्य, वर्जनचाइल्ड वैलफेयर कमेटी

एनसीआरबी की रिपोर्ट को जारी करते केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह।

महिलाओं के साथ अपनों ने किया सितम

दूसरी ओर एनसीआरबी ने महिलाओं से जुड़े कुछ आंकड़े भी पेश किए हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में ध्यान दें तो 2016 में देशभर में कुल 38,947 सिर्फ रेप के केस दर्ज किए गए। इसमें पता लगा है कि सबसे ज्यादा शारीरिक शोषण के मामलों में पड़ोसी या फिर कोई ऐसा शख्स शामिल होता है, जिसने उनसे शादी का वादा किया होता है। दर्ज हुए मामलों में से 27.5 प्रतिशत में पड़ोसी शामिल पाया गया। वहीं 22 प्रतिशत में ऐसा शख्स शामिल था, जिसने महिला से शादी का वादा किया हो। 95.5 प्रतिशत मामले ऐसे थे, जिसमें शख्स को महिला पहले से जानती थी। वहीं 9 प्रतिशत मामलों में परिवार के किसी शख्स ने ही लड़की पर बुरी नजर रखी। 488 मामलों में लड़की के दादा, पिता, भाई और बेटे ने ही उसका बलात्कार किया। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बलात्कार की घटनाओं में क्रमश: 4,882 मामलों (12.5%) और 4,816 (12.4%) दर्ज किए गए।

उत्तर प्रदेश अपराध में सबसे आगे

देश में अपराधों की 9.5 प्रतिशत बढ़ोत्तरी के हिसाब से उत्तर प्रदेश में 2016 के अपराध आंकड़ों में सबसे ऊपर है। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश (8.9%), महाराष्ट्र (8.8%) और केरल (8.7%) का स्थान रहा। पिछले साल के मुकाबले देश भर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 2016 में 2.9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, साथ ही उत्तर प्रदेश में कुल 14.5% (49, 262) मामलों की रिपोर्ट हुई। उत्तर प्रदेश के बाद पश्चिम बंगाल 9.6% (32,513 मामले) दर्ज किया गया। दिल्ली में राष्ट्रीय औसत दर 55.2% के मुकाबले महिलाओं के खिलाफ अपराध दर 160.4% थी।

बच्चों के प्रति बढ़ते अपराधों की सबसे मुख्य वजह मौजूदा दौर में एकल परिवार है। माता-पिता बच्चों का ध्यान पूरी तरह से नहीं रख पाते, ऐसे में मासूम अपराध का शिकार हो जाते हैं। साथ ही कम उम्र होने के चलते बच्चे अपने साथ होने वाले अपराधों को बता नहीं पाते, जिसका समाज में घूम रहे अपराधी किस्म के लोग फायदा उठाते हैं।
संगीता शर्मा, सदस्य, वर्जनचाइल्ड वैलफेयर कमेटी

दिल्ली में सबसे ज्यादा मामले दर्ज

महानगरों के बीच अपराध सूची में दिल्ली ने सबसे ऊपर, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत दर्ज कुल अपराधों में से 38.8% मामले दर्ज किए, इसके बाद बेंगलुरु (8.9%) और मुंबई (7.7%) ने दर्ज किए। राष्ट्रीय राजधानी में अपहरण और अपहरण के 5,453 मामले दर्ज किए गए थे, इसके बाद मुंबई ने 1,876 मामले दर्ज किए थे। दिल्ली में महानगरों के बीच हत्या के मामलों की सबसे बड़ी संख्या भी दर्ज की गई। शहर में लगभग 40% बलात्कार के मामलों की रिपोर्ट हुई और पति और उनके रिश्तेदारों ने लगभग 2 9% क्रूरता की और दहेज की मौतें दर्ज कीं।

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