यूपी में सौर ऊर्जा के तीन एसईजेड बनाए योगी सरकार : एसोचैम

यूपी में सौर ऊर्जा के तीन एसईजेड बनाए योगी सरकार : एसोचैमयोगी आदित्यनाथ

लखनऊ (भाषा)। उत्तर प्रदेश में बिजली संकट गहराने के बीच उद्योग मंडल एसोचैम ने राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार को अक्षय ऊर्जा का ढांचा मजबूत करने पर ध्यान देने का सुझाव दिया है। साथ ही एसोचैम ने राज्य में सौर ऊर्जा के कम से कम तीन विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) बनाने के साथ-साथ निजी पक्षों को भी यहां वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश के लिये आकर्षित करने पर जोर दिया है।

एसोचैम के राष्ट्रीय महासचिव डीएस रावत ने कहा कि सरकार हर घर को बिजली देने के लिये प्रतिबद्ध है। इसमें कोई शक नहीं है कि देश में बिजली की उपलब्धता उसकी मांग से ज्यादा है। ऐसा इसलिये भी है क्योंकि देश में सभी को बिजली पहुंचाने लायक पर्याप्त मूलभूत ढांचा नहीं है। बिजली पारेषण की सुविधाएं कम हैं और वितरण के माध्यम भी बहुत पुराने और कमजोर हैं। यह स्थिति कमोबेश पूरे देश में है।

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उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में अगर उत्तर प्रदेश सरकार को हर घर को पांच साल के अंदर बिजली देनी है तो अक्षय ऊर्जा ही एकमात्र रास्ता बचता है, क्योंकि अक्षय ऊर्जा की व्यवस्था बनाने से उन्हें बिजली के तार समेत परंपरागत बिजली तंत्र का इंतजाम नहीं करना पड़ेगा। चूंकि अक्षय ऊर्जा को लेकर असीम सम्भावनाएं हैं और बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है, लिहाजा अगर उत्तर प्रदेश सरकार इसकी तरफ ध्यान नहीं देती है तो जो निवेश यहां आ सकता है, वह कभी नहीं आएगा। ऐसे में सरकार को अपनी अक्षय ऊर्जा नीति को और अधिक अनुकूल और आकर्षक बनाना होगा।

रावत ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 4,300 मेगावॉट से ज्यादा सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। इसे और बढ़ाने की पूरी सम्भावनाएं मौजूद हैं। मेरा सुझाव है कि नई सरकार को सौर ऊर्जा के लिये कम से कम तीन विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) बनाने चाहिये और उन्हें सारी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिये। साथ ही निवेशकों को यह यकीन दिलाना चाहिये कि उनका निवेश सुरक्षित और गारंटीशुदा है।

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गत सोमवार को स्टैंडअप योजना को लेकर एसोचैम द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे रावत ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि उसे प्रदेश में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिये तमाम प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि यह उत्तर प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है कि वह एक मजबूत संदेश दे कि पूर्व में किये गये अक्षय ऊर्जा संबंधी समझौतों का सम्मान किया जाएगा। उसे निजी पक्षों को यहां वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश के लिये आकर्षित करने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये। साथ ही आम लोगों को अपने घरों पर अक्षय ऊर्जा प्रणाली लगवाने के लिये प्रोत्साहित किया जाना चाहिये, ताकि ग्रिड पर पड़ने वाला भार कम हो।

उन्होंने कहा कि केंद्र ने राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत उत्तर प्रदेश के लिये 4,300 मेगावॉट बिजली उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। पिछले साल 31 दिसंबर को केंद्रीय अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने 600 मेगावॉट क्षमता वाले सौर ऊर्जा पार्क की स्थापना में मदद की घोषणा भी की थी। रावत ने कहा कि आफटेक और ग्रिड कनेक्शन संबंधी दिक्कतें, संयंत्र लगाने के लिये जमीन अधिग्रहण में विलंब, वित्त की परेशानियों, परियोजनाओं के निर्माण में देर, ऊंची लागत और कर्ज की कमी तथा बिजली उत्पादन को लेकर जोखिम संबंधी आशंकाओं की समस्याएं भारत को सौर ऊर्जा क्षेत्र में आगे बढने से रोक रही हैं।

उन्होंने कहा कि हालांकि केंद्र सरकार अक्षय ऊर्जा के विकास तथा उपलब्धता को लेकर बेहतर प्रयास कर रही है लेकिन देश को अक्षय ऊर्जा को व्यापक बनाने के लिये अभी और पूंजी की जरुरत है।

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