हिंसा और अापराधिक घटनाओं ने बढ़ाई यूपी सरकार की मुश्किलें

हिंसा और अापराधिक घटनाओं ने बढ़ाई यूपी सरकार की मुश्किलेंमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 

अभिषेक पाण्डेय

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिस मुद्दे को लेकर तत्कालीन सपा सरकार को घेरा था, आज वही मामला उसके गले की फांस बनता जा रहा है। हम बात कर रहे हैं, यूपी में तेजी से बढ़ते हिंसा और अपराधिक घटनाओं की, जिसमें प्रदेश में जब से भाजपा की अगुवाई में योगी सरकार बनी है, क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।

साथ ही अपराधियों के हौसले भी बुलंद दिख रहे हैं, क्योंकि जिस तरह राजधानी में अपराधी घटनाओं को लगातार अंजाम दे रहे हैं, इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि, प्रदेश के अन्य जिलों का क्या हाल होगा।बीते अप्रैल माह में प्रति दिन के हिसाब से करीब 13 रेप,14हत्याएं,15 लूट और 1 डकैती ने योगी सरकार के उन दावों की पोल खोल कर रख दी है, जिसमें सरकार ने अपराध पर लगाम लगाने और पुलिस को दुरूस्त कर अपराधियों को धर-दबोचने का दावा किया था, लेकिन हर रोज अपराधी एक न एक घटना को अंजाम देकर पुलिस प्रशासन को खुला चैलेंज दे रहे हैं। यदि यह हाल रहा तो यूपी सरकार को तगड़ा झटका लग सकता है।

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क्योंकि सीएम योगी ने 100 दिन पूरा होने पर सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी करने की बात कही है, लेकिन मौजूदा समय में जो स्थिति है, वह योगी सरकार की चिंता बढ़ा सकती है। वहीं विधानसभा चुनाव के रैलियों में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी सपा सरकार पर अपराधिक घटनाओं को लेकर घेरा और इसे ही मजबूत चुनावी मुद्दा बनाया था, जिसका नतीजा प्रदेश में भाजपा प्रचंड महुमत से सरकार बनाने में कामयाब रही थी, पर यूपी पुलिस सरकार की इस मंशा पर पानी फेरने का काम कर रही है, क्योंकि बढ़ता क्राइम का ग्राफ कानून व्यवस्था पर सवालियां निशान उठा सकता है। उधर बीते दिनों सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी अपराधियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी थी कि, वह प्रदेश छोड़ कर कही और चले जाये, नहीं तो उन पर पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।

वहीं पिछले कई दिनों से जातीय और सम्प्रदायिक हिंसा से पश्चिम यूपी भी सुलग रहा है, जिसका ताजा उदाहरण सहारनपुर की हिंसा है, वहां दंगाइयों ने संपत्ति को बर्बाद करने और जिले का माहौल खराब करने का प्रयास किया था। साथ ही इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे, जिनका अस्पताल में उपचार चल रहा है। लेकिन, ऐसा नहीं है कि केवल सहारनपुर ही हिंसा से जल उठा था, यूपी के कई और अन्य जिले भी जातीय और सम्प्रदायिक हिंसा से प्रभावित है। हालांकि शासन में बैठे अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम के हालात अब काबू में है और जो लोग इसके जिम्मेदार थे, उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

उधर अपराधों की बात करे तो, प्रदेश की राजधानी सहित कई जिलों में अपराध का ग्राफ उठ रहा है, जहां पॉश इलाके गोमती नगर में एक दुस्साहसीक डकैती हुई थी, जिसमें पुलिस अब तक अपराधियों तक नहीं पहुंच सकी है। इस घटना से कुछ दिनों पहले लखनऊ के पारा निवासी लाल बहादुर ने अपनी दो बेटियों को खो दिया था, जिसकी दिनदहाड़े घर में सनकी प्रेमी ने हत्या कर दी थी, ठीक उसके अगले दिन भी पारा इलाके में ही दिन दहाड़े एक टैंट कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

यह तो महज राजधानी का हाल है, अगर बात करे लूट की घटनाओं की तो, ताजा मामला मथुरा सर्राफ लूट कांड है, जहां बदमाशों ने दो कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर, उनके अन्य साथियों को घायल कर दिया और करोड़ों की लूटपाट कर मौके से फरार हो गए। दूसरी ओर पुलिस मथुरा लूटेरों को खोज रही थी कि, अपराधियों ने टूंडला जिले से उद्योगपति संजय मित्तल का अपहरण कर लिया। हालांकि उद्योगपति की कार में जीपीएस चिप लगे होने के चलते पुलिस ने उन्हें अपहरणकर्ताओं के कब्जे से छुड़ाने में सफलता पाई थी।

वहीं आम जनता ने बातचीत में बताया कि,अपराधियों पर सरकार का खौफ नहीं दिख रहा है। रेप, हत्या, लूट, डकैती आदि की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही है। यूपी में जब बीजेपी को प्रचंड बहुमत दिया था, तब लगा था कि अब प्रदेश में शांति आ जायेगी और बेखौफ होकर यूपी में रह सकेंगे। जबकि क्राइम कंट्रोल नहीं होने से लोगों का यह विश्वास अब टूटता जा रहा है, जिस पर अकुंश लगा पाने में सरकार नाकाम दिख रही है।

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बढ़ता अपराध का ग्राफ

  • जनवरी 2017 में 249 लूट के मामले अप्रैल तक 412 हो गए।
  • जनवरी में 286 लोगों की हत्या हुई, मार्च में 396 और अप्रैल में 399 थी।
  • मार्च में 244 बलात्कार के मामले बढ़कर अप्रैल माह तक 378 हो गए।
  • बलात्कार 2015 में 849 से बढ़कर 2016 में 1030 और इस साल अप्रैल में 1266 हो गया। दंगों के मामले 2015 में 1608 से बढ़कर 2539 तक पहुंच गए हैं।
  • डकैती 2016 में 77 के मुकाबले इस माह अप्रैल तक 91 मामले दर्ज हुए है।
  • इस साल अप्रैल तक, डकैती के मामले 2015 में 99 और 2016 में 77 के मुकाबले 91 थे। 2015 में इस साल अप्रैल में 1,352 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2015 में 992 और 2016 में 1186 मामले दर्ज हुए थे। 2015 में 1395 और 2016 में 1513।

थाना स्तर पर तेज़ तर्रार पुलिस अधिकारी किए गए साइड

पुलिस का सूचना तंत्र कमजोर हो चुका है। जुगाड़ वालों को जिलों/थानों की कमान सौंपी गयी है, जिसका असर व्यवस्था पर पड़ रहा है। खुलासे की बात तो दूर है जेल से छूटे बदमाश की सही लोकेशन तक पुलिस के पास नहीं है, इसलिए भी अपराध नियंत्रित कर पाने में सरकार असफल साबित हो रही है। जबकि थाना स्तर पर मजबूती की जाये, तो कानून व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है, लेकिन प्रदेश सरकार ऊपरी स्तर पर आइपीएस और आईएएस अधिकारियों का फेर बदल कर अपराध पर नियंत्रण का प्रयास कर रही है।

पुलिस का गिरता मनोबल

सहारनपुर व गोरखपुर में भाजपा सांसद/विधायक द्वारा उच्च पुलिस अधिकारियों के साथ की गयी अभद्रता व कार्य में हस्तक्षेप और उनपर कोई क़ानूनी कार्यवाही न करने देना जैसी घटनाओं ने पुलिस का मनोबल तोड़ा है। हालांकि पुलिस के आलाधिकारी ऐसी किसी बात से इनकार कर रहे हैं।

अमनमणि का सीएम के स्टेज पर जाना

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आद‌ित्यनाथ बाहुबली अमरमणि के पुत्र और अपनी पत्नी के हत्या के आरापी अमनमणि को मंच पर बुलाना, गुलदस्ता लेना, पैर छूने पर आशीर्वाद देना आम जनता को नागवार गुज़रा, जिसे विपक्षी दलों ने भी मुद्दा बनाया था कि, जब सीएम ही एक अपराधी से मुलाकात करते हैं, तो अपराध का ग्राफ तो बढ़ेगा ही। वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ जब पहली बार 25 मार्च को गोरखपुर आए थे तो, अमनमणि और उनके पिता बाहुबली पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के नाम के पोस्टर गोरखपुर की हर सड़कों पर योगी के स्वागत में लगे थे। इस प्रकार के प्रकरण अपराधियों को सरकार में संरक्षण देने व कथनी-करनी में अंतर को दर्शाता है।

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