नसीमुद्दीन की परेशानियां बढ़ीं, स्वाति सिंह अभद्रता मामले में हजरतगंज कोतवाली में पूछताछ

Karan Pal SinghKaran Pal Singh   12 May 2017 2:00 PM GMT

नसीमुद्दीन की परेशानियां बढ़ीं, स्वाति सिंह अभद्रता मामले में हजरतगंज कोतवाली में पूछताछहजरतगंज कोतवाली से बाहर आते नसीमुद्दीन सिद्दीकी।

लखनऊ। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने यूपी सरकार की वर्तमान मंत्री श्रीमती स्वाति सिंह व उनकी पुत्री पर की गई अभद्र टिप्पणी पर हज़रतगंज कोतवाली में पूंछताछ हुई है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि नसीमुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई के बाद स्वाती सिंह को जरूर सुकून मिला है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को बसपा से निष्कासित किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बसपा में हार के कारण रार मची हुई है। हताश बसपा सुप्रीमों मायावती हार के कारणों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और हार का ठीकरा कभी ईवीएम पर फोड़ती है तो कभी नसीमुद्दीन पर संगीन आरोप लगाकर अपनी हताशा दूर करने का प्रयास कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि यूपी की जनता ने 2014 के लोकसभा चुनावों में और 2017 विधानसभा के चुनावों में साफ बता दिया कि अब यहां जातीय राजनीति की दाल नहीं गलेगी, लेकिन सपा-बसपा जैसे जाति आधारित दल इस सत्य को स्वीकार नहीं कर पा रहे है। बसपा सुप्रीमों को यह भी बताना चाहिए कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने चुनावों में किसके कहने पर धन उगाही की और उसका हिस्सा कहां-कहां पहुंचा।

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क्या था मामला

पिछले साल मई में बीजेपी नेता दयाशंकर सिंह ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर अभद्र टिप्पणी की थी। जिसके बाद बीजेपी ने उन्हें छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया था। वहीं मामले में बसपा नेताओं ने लखनऊ में विरोध प्रदर्शन के दौरान दयाशंकर की पत्नी स्वाति सिंह और उनकी बेटी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी। जिसके बाद स्वाति सिंह ने बसपा नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।

सिर्फ कैशियर की भूमिका में थे नसीमुद्दीन सिद्दीकी

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने यह भी कहा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी तो सिर्फ कैशियर की भूमिका अदा कर रहे थे, दलित वोटों की असली सौदागर तो स्वयं बसपा सुप्रीमों है। बसपा छोड़ने वाले कई नेताओं ने पहले भी ये आरोप लगाए है, आज पहली बार बसपा ने इसकी स्वीकारोक्ति की है। बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी तो मोहरे मात्र है। नोटबंदी के दौरान जिस तरह से बसपा सुप्रीमो की छटपटाहट दिखी थी वो नोटों के प्रति उनकों प्रेम को दर्शा रही थी।

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