बादलों ने तरसाया ज्यादा, बरसे कम 

बादलों ने तरसाया ज्यादा, बरसे कम कम बारिश होने से किसानों की चिंता बढी।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। इस मानसून पूर्वी उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में जमकर बरसे बदरा मेरठ और वेस्ट यूपी के लिए बेवफा साबित हुए। बादलों ने पिछले तीन माह में तरसाया तो खूब, लेकिन बरसने में कंजूसी कर गए। औसत से भी कम बारिश ने करीब 15 साल का रिकार्ड तोड़ दिया। अब जब मानसून केवल 15 दिनों का ही मेहमान रह गया है, जब मौसम वैज्ञानिकों को थोड़ी बहुत उम्मीद है कि हो सकता है जाते-जाते कुछ तो कमी पूरी कर जाए, जिससे किसानों की धान की फसल बच सके।

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आदर्श नहीं है स्थिति

मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि वेस्ट यूपी में मानसून सीजन में करीब 600 मिमी बारिश हो जानी चाहिए, जबकि मेरठ में यह आंकड़ा 500 मिमी के आसपास का है। इसके मुकाबले इन तीन माह में वेस्ट में जहां 375 मिमी और मेरठ में 277 मिमी ही बारिश रिकार्ड की गई। यानि वेस्ट यूपी में करीब 38 प्रतिशत और मेरठ में 41 प्रतिशत कम बारिश हुई।

वेस्ट से रही बेरूखी

कमजोर मानसून ने मेरठ समेत वेस्ट यूपी को इस बार निराश किया है। इसका सीधा असर धान और अन्य फसलों के साथ भू-जलस्तर पर पड़ेगा। अब मानसून वापसी का समय आ गया है। इन 15 दिनों में अच्छी बारिश हुई तो स्थिति थोड़ी सुधर सकती है।
डा. एन सुभाष, मौसम वैज्ञानिक, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान केन्द्र मोदीपुरम

मौसम विज्ञान केन्द्र ने प्री मानसून बारिश को देखकर विगत एक जून को दावा किया था कि इस बार मानसून अच्छा रहेगा। लेकिन मानसून वेस्ट यूपी की जगह पूर्वी उत्तर प्रदेश, मुबई, बिहार, राजस्थान, और उत्तराखंड में खासा मेहरबान रहा। जबकि इस सीजन में यहां सिर्फ एक बार ही मूसलाधार बारिश हुई। अब मानसून वापसी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अमूमन 15 सितंबर तक मानसून वापस हो जाता है।

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खूब छाई काली घटाएं

इस सीजन में कहीं-कहीं बारिश हुई तो अधिकांश जगह सूखा रहा। आसमान पर काली घटाएं खूब छाई, लेकिन बरसात के नाम पर सभी को निराशा हाथ लगी। बुधवार को भी इस तरह का मौसम रहा, दिनभर बादलों के बीच कहीं को थोड़ी-बहुत बारिश हुई तो कहीं को बदरा ऐसे ही चले गए। दिनभर बादलों और धूप के बीच लुकाछिपी का खेल चलता रहा। मौसम विभाग पर अधिकतम तापमान 33 प्वाइंट 9 और न्यूनतम तापमान 24 प्वाइंट 6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।

15 साल में बारिश का हाल

मौसम केन्द्र के आंकड़ों के अनुसार सन 2012 में 632 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। इसके बाद 2013 में 693 मिमी, जबकि वर्ष 2003 में 466 मिमी और 2004 में सबसे कम 266 मिमी बारिश हुई थी।

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क्या है कम बारिश के नुकसान

- कम बारिश से धान की फसल अच्छा उत्पादन नहीं दे पाती

- मौसमी बीमारियों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाता

- पहले से चिंताजनक भू-जल स्तर और गिर जाएगा

- बारिश का पानी न लगने से गन्ना सहित अन्य फसलों का विकास रुक जाता है

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