बाराबंकी: शौचालय बनने के इंतज़ार में ग्रामीण शौच के लिए बाहर जाने को मज़बूर 

बाराबंकी: शौचालय बनने के इंतज़ार में ग्रामीण शौच के लिए बाहर जाने को मज़बूर शौचालय न होने से ग्रामीण शौच के लिये बाहर जाते हैं।

अजय कुमार, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

बाराबंकी। गाँवों को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है, लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे गाँव हैं जहां पर शौचालय की कोई भी सुविधा नहीं है। लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। खुले में शौच जाने से लोगों को तमाम बीमारियां हो रही हैं। बाराबंकी मुख्यालय से 60 किमी. दूर सूरतगंज ब्लाक के गाँव महमतियनपुरवा, गोडियनपुरवा और सैलक में एक भी शौचालय नहीं हैं। इन गाँवों की आबादी लगभग 3000 हजार है।

महमतियनपुरवा के रहने वाले सियाराम यादव (58 वर्ष) बताते हैं, “हमारे यहां शौच जाने की बहुत बड़ी समस्या है। गाँव में शौचालय न होने के कारण महिलाएं मजबूरी में खुले में शौच जाती हैं। सरकारी योजना का भी हमें लाभ नहीं मिलता है।”

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सेलक गाँव के निवासी ननकऊ (50 वर्ष) बताते हैं, “गाँव में शौचालय न होने के कारण मजबूरन हमें जंगलों व खेतों में शौच के लिए जाना पड़ता है। सुना है सरकार शौचालय बनाने के लिए कुछ रुपए देती है, लेकिन हमें आज तक एक रुपए भी नहीं मिले।”

मामला मेरी जानकारी में नहीं है। सेक्रेटरी से बात कर कुछ कह पाऊंगा।
विजय कुमार यादव, बीडीओ, सूरतगज ब्लाक

महमतियनपुरवा निवासी ननकई देवी (45 वर्ष) बताती हैं, “भइया हम इतने वर्षों से बाहर ही शौच के लिए जाते रहे हैं पर अब हम बहू-बेटी वाले हो गए। उन्हें बाहर शौच जाने में शर्म आती है पर हम मजबूर हैं।” इसी गाँव के रहने वाले राहुल कुमार (25 वर्ष) बताते हैं, “जंगलों में शौच जाने से हमें जहरीले जंतुओं के काटने का खतरा बना रहता है। बारिश के मौसम में खतरा और भी बढ़ जाता है।”

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सेलक गाँव ग्राम प्रधान रामरत्न यादव कहते हैं, “हमारी पंचायत के कई गाँवों में एक भी शौचालय नहीं है। मुझे डेढ़ वर्ष हुआ है प्रधान बने। अभी तक सरकार की तरफ से एक भी शौचालय का पैसा नहीं आया है। बीडीओ से कई बार कहा, लेकिन हमारी पंचायत को शौचालय देने का आश्वासन ही मिल रहा है।”

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