जल ही जीवन, विज्ञान हमारे जीवन का अभिन्न अंग: मण्डलायुक्त
Harinarayan Shukla 30 Aug 2017 3:18 PM GMT

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क
गोंडा। जल ही जीवन है और विज्ञान हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। इसलिए जल संचयन अत्यन्त आवश्यक है तथा इसके लिए वैज्ञानिक सहयोग भी लिया जाना चाहिए। आज के दौर में अधिकतम बीमारियां दूषित जल के कारण ही होती हैं, इसलिए शुद्धपेय जल का उपयोग करना जरूरी हो गया है।
शुद्ध जल हमें तभी मिलेगा जब हम पेयजल का संचयन करेगें और अपनी जिम्मेदारी समझेंगें। यह विचार देवीपाटन मण्डल के आयुक्त एसवीएस रंगाराव ने जीआईसी इन्टर कालेज में जिला विज्ञान क्लब द्वारा आयोजित स्वच्छ पेयजल गुणवत्ता, परीक्षण, उपयोग और सुरक्षित भण्डारण तथा जल श्रोतों के संरक्षण पर वैज्ञानिक व्याख्यान व प्रदर्शन कार्यक्रम में कही।
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कार्यक्रम में जिले के बीस इन्टर कालेज से पधारे प्रतिभागी छात्र-छात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए मण्लायुक्त ने कहा,“ उन सबकी यह उम्र मेहनत करने और सही निर्णय लेते हुए लक्ष्य निर्धारित कर उसके लिए पूरी लगन के साथ काम करने की है। वे सब बड़े सपने देखें और उन्हें हासिल करने के लिये जी-जान लगा दें। देवीपाटन मण्डल में वाटर लेबल तो काफी ऊपर है परन्तु यहां के जल में आर्सेनिक मात्रा अधिक होने के कारण जल जनित तमाम बीमारियों से लोगों को परेशान होना पड़ता है।”
उन्होंने कहा,“ मण्डल के ऐसे चिन्हांकित गाँवों में जल निगम व विश्व बैंक के सहयोग से पाइप्ड पेयजल योजनाएं संचालित कर पेयजल मुहैया कराने का काम चल रहा है। घटता जल स्तर और दिनों-दिन भूगर्भ जल के दूषित होने का स्तर बढ़ता ही जा रहा है जो कि चिन्ता का विषय है। उन्होने कहा कि शुद्ध पेयजल के प्रति बरसात के दिनों में विशेष एहतियात बरतने की जरूरत होती है।”
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कार्यक्रम के दौरान जिला विज्ञान क्लब की अध्यक्ष डा. रेखा शर्मा ने मण्डलायुक्त ने कहा,“ जिला विज्ञान क्लब गोण्डा द्वारा तमाम उपलब्धियां हासिल की गई हैं। कई लाख छात्र-छात्राएं आज विश्व के अनेक देशों में बतौर बाल वैज्ञानिक काम कर रहें हैं, यह जिले के लिए गौरव की बात है। ”
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