चीनी मिलों में अब नहीं चल पाएगी घटतौली, साफ्टवेयर के जरिए होगी गन्ने की तौल

Ashwani NigamAshwani Nigam   12 Sep 2017 1:48 PM GMT

चीनी मिलों में अब नहीं चल पाएगी घटतौली, साफ्टवेयर के जरिए होगी गन्ने की तौलचीनी मिलों में कांटे से गन्ना तौलने में गड़बड़ी की जाती है।

लखनऊ। यूपी के 35 लाख गन्ना किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिले, इसके लिए अब चीनी मिलों में मैन्युअल की जगह कंप्यूटराइज्ड कांटा लगाया जाएगा, जिससे गन्ने की घटतौली पर रोक लगेगी।

गन्ना किसानों की बहुत वर्षों से यह शिकायत है कि चीनी मिलों में कांटे से गन्ना तौलने में गड़बड़ी की जाती है। इस पर रोक लगाने के लिए गन्ना किसान लगातार मांग कर रहे थे। ऐसे में प्रदेश सरकार ने इस बार गन्ना तौलने की पूरी प्रक्रिया का मैन्युअल की जगह कंप्यूराइज्ड करने का आदेश जारी कर दिया है, जिसमें तौलने का सॉफ्टवेयर लगा होगा।

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प्रमुख सचिव गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग संजय भूसरेड्डी बताते हैं, “गन्ना पेराई इस सत्र की शुरुआत अक्टूबर से होने जा रही है। घटतौली रोकेने के संबंध में इस बार गन्ना तौल कंप्यूटराइज्ड कांटों के जरिए होगी।” ऐसे में अब सरकारी बाबूओं का भ्रष्टाचार नहीं चलेगा। गन्ना किसानों को जहां उनकी उपज का सही दाम मिलेगा, वहीं गन्ने की घटतौली पर भी रोक लगेगी। स्मार्ट पेमेंट के जरिए इस बार गन्ना क्रय केन्द्रों पर गन्ना तौलने के बाद तौल की सूचना, ग्रासवेट, गन्ना मूल्य और बैंक खाता नंबर की संबंधित किसान के मोबाइल में एसएमएस के जरिए आ जाएगी, जिससे गन्ने का भुगतान लेने में आसानी हो सके।

आगे कहा, “सॉफ्टवेयर में गन्ना तौलने में कोई गड़बड़ी न कर सके, इसके लिए एक सीडी गन्ना निरीक्षक और सहायक चीनी आयुक्त के कार्यालय में सुरक्षित रखी जाएगी। गन्ना तौल की प्रक्रिया में अगर कोई किसान सवाल खड़ा करता है तो इस सॉफ्टवेयर के जरिए इसका मिलान कराया जाएगा।“

प्रदेश के सभी चीनी मिलों के गेट पर कम से कम 10 टन की क्षमता का कंप्यूराइज्ड कांटा लगाने का आदेश दिया जा चुका है। गन्ना तौलने में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके, इसके लिए गन्ना लिपिकों को लाइसेंस जारी करते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि गन्ना तौलने में ऐसे किसी कर्मचारी को नहीं तैनात किया जाएगा, जो पूर्व में गलत गन्ना तौलने में दंडित हुआ हो।

गन्ना तौलने वाला लिपिक जिस क्रय केन्द्र पर लगाया जाएगा, वह उस केन्द्र का स्थानीय निवासी नहीं होगा। इसके अलावा गन्ना तौल लिपिक पूरे पेराई सत्र में किसी क्रय केन्द्र पर दोबारा नहीं तैनात किया जाएगा। अगर इसके बाद भी किसी भी गन्ना क्रय केन्द्र पर किसी भी घटतोली की शिकायत मिली तो उस लिपिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।“

उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सुरेश राणा बताते हैं, “गन्ना क्रय केन्द्रों पर घटतौली रोकने के लिए अभियान चलाने के साथ ही घटतौली को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। ऐसे में गन्ना किसानों के हित में यह व्यवस्था लागू की जाएगी।“

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उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों की दशा सुधार करके उनकी क्षमता बढ़ाने के लिस भी इस बार योजना बनाई गई है। सहकारी चीनी मिलों में स्टीम और पावर खपत को कम करने के लिए 24 मिलों में से 23 चीनी मिलों का अपग्रेडेशन किया जाएगा, इससे सहकारी चीनी मिलों की कार्यक्षमता बढ़ जाएगी।

गन्ना क्रय केन्दों पर घटतौली रोकने के लिए अभियान चलाने के साथ ही घटतौली को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। ऐसे में गन्ना किसानों के हित में यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
सुरेश राणा, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, उत्तर प्रदेश

किसानों की सहायता के लिए टोल फ्री नंबर

उत्तर प्रदेश के इस बार गन्ना क्रय केन्द्रों पर किसान को कोई असुविधा न हो, यह सुनिश्चित कराने के साथ ही सभी क्रय केन्द्रों पर गन्ना आयुक्त और क्षेत्रीय गन्ना अधिकारियों के मोबाइल नंबर और गन्ना विभाग की तरफ से किसानों को जारी किया गया टोल फ्री नंबर- 1800-121-3203 को प्रदर्शित किया जाएगा। इस व्यवस्था से अगर किसी किसान को अपनी आवश्यकता के अनुरुप वह इन नंबरों पर कॉल करके अधिकारियों से सहायता प्राप्त कर सकता है।

गन्ने की खेती का 12 फीसदी रकबा बढ़ा

गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार जल्द ही शुरू हो रहे गन्ना पेराई सत्र 2017-18 में उत्तर प्रदेश में 100 लाख टन चीनी का उत्पादन हो सकता है। इस साल राज्य में 12 फीसदी गन्ना की खेती का रकबा बढ़कर 47 लाख हेक्टेयर हो गया है। पिछले पेराई सत्र में उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन 877.31 लाख कुंतल हुआ, जो देश में सबसे अधिक था। पिछले सीजन सत्र 2016-17 में 8366.08 लाख कुंतल प्रदेश की कुल चीनी मिलों ने गन्ने की खरीद की थी।

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गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग, जल्दी तैयार हुआ गन्ना

पेराई सत्र 2017-18 के लिए चीनी मिलों को गन्ना क्षेत्र और क्रय केंद्र निर्धारण आवंटन के लिए गन्ना क्षेत्र सुरक्षण बैठक सोमवार को लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान डालीबाग में शुरू हुई। पहले दिन मेरठ परिक्षेत्र के गन्ना किसान और चीनी मिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिसमें गन्ना मूल्य निर्धारण का मुद्दा भी गरमाया रहा। किसानों ने 350 रुपए प्रति कुंतल से गन्ना कम रखने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी। इस साल गन्ना की फसल जल्दी होने से अक्टूबर में पेराई शुरू होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों के लिए नई चीज है।

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