कब थमेगा पश्चिमी यूपी में दंगों का दौर?

कब थमेगा पश्चिमी यूपी में दंगों का दौर?पश्चिमी यूपी में दंगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा दंगे पश्चिमी यूपी में होते हैं। इस समय सहारनपुर में दलित समुदाय और ठाकुर समुदाय के बीच विवाद के बाद तोड़-फोड़ की घटनाएँ सामने आ रही हैं। महाराणा प्रताप की जयंती पर राजपूतों ने शोभायात्रा निकाली थी जिस दौरान शब्बीरपुर गाँव दलितों और राजपूतों में विवाद हो गया और देखते-देखते कई घर जल गए। अभी भीम आर्मी के 22 से ज्यादा कार्यकर्ता जेल में बंद हैं।

फरवरी 2017 को लोकसभा में गृह राज्यमंत्री केरेन रिजिजू ने एक बयान में कहा था कि उत्तर प्रदेश में 2016 में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में सबसे ज्यादा हुई। 2015 में प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा की 155 घटनाएं हुईं, जबकि अगले वर्ष 2016 में यह संख्या बढ़कर 162 हो गई थी।

लोकसभा चुनाव 2014 से पूर्व मुजफ्फरनगर में हुए दंगे में खासा प्रभावित बुढ़ाना कस्बा के रहने वाले 55 वर्षीय अकमल राही यूपी और खासकर पश्चिमी यूपी में हो रहे समाजिक बदलाव से चिंतित हैं। राही कहते हैं, ‘‘सियासी लोग समाज को इस कदर बाँट चुके हैं कि हालात बदलने में अब वक़्त लगेगा। लोगों का एक-दूसरे पर भरोसा नहीं रहा है। समाज में नफरत बढ़ गयी है। मिलकर रहने की परम्परा नई जेनेरेशन में कम हो गयी है।’’

सहारनपुर जिला में हुए दंगे के बाद सहारनपुर के एसएसपी सुभाष चन्द्र दुबे ने जिस भीम सेना को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार बताया है। भीम सेना के सम्बन्ध में मुजफ्फरनगर दंगे पर ‘मुजफ्फरनगर बाकी है’ नाम से फिल्म बना चुके नकुल सिंह सैनी बताते हैं, ‘‘जो काम पहले बहुजन समाज पार्टी के नेता और कार्यकर्ता करते थे वहीं काम अब भीम सेना के लोग कर रहे है। जहां भी दलितों पर अत्याचार होता है वहां जाकर भीम सेना के लोग हस्तक्षेप करते है।’’

नकुल आगे बताते हैं, ‘‘जहां इस बार विवाद हुआ है वहां पहले भी विवाद होता रहा है। प्रशासन के अनुमति के बगैर राजपूतों ने वहां से शोभा यात्रा निकाली और विवाद होने पर दलितों के घरों को जला दिया। अब जब प्रशासन को बताकर दलित समुदाय के लोग पंचायत कर रहे हैं तो उनको परेशान किया जा रहा है।’’

मुजफ्फरनगर जिले में दंगे के बाद जाट और मुस्लिम समुदाय के बीच बनी खाई को कम करने के लिए काम कर रही संस्था राजकीय एकता मंच से जुड़े और मुजफ्फरनगर जिला पत्रकार संघ के उपाध्यक्ष प्रताप त्यागी कहते हैं, ''यूपी में आज जो हालात है, उसके लिए हिन्दुत्वादी संगठन जिम्मेदार हैं। हिन्दुत्वादी संगठन के लोग इमोशनल मसले को उठाकर हिन्दू-मुस्लिम और सवर्ण-दलितों को लड़ाते हैं। यूपी में दंगा होना तो अब आम बात है।’’

राजकीय एकता मंच से ही जुड़े काजी नादिम अहमद बताते हैं, ''समाज में जो चंद सेकुलर लोग हैं उनकी आवाज़ कमजोर पड़ गयी है। उन्हें कोई सुन नहीं रहा है। उनका मजाक बनाया जा रहा है। जब हम लोग एकता के लिए किसी कार्यक्रम का आयोजन करते हैं तो लोग साथ रहने की बात करते है, लेकिन जब महौल बिगड़ता है तो सब अपने-अपने धर्म के लोगों के पक्ष में खड़े हो जाते हैं। समाज में राजनीतिक दलों के स्वार्थ के कारण बहुत बदलाव आ गया है।

प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड आर्डर) आदित्य मिश्रा बताते हैं, ‘‘दंगें दो समुदायों के बीच अंसतोष के कारण होते हैं। दोनों समुदाय को लगता है कि प्रशासन उनके असंतोष को खत्म नहीं कर पाएगी, जिसके बाद वे खुद अपनी समस्या का हल ढूंढने लगते हैं। हम कोशिश करेंगे कि जल्द से जल्द लोगों का प्रशासन पर भरोसा बढ़े। अगले 20 से 25 दिन में प्रदेश में शांति व्यवस्था का महौल कायम करने की कोशिश करेंगे।’’

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