यूं ही नहीं है शराब ठेकों का विरोध, इन्होंने अपने खोए हैं

यूं ही नहीं है शराब ठेकों का विरोध, इन्होंने अपने खोए हैंगाँव सखौली में बीते पांच सालों में शराब की वजह से छह-सात लोगों की मौत हो चुकी है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज।अनुज कुमार(17) का कहना है, ‘‘दो साल पहले शराब की वजह से मेरे पिता चल बसे। चार साल पहले बाबा भी खत्म हो गए थे। मैं चाहता हूँ कि गाँव से शराब ठेके को हटा दिया जाए। मैंने शराब की वजह से परिवार के दो सदस्यों को खोया है।’’

कन्नौज से करीब 14 किमी दूर तिर्वा तहसील क्षेत्र के गाँव सखौली में बीते पांच सालों में शराब की वजह से छह-सात लोगों की मौत हो चुकी है। जिसकी वजह से खासतौर पर बच्चे और महिलाएं गाँव में एक सप्ताह पहले खोला गया शराब ठेका और बियर की दुकान नहीं चलने देना चाहते हैं। हालांकि कई पुरुष भी इसका विरोध कर रहे हैं।

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गाँव की 80 वर्षीय फूलमती थोड़ा ऊंचा सुनती हैं। जब गुरुवार को महिलाओं ने गाँव में खुले शराब ठेके का विरोध किया तो बुजुर्ग फूलमती से भी रहा न गया। वह भी जोर-जोर से कहने लगीं कि ’’लड़के पागल हो रहे हैं। यह जहर बंद होना चाहिए।’’

38 साल के करन सिंह राजपूत कहते हैं, ‘‘गाँव में शराब की वजह से छह-सात लोग खत्म हो चुके हैं। तीन-चार साल पलहे मुरलीधर का लड़का विश्वनाथ भी शराब की वजह से मर गया था। संतराम पुत्र कुंजीलाल भी शराब की वजह से बीमार हुए और मेडिकल कालेज में इलाज के दौरान दमतोड़ दिया। इसी तरह से 35 साल के बेचेलाल पुत्र सोनेलाल भी शराब का सेवन करते थे। गुर्दा और फेफड़ों में कमी आ गई। कानपुर में इलाज के दौरान उनको भी नहीं बचाया जा सका।’’ वह आगे बताते हैं कि गाँव का ही प्रताप आज सुबह खेतों में गिर गया और मौत हो गई। उसके शव के पास से बियर की बोतल बरामद हुई है।

35 साल की गीता फफक कर बताती हैं, ‘‘परिवार में जमीन भी बिक्री होने लगी है। गाँव में शराब ठेका खुल गया है तो हालत और खराब होने लगी है। कच्ची और पक्की सब बंद होनी चाहिए। पुरुष शराब पीते हैं और मार-कुटाई करते हैं।‘‘

सुधा देवी (40) का कहना है, ‘‘गाँव में ठेका खुलने से तो शराब पीने के लिए पुरुष अब वहीं परे रहते हैं। कोई भी लेने आता है तो उसी के साथ पीने लगते हैं। बच्चों को भी पीटते हैं। जब बीमार हो जाते हैं तो उनकी दवाई कराओ।‘‘

शराब से यहां भी मर चुके हैं आठ लोग

कन्नौज कोतवाली क्षेत्र के सदिकापुर, अलियापुर और तिखवा में भी शराब से आठ लोगों की मौत नवम्बर 2015 में हो चुकी हैं। समय पंचायत चुनाव का था। उस दौरान सूबे में सपा की सरकार होने की वजह से भाजपा ने इस मामले को काफी तूल दिया था। यहां तक की तत्तकालीन भाजपा प्रदेष अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत बाजपेई भी गाँव पहुंचे थे।

उन्होंने भी परिजनों के घर पहुंचकर हालचाल लिया था और बयान भी रिकार्ड किए थे। गाँव वालों ने शराब से मौत होने की पुष्टि की थी। उस दौरान शिवराम दोहरे, प्रथ्वीराज राजपूत, जगदीश वर्मा, राकेश, श्रीराम, विनोद, रामबाबू और राजू दोहरे की मौत हो गई थी। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ था। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच भी हुई थी।

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