हर पांच मिनट में दम तोड़ रही एक प्रसूता

हर पांच मिनट में दम तोड़ रही एक प्रसूताप्रसव के दौरान हर पांच मिनट में एक महिला की मौत होती हैं। प्रतीकात्मक फोटो।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। पिछले वर्ष दिसंबर में इटौंजा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक महिला की मौत रक्तस्राव से हो गयी थी। ऐसा सिर्फ एक महिला के साथ ही नहीं हुआ बल्कि प्रसव के दौरान हर पांच मिनट में एक महिला की मौत हो जाती है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बच्चे के जन्म के समय हर पांच मिनट पर एक महिला की मौत होती है। हर साल प्रसव के दौरान पांच लाख 29 हजार महिलाओं की मौत होती है। उनमें एक लाख 36 हजार यानी 25.7 फीसदी मौतें अकेले भारत में होती हैं। कानपुर जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी. दूर स्थित गाँव बैरी सवाई की आशा बहू नैनतारा ने बताया, “हमारे गाँव के पास एक गाँव है बैरी दरियांव, जहां एक महिला की मौत रक्तस्राव के कारण हो गयी थी। ऐसे कई केस होते हैं, जिसमें महिला की मौत रक्तस्राव से हो जाती है।’’

वहीं, सरोजनीनगर की आशाबहू रीता बताती हैं, “रक्तस्राव के कारण महिलाओं की मौत ज्यादा होती हैं। ऐसा तब होता है जब महिला कमजोर होती है।” डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, एक अरब 20 करोड़ आबादी वाले भारत को हर साल एक करोड़ 20 लाख यूनिट खून की जरूरत है, लेकिन केवल 90 लाख यूनिट खून एकत्र किया जाता है। इस तरह 25 फीसदी खून की कमी रह जाती है। दुनिया भर में मरीजों के रक्त प्रबंधन के क्षेत्र में नवप्रवर्तन हो रहे हैं, जबकि भारत में इसके प्रबंधन की अनदेखी की गई है।

महिलाओं की मौत बड़ा मुद्दा है, इस पर हमारा विभाग काम कर रहा है। अगर कोई महिला एनीमिक ज्यादा होती है तो उनके रक्तस्राव ज्यादा होने की सम्भावना होती है। प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना के तहत हर गर्भवती महिला को गाँव से या ब्लॉक से उसका पूरा चेकअप करना है। यह चेकअप एमबीबीएस डॉक्टर के द्वारा होना है।
नीना गुप्ता, महानिदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की महानिदेशक नीना गुप्ता ने बताया, “महिलाओं की मौत बड़ा मुद्दा है, इस पर हमारा विभाग काम कर रहा है। अगर कोई महिला एनीमिक ज्यादा होती है तो उनके रक्तस्राव ज्यादा होने की सम्भावना होती है। प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना के तहत हर गर्भवती महिला को गाँव से या ब्लॉक से उसका पूरा चेकअप करना है। यह चेकअप एमबीबीएस डॉक्टर के द्वारा होना है।”

भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट यूथ इन इंडिया-2017 के अनुसार, भारत में गर्भावस्था के विभिन्न स्वास्थ्य कारणों से होने वाली माताओं की मृत्यु दर बहुत अधिक है। 2014 में गर्भावस्था में होने वाली मौतों में 81.3 फीसदी मौत एडिमा यानी शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन आना, प्रोटीन की अधिकता, उच्च रक्तचाप संबंधी विकारों आदि से हुई है, जबकि नौ फीसदी मृत्यु समय से पहले बच्चा होने से हुई हैं। वहीं, प्रसव के दौरान अप्रत्यक्ष कारणों से होने वाली महिलाओं की मृत्यु दर 2014 में 8.3 फीसदी थी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की महानिदेशक नीना गुप्ता ने आगे बताया, “योजना के तहत एक बार तीन या चार महीने पर गर्भवती महिला को डॉक्टर को खुद दिखाना है। चेकअप में उनको दवाएं दी जाएंगी, उनको सलाह दी जाएगी कि अपना ख्याल कैसे रखें। इसके अलावा उन्हें कैल्शियम की दवाएं भी दी जाएंगी जो पहले नहीं दी जाती थीं। इसमें दवा के साथ अल्ट्रासाउंड, हीमोग्लोबिन की जांच भी कराना है।

अल्ट्रासाउंड गर्भधारण के नौ महीने में दो बार जरूर किया जाएगा। यह जांच इसलिए होगी कि महिला हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में तो नहीं है। इस प्रेग्नेंसी में एनीमिया होने का खतरा ज्यादा होता है इसके अलावा रक्तस्राव की वजह हाईपरटेंसन भी होती है। इसके अलावा और कोई बीमारी हो तो पकड़ में आ जाये और उसका इलाज किया जा सके।”

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