बाल विवाह रोकने में कारगर होगी ‘हक से’ योजना 

Diti BajpaiDiti Bajpai   17 Oct 2017 7:48 PM GMT

बाल विवाह  रोकने में कारगर होगी ‘हक से’ योजना यूनिसेफ और महिला एवं बाल कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश ने शुरू की योजना। 

लखनऊ। "जब मैं 13 वर्ष की थी तब मेरे घरवालों ने मेरी शादी कर दी थी। मैंने बहुत कुछ झेला लेकिन महिला समाख्या से जुड़ने के बाद मेरे अंदर आत्मविश्वास आया और अपने क्षेत्र में एक भी बाल विवाह नहीं होने दिया। अब तक मैंने 32 बाल विवाह होने से रोके है।" ऐसा बताती हैं, बहराइच जिले की कविता शुक्ला (27 वर्ष)।

लखनऊ स्थित पर्यटन भवन में महिला एवं बाल कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश के अंर्तगत यूनिसेफ के सहयोग से महिला समाख्या उत्तर प्रदेश द्वारा 'हक से' योजना की शुरुआत की गई। इस कार्यक्रम में 13 जिलों से आई महिलाओं ने बाल विवाह को लेकर अपने विचार साझा किए।

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास मंत्री प्रो. रीता बहुगुणा जोशी ने कहा, '' बाल विवाह करना सामाजिक और कानूनी दोनों ही अपराध होता है।लोगों की मानसिकता अभी भी नहीं बदली आज लोग लड़कियों को कम खाना और लड़कों को ज्यादा खाना देते है क्योंकि लड़का आगे कमाकर खिलाऐगा। इसलिए देश में छह करोड़ से ज्यादा लड़कियां कमज़ोर है।"

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इस योजना को पंचायत स्तर पर लागू किया जाएगा। बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, वाराणसी, गोरखपुर, इलाहाबाद के 29 ब्लॅाकों की 1,119 पंचायतों यह मंच गाठित किया जा रहा है। इस मंच का उद्देश्य महिला सशक्तीकरण व बाल संरक्षण को सुनिश्चित करना है।

इस मंच का उद्देश्य महिला सशक्तीकरण व बाल संरक्षण को सुनिश्चित करना है।

इस योजना के बारे में मंत्री प्रो. जोशी ने कहा, "हक से महिला एवं बाल अधिकार मंच हर पंचायत में बनेगा और इसकी गाँव-गाँव में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की विशेष ज़िम्मेदारी होगी और साथ 1098, 181 जैसी विभागीय योजनाओं का भी प्रचार-प्रसार किया जाएगा। ''

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देश के कई इलाकों में आज भी बाल विवाह प्रचलित है, खासकर लड़कियों की शादी कम उम्र में ही कर दी जाती है। वर्ष 2016 के नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक देश में तकरीबन 27 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र के पहले हो जाती है। वर्ष 2005 के नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में यह आंकड़ा तकरीबन 47 फीसदी था। यानी सिर्फ दस वर्षों में 18 साल से कम उम्र वाली लड़कियों की शादी में 20 फीसदी की गिरावट आई है।

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राज्य परियोजना निदेशक महिला समाख्या डॉ. स्मृति सिंह ने बताया, " बाल विवाह को रोकने के लिए इस मंच की शुरुआत की गई है। अभी भी जिलो में समूह के जरिए 30-35 बाल विवाह को रोक रहे है। अगर बाल विवाह को रोका जाएगा तो जो लड़कियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा मानव तस्करी, घरेलू हिंसा और शारीरिक शोषण ये सभी रुक जाएंगे।"

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बाल विवाह, यौन हिंसा और बाल तस्करी पर लगेगी लगाम

यूनिसेफ की रूथ लासकानो ने कहा, '' यूनिसेफ संस्था उत्तर प्रदेश शासन, महिला एंव बाल कल्याण उ.प्र. विभाग और महिला समाख्या के साथ विकास एवं शिक्षा के लिए जुड़ने जा रहा है, जिससे महिलाओं और किशोरियों को उनका अधिकार मिल सके। महिला एवं बाल अधिकार मंच से बाल विवाह ,यौन हिंसा और बाल तस्करी को रोका जाएगा।''

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ग्राम प्रधान की होगी अहम भूमिका

इस मंच को पंचायत स्तर पर शुरु किया जाएगा इसलिए इसमें प्रधान की अहम भूमिका होगी। साथ ही प्रधान को इस बात के लिए तैयार किया जाएगा कि वह पंचायत स्तर पर तैयार की जाने वाली विकास की योजनाओं में महिलाओं व बच्चों के मुद्दों को भी शामिल करें।

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विभागीय योजनाओं का होगा प्रचार-प्रसार

महिला एवं बाल अधिकार मंच स्थानीय स्तर पर समूह के रूप में काम करेगा और सरकारी योजनाओं के प्रचार- प्रसार और सही लाभार्थी तक उन योजनाओं का लाभ पहुचें इसको भी सुनिश्चित करेगा। इस मंच के माध्यम से स्थानीय वरिष्ठ व सम्मानित नागरिक (रिटायर टीचर, रिटायर सैनिक, प्रभावशाली महिला, अभिभावक, किशोर, किशोरी, महिला समाख्या संघ) सदस्य के रूप में जुड़ेंगे।

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