शराबबंदी : जहां 12 मौतों के बाद बंद किया गया था ठेका, वहां आज भी छलक रहे जाम

Rishi MishraRishi Mishra   6 April 2017 8:13 PM GMT

शराबबंदी : जहां 12 मौतों के बाद बंद किया गया था ठेका, वहां आज भी छलक रहे जामपिछले दिनों यूपी में महिलाओं ने कई शराब ठेकों में तो़ड़फोड़ के बाद आग लगी दी।

यूपी में योगी सरकार बनने के बाद से ही लगातार शराब बंदी की मांग हो रही है, इनमें सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की है, आखिर ऐसा क्या है, जिसके चलते शराब के ठेके महिलाओं के निशाने पर हैं। क्यों महिलाएं ठेकों में आग लगा रही हैं और क्यों वो चाहती हैं बिहार की तरह यूपी में शराब पर पाबंदी लगाई जाए...

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बीच में पुरानी कैसरबाग सब्जीमंडी वाली गली में 14 साल पुराना खौफ अब भी कायम है। 12 सितंबर 2003 की वह रात यहां 12 लोगों की जिंदगी लील गई थी। यहां देसी शराब के अड्डे के पास से लोगों ने कुछ अंजान लोगों से सस्ती शराब खरीदी थी। उस शराब को पीने के बाद इस गली से लेकर आनंद सिनेमा से होते हुए बस अड्डे तक एक-एक करके 12 लाशें बिछ गई थीं। कई लोग गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल पहुंच गए थे। इस इलाके में शराब से हुए इतने बड़े हादसे के बाद अब इसी चौराहे पर देसी शराब का अड्डा दोबारा गुलज़ार है।

यहां शराब का ठेका हादसे के बाद निरस्त कर दिया गया था। मगर हादसे के दिन बीतते-बीतते मानकों के विपरीत ठेका दोबारा खोल दिया गया। इसी तरह से मानकों के विपरीत बनाए गए शराब ठेके अब लोगों के गुस्से का शिकार होते जा रहे हैं।

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ये कोई पहला वाक्या नहीं है, लखनऊ जिले के ही काकोरी इलाके में 2015 पूरे दो गांवों में मातम छा गया था, यहां 54 लोगों की मौत हुई थी। लखनऊ से सटे उन्नाव जिले में दो साल पहले कई घरों के चिराग शराब बुझा चुकी है। पिछले वर्ष जुलाई महीने में उत्तर प्रदेश के एटा जिले में जहरीली शराब ने 2 दर्जन लोगों की जान ली थी, तो कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी, शराब से मौत के सिलसिले यहीं नहीं थे, आए दिन मौत और हंगामे की ख़बरें आती रहती हैं। इन ज्यादातर मामलों में मौत पुरुषों की हुई है लेकिन उसका खामियाजा महिलाएं भी भुगतती हैं, शराब पीकर मारपीट, पैसे के लिए हंगामा, अपनों को खोने वाली महिलाओं को अब योगी सरकार से उम्मीद जगी है, इसलिए वो अपना परिवार बचाने के लिए सड़कों पर उतर रही हैं। उनके निशाने पर कच्ची शराब के माफिया और लाइसेंस वाले ठेके दोनों हैं।

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शराब के ठेके केवल मानकों से ही संचालित होंगे। सरकार ठोस आबकारी नीति बनाएगी ताकि आम लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। शराबबंदी को लेकर फिलहाल सरकार ने कोई फैसला नहीं किया है।
डॉ. दिनेश शर्मा, उप मुख्यमंत्री

देखिए कैसे फूट रहा है लोगों का शराब के ठेकों पर लोगों का गुस्सा।

शहीद स्मृति समारोह समिति के महामंत्री और काकोरी कांड से जुड़े स्वतंत्रता सेनानी रामकृष्ण खत्री के पुत्र उदय खत्री बताते हैं कि उनको 2003 की वह घटना आज भी याद है। उनका परिचित एक 25 वर्षीय युवक जो फल बेचने का काम करता था, उसकी मौत जहरीली शराब पीने से हो गई थी। उनका कहना है कि यहां अभी भी इस तरह की गैरकानूनी शराब का धंधा लोग करते हैं मगर राजनैतिक और पुलिस के संरक्षण के चलते हम लोग इसको रोक नहीं पा रहे हैं। इसी इलाके के रहने वाले प्रदीप सोनकर का कहना है कि हमको लगता है कि पूरे उत्तर प्रदेश में अब शराबबंदी हो जानी चाहिए। इस इलाके में आमतौर से लोग फल, सब्जी, मछली और मांस का कारोबार करते हैं।

मकानों में बना दिए गए शराब के ठेके

रिहायशी क्षेत्र ही नहीं बल्कि मकान के भूखंड में भी शराब के ठेके और मॉडल शॉप हैं। अलीगंज सेक्टर क्यू के पास रिहायशी लैंडयूज में मॉडल शॉप और शराब की दुकान है। पड़ोस में रहने वाले महेंद्र सिंह राणा कई बार शिकायत कर चुके हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। गोमती नगर में कैप्टन मनोज पांडेय चौराहा और हुसड़िया चौराहे के बीच तीन शराब के ठेके मकानों के नीचे बनाए गए हैं। सबसे अधिक समस्या देसी शराब के ठेकों के साथ में है। ये बस्तियों के बीच में हैं। अलीगंज रिंग रोड के पास रहने वाली घर-घर बर्तन मांजने का काम करने वाली सुमन बताती हैं कि, उनकी बस्ती के पास देसी शराब के ठेके में सुबह से शराबी जमा होने लगते हैं। ये लोग आती-जाती महिलाओं का निकलना भी मुश्किल कर देते हैं।

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किस तरह से पास हो जाते हैं मानकों के विपरीत ठेके

मानकों के मुताबिक शराब के ठेके केवल व्यवसायिक क्षेत्र में हो सकते हैं, रिहायशी में नहीं। धर्मस्थल या स्कूलों से 100 मीटर के दायरे में कोई ठेका निर्गत नहीं किया जा सकता है। मगर प्रदेश भर में इस तरह के सैकड़ों उदाहरण सामने हैं जिनमें धड़ल्ले से तय मानकों का उल्लंघन कर के ठेके खोल दिए गए हैं। आए दिन महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरोध की बातें सामने आती रहती हैं, मगर ठेके धड़ल्ले से चलते रहे हैं लेकिन जब से हाईवे के 500 मीटर के दोनों ओर ठेके बंद करने का फैसला लागू हुआ है, मानकों के विपरीत ठेकों के खिलाफ आंदोलन भड़क उठे हैं। मगर अब तक कोई ठोस नीति इन ठेकों के खिलाफ नहीं सामने आ रही है।

शराब की दुकानों पर तोड़फोड‍़ करने वालों पर पुलिस करेगी कार्रवाई

शराब की दुकानों पर तोड़फोड़, पथराव और आगजनी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए यूपी पुलिस के डीजीपी जावीद अहमद ने सभी डीआईजी, एसएसपी और जिलों के एसपी को निर्देश दिया है कि शराब की दुकानों पर तोड़फोड‍़, आगजनी और लूटपाट करने वाले असामाजिक तत्वों खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

प्रदेश में 94 शराब की दुकानों पर तोड़फोड‍़ की घटना सामने आई है जिसमें सबसे ज्यादा 22 घटनाएं बरेली में और सबसे कम गोरखपुर में हुई हैं। वहां पर सिर्फ दो दुकानों पर ही ऐसी घटनाएं हुई हैं। लखनऊ जिले में 17 शराब की दुकानों पर तोड़फोड़ और आगजनी की गई है। प्रदेश भर में हुई इन घटनाओं में 676 अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और 112 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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