तहज़ीब के शहर लखनऊ में ही युवतियां सबसे अधिक असुरक्षित

तहज़ीब के शहर लखनऊ में ही युवतियां सबसे अधिक असुरक्षितलखनऊ की पहचान पर मनचलों ने लगाया बदनुमा दाग। 

अभिषेक पाण्डेय

लखनऊ। नज़ाकत और तहजीब का शहर लखनऊ अपनी कई खूबियों की वजह से देश भर में पहचान जाता है, लेकिन शहर की इस पहचान पर मनचलों ने एक बदनुमा दाग लगा दिया है। युवतियों से मोबाइल फोन और सोशल मीडिया पर छेड़खानी के मामले में लगातार पांच सालों से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अव्वल नम्बर स्थान पर कायम है, जिसका कोई सानिध आस-पास भी नजर नहीं आता।

वीमेन पॉवर लाइन के आकड़ों की माने तो युवतियों और महिलाओं से छेड़खानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शहर वाराणसी चौथे पायदान पर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद गोरखपुर पांचवें स्थान पर अपनी जगह बनाये हुए है। इन शहरों में बढ़ती मोबाइल फोन पर छेड़खानी की घटनाओं ने युवतियों के माथे पर एक चिंता की लकीर कायम कर दी है, जिस पर अंकुश लगाने के लिए सरकारों को इस ओर तेजी से काम करने की जरूरत है।

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15 नवम्बर 2012 को वीमेन पॉवर लाइन 1090 को बनाने का मकसद केवल प्रदेश में बढ़ती छेड़खानी की घटनाओं पर रोकथाम के लिए था, लेकिन इससे बिल्कुल उलट जिस शहर में इसका मुख्यालय स्थापीत किया गया, वहीं के शहरवासियों पर इसका कोई असर देखने को नहीं मिला। लखनऊ में छेड़खानी का आकड़ा इन पांच सालों में करीब 1,42,949 तक पहुंच गया, जिसमें छात्राओं के साथ छेड़खानी की घटनाएं करीब 69,246 तक पहुंच गईं। हालांकि अबतक 90 फीसदी छेड़खानी की घटनाओं को सुलझा लिया गया है, फिर भी मोबाइल फोन पर बढ़ती युवतियों के साथ छेड़खानी की घटनाओं ने यह सोचने को मजबूर कर दिया है कि मनचलों

पर कैसे अंकुश लगाया जा सके। वहीं अगर बात करे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की तो, वहां भी छेड़खानी की घटनाएं कम नहीं हुई। आकड़े बताते है कि करीब 28881 मामले अब तक 1090 में दर्ज हो चुके है और जिले ने छेड़खानी के मामले में चौथे नम्बर का स्थान प्राप्त किया है। साथ ही प्रदेश में बने नये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद गोरखपुर इस पायदान पर पांचवे स्थान पर है। छेड़खानी के आकड़ों की बात करे तो इसमें लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, गोरखपुर, आगरा, जैसे बड़े शहर अव्वल नम्बर पर हैं। जबकि जौनपुर सातवें स्थान पर है, जिसकी गिनती छोटे शहरों के रूप में की जाती है। वहीं वीमेन पॉवर लाइन के एक अधिकारी ने बताया कि, ज्यादातर छेड़खानी की घटनाएं छात्राओं से मोबाइल फोन पर हो रही है, जिसमें 20 से 25 साल की युवतियों की संख्या अधिक है। साथ ही उन्होंने बताया कि, घर पर कामकाज करने वाली महिला भी यहां अपने घरों में घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराती हैं। इन मामलों को संबंधित थानों को भेज कर पूरे केस को सुलझाने का प्रयास किया जाता है, जिससे घर में प्रताड़ित होने वाली महिलाएं सुरक्षित रह सकें।

छोटे शहरों में घटनाओं में कमी

अगर छेड़खानी के मामलों की बात करें तो, इसमें छोटा शहर श्रावस्ती सबसे नीचले पायदान पर है, जहां पूरे पांच सालों में करब एक हजार मामले ही छेड़खानी की दर्ज हुई है, जिसे सुलझा लिया गया है। वहीं दूसरे पर ललितपुर, तीसरे पर कासगंज, चौथे पर चित्रकूट, पांचवें पर कौशंबी, छठे पर महोबा और सातवां स्थान हापुड़ ने बनाया है। इन शहरों से पांच सालों में नाम मात्र की शिकायतें आई है, जो ज्यादातर घरेलू हिंसा की है।

नाबालिग से भी छेड़छाड़ में लखनऊ आगे

छेड़खानी के मामले में लखनऊ के मनचलों ने नाबालिग किशोरियों को भी नहीं बख्शा है, क्योंकि मनचले इन्हें भी मोबाइल पर कॉल कर प्रताड़ित करते हैं। करीब पांच सालों में नाबालिगों से 1344 मामले अबतक वीमेन पॉवर लाइन में दर्ज किये जा चुके हैं। वहीं कुछ मामलों में आरोपियों को जेल भी भेजा जा चुका है।

एंटी रोमियों बनने के बाद छेड़खानी की घटना में इजाफा

प्रदेश में भाजपा सरकार बनते ही उसने छेड़खानी पर अंकुश लगाने के लिए एंटी रोमियो से सेल गठन करने की घोषणा की थी। जबकि इस सेल के गठन होने के बाद करीब मोबाइल फोन पर छेड़खानी की घटनाओं में 30 फीसदी इजाफा हुआ है। आकड़े की माने तो 19 मार्च 2017 से 30 अप्रैल तक 31057 छेड़खानी के मामले अबतक दर्ज किये गए हैं।

कुल पांच सालों का आकड़ा


  • -कुल पांच सालों में दर्ज छेड़खानी की घटना: 7,44,296
  • -इतनी घटनाओं का हो चुका समाधान: 7, 32,399
  • -फोन पर छेड़खानी के आकड़े: 6,47,026
  • -सोशल मीडिया पर छेड़खानी के आकड़े-11,042
  • -सार्वजनिक स्थान पर छेड़खानी की दर्ज घटनाएं:11,501

टॉप सात शहरों के छेड़खानी के आकड़े

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