उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू

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लखनऊ। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में लागू कर दी गई है। इस योजना में किसान के खाते में सीधे पैसा भेजा जाएगा। इसके तहत किसानों की फसल बर्बाद होने पर उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। 

संयुक्त कृषि निदेशक, लखनऊ मंडल, डॉ ओमवीर सिंह बताते हैं, “फसल बीमा योजना के तहत किसानों की फसल के नुकसान की प्रक्रिया को अब काफी आसान बना दिया गया है। इससे किसानों को समय पर मुआवजा मिल सकेगा। इस योजना के तहत किसानों के बैंक खाते में मुआवजा सीधे पहुंचेगा।”

वो आगे कहते हैं, “किसानों की पिछली सात वर्षों के फसल का उत्पादन का औसत निकाला जाएगा जिसके आधार पर उन्हें मुआवजा दिया जाएगा।” 

इस योजना के तहत किसानों की फसल में होने वाले नुकसान को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में मौसम की वजह से बुआई नहीं हो पाने, दूसरी श्रेणी में फसलों की कटाई से पहले प्राकृतिक आपदा से खराब होने वाली फसल। 

तीसरी श्रेणी में ओलावृष्टि, भूस्खलन बाढ़ जबकि चौथी श्रेणी खलिहान में रखी फसलों को होने वाले नुकसान के तहत मुआवजा दिया जाएगा। इस योजना का लाभ खरीफ की फसलें धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंगफली, उड़द, मूंग, तिल, अरहर, सोयाबीन जबकि रबी में गेहूं, चना, मटर, मसूर, लाही-सरसों और आलू की फसलों के नुकसान होने पर मिलेगा। 

तैयार फसल की भी भरपाई

नई स्कीम में फसल तैयार होने के बाद भी नुकसान की भरपाई होगी। अभी तक सरकारी सब्सिडी की ऊपरी सीमा तय होती थी। नुकसान की पूरी भरपाई नहीं होती थी। नई स्कीम में पूरी बीमित राशि दी जाएगी।

स्मार्टफोन बनेगा मददगार

इससे फसल नुकसान की तस्वीर संबंधित अधिकारी को भेजी जाएगी। इससे किसानों को बीमा के पैसे जल्दी मिल सकेंगे।

पंचायत स्तर पर होगा नुकसान का आंकलन

योजना का संचालन एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया को सौंपी गई है। योजना का लाभ बटाईदार और किराए पर खेती करने वालों को भी देने का फैसला किया गया है, जिन्होंने बैंकों से ऋण लेकर बुवाई की है उनका बीमा संबंधित बैंकों के जरिए होगा। सूखे या अन्य कारण से प्रतिकूल मौसम के चलते बुवाई न होने पर किसानों के नुकसान का आकलन अब ग्राम पंचायत स्तर पर होगा।

किसी ग्राम पंचायत के 75 प्रतिशत किसान अगर बुवाई नहीं कर पाए तो उन्हें इस योजना में कवर दिया जाएगा। मुआवजे के रूप में उनकी बीमित राशि का 25 प्रतिशत भुगतान होगा। पर ऐसी ग्राम पंचायतों के किसान को आगे की योजना के अंतर्गत उस फसल के लिए उस वर्ष कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।

खेत में रखी फसल के नुकसान होने पर भी मिलेगा मुआवजा

कटाई के बाद खलिहान में रखी फसलों को यदि 14 दिन में किसी कारण नुकसान होता है तो भी इस योजना का लाभ उसे मिलेगा। नुकसान के आकलन के लिए बीमा कंपनी कृषि या उद्यान विभाग के किसी सेवानिवृत्त अधिकारी अथवा कर्मचारी की मदद लेगी। किसानों को 48 घंटे के अंदर सीधे बीमा कंपनी अथवा संबंधित बैंक को टोल फ्री नंबर पर इसकी सूचना देनी होगी। 

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