उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू, बीजेपी के लिए बड़ा मौक़ा

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू, बीजेपी के लिए बड़ा मौक़ाGaon Connection

देहरादून। कांग्रेस की तमाम कोशिशों के बावजूद उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन आखिरकार लागू हो ही गया है। 18 मार्च को उत्तराखंड में कांग्रेस वाली हरीश रावत सरकार से 9 विधायकों ने बगावत कर दी जिसके बाद राज्य के सियासी हालात पूरी तरह से बदल गए। हरीश रावत ने पूरा दम लगा लिया लेकिन वो बागी विधायकों को नहीं मना पाए।

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद राजनीतिक जानकार बीजेपी के लिए इसे बड़ा मौक़ा बता रहे हैं। राष्ट्रपति शासन का फैसला आने के बाद हरीश रावत ने ट्वीटर पर अपनी भड़ास निकाली, 'क्या ये राज्य अब जनसेवा से, पॉलिसी और प्लानिंग से चलेगा या इस राज्य का भाग्य निर्धारण स्टिंग और डिफेक्सन करेंगे? मैं ये सवाल हर उत्तराखंडी से पूछना चाहूंगा।' हांलाकि राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद उत्तराखंड विधानसभा को भंग ना करते हुए निलंबित किया गया है। खबरों के मुताबिक राष्ट्रपति शासन को लेकर जल्द ही अधिसूचना भी जारी की जाएगी।

बीजेपी कर सकती है सरकार बनाने का दावा

राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद बीजेपी इसे अपने लिए उम्मीद के तौर पर देख रही है। बीजेपी का दावा है अपने 27 विधायकों के अलावा कांग्रेस के 9 बागी विधायक भी उसके साथ हैं। इस लिहाज़ से राज्य में सरकार बनाने के लिए जरूरी 36 विधायकों का समर्थन पत्र देकर वो राज्यपाल से सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा हमारे पास 36 विधायकों का समर्थन मौजूद हैं और वो चुनाव के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।

पीटीआई के हवाले से मिली खबर के मुताबिक उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज सुबह संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत इस उद्घोषणा पर दस्तखत किए हैं। 

बागियों ने किया राष्ट्रपति शासन का स्वागत

कांग्रेस के बागी नेता विजय बहुगुणा ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का लागू किया है। बहुगुणा ने कहा कि हरीश रावत के नेतृत्व वाली सरकार को बर्खास्त किया जाना चाहिए क्योंकि वो भ्रष्टाचार में लिप्त है। पूर्व मुख्यमंत्री बहुगुणा ने उम्मीद जतायी कि राष्ट्रपति शासन ज्यादा दिन नहीं रहेगा और राज्य में नये चुनाव होंगे।

राज्यपाल के फैसले पर टिकी सबकी निगाहें

उत्तराखंड के संवैधानिक हालात को लेकर अब राज्यपाल को आगे का फैसला करना है। मौजूदा हालात में तीन संभावनाएं नजर आ रही हैं जिसे राज्यपाल अपना सकते हैं।

पहली संभावना

चूंकि विधानसभा निलंबित है इसलिए दूसरी बड़ी पार्टी यानी बीजेपी को बहुमत साबित कर सरकार बनाने का मौका राज्यपाल दे सकते हैं।

दूसरी संभावना

विधानसभा को भंग कर अगले चुनाव का रास्ता साफ किया जा सकता है।

तीसरी संभावना

इस विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने तक यानी अगले साल भर तक उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन रखा जाए और उसके बाद अगले चुनाव पर फैसला लिया जाए। 70 सीटों वाली उत्तराखंड विधानसभा में सरकार बनाने के लिए कम से कम 36 विधायकों का समर्थन जरूरी है।

स्टिंग ऑपरेशन ने कराई किरकिरी

इन ख़बरों से पहले कल ही उस वक्त माहौल और गर्मा गया जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का एक स्टिंग ऑपरेशन सामने आ गया। पहली बार किसी राज्य के मुख्यमंत्री स्टिंग ऑपरेशन में फंसे है। कांग्रेस के बागी विधायकों ने दावा किया है कि हरीश रावत ने पत्रकार उमेश शर्मा के जरिए बागी विधायकों को खरीदने की कोशिश की। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बागी कांग्रेस विधायकों ने स्टिंग का वीडियो जारी किया। सीएम हरीश रावत ने स्टिंग को फर्जी करार दिया है।

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