वेंडिंग मशीन से बांटी जाएंगी सेनेटरी नैपिकन

वेंडिंग मशीन से बांटी जाएंगी सेनेटरी नैपिकनगाँव कनेक्शन

लखनऊ। बालिकाओं को अब सेनेटरी नैपिकन के लिए परेशान नहीं होना होगा। वह अब वेडिंग मशीन में आधारकार्ड के अंतिम छह अंकों को डायल कर और अंगुलियों की छाप देकर आसानी से नैपकिन पा सकेंगी। प्रदेश के भीड़भाड़ वाले इलाकों में वेन्डिंग मशीन लगाई जाएगी। एपीसी प्रवीर कुमार ने यूनीसेफ को आधार कार्ड लिंक सेनेटरी नैपकिन वेन्डिंग मशीन योजना पर विचार करने को कहा है। 

गोमतीनगर स्थित एक होटल में आयोजित स्ट्रेंदनिंग मेन्सट्रुअल मैनेजमेंट प्रोग्राम इन की स्कीम्स एडं फ्लैगशिप्स इन उत्तर प्रदेश स्टेट कन्सल्टेशन वर्कशाप में उन्होंने कहा, “आधार लिंक वेंडिंग मशीन होने के कई फायदे नजर आते हैं, मसलन बालिकाएं पुरुष से सेनेटरी नैपकिन मांगने की झिझक से बचेंगी। कार्यशाला में प्रमुख सचिव चिकित्सा अरविंद कुमार ने सेनेटरी नैपकिन के लिए चलाई जा रही योजना के बारे में जानकारी दी। वहीं एपीसी ने सीडीओ मिर्जापुर द्वारा दिखाए गए प्रस्तुतिकरण को माड्यूल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। 

लिंकअप से डाटा बैंक होगा तैयार 

एपीसी ने कहा, आधार लिंक वेन्डिंग मशीन होने से यूनीसेफ और सरकार के पास भी सेनेटरी नैपकिन यूजर बालिकाओं का एक डाटा बैंक तैयार होगा। इसके जरिए सेनेटरी नैपकिन का प्रयोग बंद करने वाली बालिकाओं के बारे में जानकारी मिल जाएगी। इस जानकारी मिलने पर बालिका से काउंसिलिंग की जाएगी। इसके साथ ही इसके वितरण में सरकारी स्कूलों व कॉलेजों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और स्कूल कालेजों में छुट्टी के चलते वितरण की बाधाओं से भी मुक्ति मिलेगी। 

सौ फीसदी बालिकाओं तक नैपकिन पहुंचाने की चुनौती

कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा, सौ फीसदी बालिकाओं तक सेनेटरी नैपकिन पहुंचाना चुनौती है। उन्होंने कहा, प्रदेश में 1,67,000 प्राइमरी स्कूल हैं और करीब 15,000 माध्यमिक स्कूल हैं, जिन्हें इस योजना के तहत लाये जाने की चुनौती है, लेकिन अभी तक हम मात्र दो फीसदी बालिकाओं तक ही पहुंच पाए हैं। उन्होंने आगे कहा, कारपोरेट सेक्टर को भी इस काम में शामिल करने की जरूरत है, कारपोरेट के पास सीएसआर फंड होता है। उन्होंने आगे कहा, इसके वितरण की पूरी प्रकिया को मानकीकृत किए जाने की भी हमे जरूरत है। 

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