अपने ज़ख्म दिखाना आसान नहीं होता... अगर आपके परिवार में किसी को शराब की लत है तो वीडियो जरुर देखें

अगर आपके परिवार में किसी को नशे की लत हो तो ये यश की कहानी ध्यान से सुनिए शायद एक जिंदगी बर्बाद होने से बचा सकें।

देश की जानी-मानी पत्रकार-एंकर ऋचा अनिरूद्ध इस वक्त खास सीरीज 'जिंदगी विद ऋचा' कर रही हैं, ये कहानियां कुछ हटकर कुछ प्रेरणादायक और कुछ आपको झकझोरने वाली... अब ये कहानियां आप गांव कनेक्शन वेबसाइट और अख़बार में भी पढ़ सकते हैं...

जिंदगी विद ऋचा का ये एपिसोड बहुत खास हैं। क्योंकि इस बार जिस शख्स ने अपनी कहानी सुनाई है, ऋचा का बहुत खास़, उनका भाई है।

ऋचा कहती हैं, किसी और कहानी सुनना और सुनना बहुत आसान होता है। मुश्किल होता है अपनी कहानी दुनिया को सुनना, खास कर तब जब वो कहानी पन्ने की तरह हो। जिसमें बहुत सारा दुख, घुटन, अपमान और शर्म शामिल हो। इस कहानी को सुनाने का मकसद सिर्फ इतना है कि किसी परिवार को इस दर्द न गुजरना पड़े, जिससे मेरा परिवार गुजरा है।

अगर आपके परिवार में किसी को नशे की लत हो तो ये यश की कहानी ध्यान से सुनिए शायद एक जिंदगी बर्बाद होने से बचा सकें। क्योंकि यश ने 18 साल की उम्र में बियर पीनी शुरु की और फिर वो बीमारी बन गई। यश बताते हैं, "मैं 24 घंटे शराब पीता था। यश को ऐसी लत लगी कि वो भीग तक मांगने को तैयार थे.. लेकिन एक दिन मैं इस दलदल से बाहर निकल आया।'

ऋचा के इस एपोसीड की काफी सराहना हुई। फेसबुक, ट्वीटर और यूट्यूब पर लोगों ने कहा कि अपने ही शो में शराब के लती रहे अपने भाई की कहानी अपने समाज को आईना दिखाया है, हजारों युवाओं को इस दलदल से बचाने की कोशिश की है।


एक पाठक ने एपिसोड देखने के बाद ये चिट्ठी लिखी...

"यश की आपबीती देख-सुनकर मैं सकते में आ गयी थी। मेरा मन मेरे बचपन में चला गया और बहुत सारे भाव एक के बाद एक आते चले गए। सबसे पहले तो बहुत गुस्सा आया, फिर उनके लिए बेचारगी का भाव और अंत में बहुत सारा गर्व और सम्मान।

मुझमें एक सात साल की लड़की जाग गयी जो रोज़ रात को चादर में मुंह छुपा कर अपने पिता के घर आने की सम्भावना से डर जाती थी। मेरे पिता भी रोज़ नशे में धुत्त घर आते और फिर मेरी माँ से झगड़ा करते। अल्कोहोलिक पिता के होने से घर में क्या हालत होती है इसे कई बरस मैंने स्वयं झेला है। जैसे थोड़ी बड़ी हुई तो डर नफ़रत और गुस्से में बदल गया। तब कहाँ ये समझ थी की नफरत बुराई से करो, इंसान से नहीं। मेरी माँ जो मेरे पिता से कहीं ज़्यादा सुशिक्षित थीं चुपचाप सब झेल जातीं। समाज के डर से और खानदान की बदनामी के भय से कभी उन्होंने न तो शिकायत की ना ही पिता से अलग होने का ख्याल उन्हें आया। पिता के शराब पीने का सिलसिला उन्हें लिवर सिरोसिस होने पर ही रुका, पर तब तक जीवन लगभग शेष होने आया था। अगर समय पर सही सलाह और सहारा मिला होता तो जिस पिता को मैंने 21 वर्ष की आयु में ही खो दिया कुछ वर्ष और उनका सान्निध्य मिल पाता।

मैंने अपने परिवार में बहुत इस तरह की आपबीतियाँ देखीं पर अफ़सोस उनका अंत सुखःद नहीं हो पाया। मेरे एक चाचा शराब की लत की वजह से सिर्फ 40 साल की उम्र में अपनी पत्नी, दो बच्चे और बूढ़ी माँ, और बहुत सारा कर्ज़ा पीछे छोड़ इस दुनिया से चले गए। किन मुश्किलों से फिर उनकी पत्नी ने बच्चों को पढ़ा लिखा कर बड़ा किया ये मैंने अपनी आँखों से देखा है। यह कुछ 15- 20 साल पुरानी बात है। तब कहाँ इस तरह की सोच थी? तब यह राह दिखने वाला कोई था ही नहीं।

इस एपिसोड को देख कर यही लगा कि काश तब हमें किसी ने ये समझ दी होती, काश माँ ने सही समय पर किसी से ये बातें साझा की होती, तो मेरे बचपन की यादें कुछ सुनहरी होती। इस दुःख को शायद ही मैं कभी मन से मिटा पाऊं पर आगे की पीढ़ी के लिए ज़रूर मुझे उम्मीद की किरण दिख रही है। यश के जीवन से मिली प्रेरणा से, नशे की इस ज़हरीली लत से अगर मैं एक ज़िन्दगी भी बचा पाऊं तो वो एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी मेरे पिता के लिए।

यश और उनके पूरे परिवार को मेरा नमन और बहुत शुभकामनाएं।

ज़िन्दगी विद ऋचा को भी ढेरों शुभकामनाएं

-स्वपना फड़के, एक दर्शक






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