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इन लड़कियों ने रोका अपना बाल विवाह

Neetu SinghNeetu Singh   9 May 2017 5:11 PM GMT

इन लड़कियों ने रोका अपना बाल विवाहगाँव की लड़कियों ने अपना बाल-विवाह खुद रोका है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

बहराइच। जिले में वर्षों से बाल-विवाह करने की प्रथा रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। यहां की खामोश लड़कियों ने अब आवाज़ उठानी शुरू कर दी है। लड़कियों ने अपने घर में आवाज़ उठाई और कम उम्र में हो रही अपनी शादी को खुद रोका है। लड़कियों द्वारा उठाया गया ये पहला प्रयास जो देखा-देखी आगे बढ़ रहा है।

बहराइच जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर शिवपुर ब्लॉक के कई गाँव की लड़कियों ने अपना बाल-विवाह खुद रोका है। जुलाहनपुरवा गाँव की रहने वाली रेशमा (16 वर्ष) ने बताया, “मेरी शादी मेरे घरवालों ने तय कर दी थी, मैं किशोरी केंद्र में पढ़ने जाती थी वहां मुझे बताया गया था 18 वर्ष से कम उम्र में शादी करना कानूनन अपराध है, अपने अम्मी-अब्बू से बहुत झगड़ा किया, तीन चार दिन खाना नहीं खाया तब कहीं जाकर उन्होंने हमारी शादी मना की। रेशमा की तरह इनकी कई सहेलियों ने हिम्मत जुटाकर अपने गाँव में अपनी खुद की शादी रोकी है।”

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उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में महिला समाख्या द्वारा 1000 से ज्यादा किशोरी साक्षरता केंद्र अब तक संचालित किए जा चुके हैं जिसमें उन लड़कियों को पढ़ने का मौका मिलता है जिनके मां-बाप उन्हें पढ़ाते नहीं हैं, या फिर जिन्होंने स्कूल की कभी शक्ल नहीं देखी है।

बहराइच जिले की महिला समाख्या की जिला समन्यवक रज्बुलनिशां का कहना है, “किशोरी साक्षरता केंद्र में लड़कियों को लिखना-पढ़ना ही नहीं सिखाया जाता है बल्कि इन्हें व्यवहारिक ज्ञान भी दिया जाता है, इनके हक़ और अधिकार पर भी चर्चा होती है, इन्हें अपनी समस्या के लिए खुद आवाज़ उठानी होगी इस बात के लिए इन्हें पूरी तरह से तैयार किया जाता है, जेंडर पर भी चर्चा होती है।”

बहराइच जिले में जिन ब्लॉक में महिला समाख्या के समूह चलते हैं। वो बहुत पिछड़े गाँव है जहां पर अशिक्षा-बाल विवाह बहुत ज्यादा है, लोगों को अपने हक और अधिकार के बारे में पता ही नहीं है। यहां की किशोरियों को सशक्त बनाने के लिए किशोरी केंद्र बहुत ही उपयोगी साबित हो रहे हैं क्योंकि इससे जुड़ी किशोरियां अपने लिए आवाज़ उठाने लगी हैं। पिछले एक वर्ष में कई लड़कियों ने अपनी खुद की शादी रोककर एक मिसाल कायम की है। ये लड़कियां अब सजग है आस-पास अगर कहीं भी बाल-विवाह होगा तो ये रोकेंगी।

सिमरिया गाँव की नगमा (17 वर्ष) का कहना है, “हम चार बहनें दो भाई हैं, ज्यादा बहन-भाई होने की वजह से हमारी शादी तय कर दी गई थी, हमने घरवालों को मना किया जब वो नहीं माने तो केंद्र की मंजू दीदी को बताया, दीदी ने जब घर जाकर दबाव बनाया तब हमारी शादी रुकी।” रेशमा, मीना, प्रीती, नगमा, गुल्फसा, पूजा वर्मा, मीरा वर्मा, पप्पी बानो, प्रियंका जैसी दर्जनों लड़कियों ने अपनी खुद की शादी रोकी। इन सभी की उम्र 12 वर्ष से लेकर 16 वर्ष की है।

छठी कक्षा में पढ़ने वाली पूजा वर्मा (12 वर्ष) बताती है, “एक दिन हमारे घर बहुत लोग आए, हमें लगा वो मेहमान हैं, उनके कुछ देर रुकने के बाद पता चला वो हमारी शादी के लिए आये हैं।” वो आगे बताती हैं, “उन लोगों के सामने तो मैं नहीं बोल पाई पर उनके जाने के बाद मैंने अपने मम्मी-पापा को मना किया कि हम अभी पढ़ना चाहते हैं, वो माने नहीं हम तीन चार दिन तक खूब रोये,पता नहीं मेरे मम्मी-पापा ने क्या सोचा और मेरी शादी के लिए मना कर दिया मुझे कस्तूरबा गांधी स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दिया।”

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