विधवा पेंशन नहीं मिलने से ग्रामीण महिलाएं परेशान

विधवा पेंशन नहीं मिलने से ग्रामीण महिलाएं परेशान

गोंडा। गाँव की मेहरूनिसा (56 वर्ष) को पिछले वर्ष से उनकी विधवा पेंशन नहीं मिली है। घर पर बेरोजग़ार बेटे, बहू के साथ दो पोतें भी हैं। पेंशन न मिलने से उनका परिवार भुखमरी के कगार पर है।

गोंडा जिला मुख्यालय से 18 किमी पश्चिम दिशा में कौडिय़ागाँव में आठ महिलाओं को पिछले वर्ष से विधवा पेंशन नहीं मिली है। गाँव की मेहरुनिसा बताती हैं, ''पांच वर्ष पहले हमारे शौहर खत्म हो गए थे। दो वर्ष पहले हमने ग्राम प्रधान की मदद से विधवा पेंशन का फार्म ब्लॉक में जमा करवा दिया था। एक साल तो पैसा बराबर मिला पर उसके बाद आज तक खाते में एक पैसा तक नहीं आया है।''

गरीबों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ही जिंदगी जीने का सहारा देने के लिए समाज कल्याण, विकलांग जन विकास व प्रोवेशन विभाग से विधवा पेंशन योजना संचालित कर रही है। पति की अकाल मृत्यु के दौरान निराश्रित होने वाली विधवा महिलाओं को पेंशन दी जाती है।

सभी लाभार्थियों को पेंशन राशि का भुगतान प्रत्येक वर्ष चार किश्तों में किया जाता है। पेंशन राशि ईएफएमएस (इलेक्ट्रॉनिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम) के तहत निदेशालय स्तर से ही ऑनलाइन बैंक खाते में भेजी जाती है। पर हालत यह है की जिले के कुल 520 लाभार्थियों को एक वर्ष से पेंशन नही मिली है।

जिले में विधवा पेंशन के वितरण में आ रही समस्या बताते हुए मुख्य विकास अधिकारी, गोंडा जयंत कुमार दीक्षित बताते हैं, ''इस वर्ष लक्ष्य कम होने के कारण कुछ आवेदन पत्र लंबित हो गए हैं। इसलिए सम्बन्धित खातों में धनराशि भेजने में परेशानी हो रही है। इसकी सूचना शासन को भेजी दी गई है। जल्द ही इनकी पुन: जांच कराकर लाभार्थियों के खातों में पैसे भेज दिए जाएंगे।''

गोंडा से लगभग 30 किमी दूर रेवंरिया गाँव की कुन्ती देवी (51 वर्ष) के पति की मृत्यु दो वर्ष पहले एक सड़क दुर्घटना में हो गई थी। उन्होंने ने ब्लॉक जाकर अपने लड़के की मदद से विधवा पेंशन का फॉर्म भरा और उन्हें पेंशन की दो किश्तें भी मिल गईं पर पिछले 10 महीनों से उनके खाते में एक भी पैसा नहीं आया।

अपनी परेशानी बताते हुए कुन्ती कहती हैं, ''हमें तीन महीने से पेंशन नहीं मिली है।'' बैंक में अधिकारी बताते हैं, ''बैंक खाता नंबर गलत हो गया है इसलिए पेंशन का पैसा नहीं ट्रांसफर हो पा रहा है। इस उम्र में तबियत ज़्यादा सही नहीं रहती है पेंशन न मिलने से इलाज करना मुश्किल हो रहा है।''

''जिन लाभार्थियों का बैंक खाता नंबर गलत हो गया है, उन्हें ठीक कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग के अधिकारी को सौंपी गई है। पात्रों को समय से लाभ मिले, इसके लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।'' जयंत कुमार दीक्षित, सीडीओ गोंडा आगे बताते हैं।

समाज कल्याण विभाग से चलाई जा रही इस योजना के बलबूते जहां इन महिलाओं को आर्थिक लाभ मिल रहा था वहीं पेंशन के पैसों से ये महिलाएं किसी न किसी रोज़गार से जुड़ कर आत्मनिर्भर भी बन रहीं थी पर खातों में पैसे न आने से इनको अपना घर चलने में मुश्किल हो रही है।

गाँव में महिलाओं को विधवा पेंशन न मिल पाने पर नाराजग़ी जताते हुए  कौडिय़ा गाँव के प्रधान सुशील सिंह बताते हैं, ''गाँव में बुढ़ापा, विधवा व अंगहीनों की पेंशन रुकी पड़ी है। कारण कोई बताने वाला नहीं है। इसमें पहले आधार कार्ड लिंक करवाने की बात की जा रही थी। लोगों ने यह भी करवा लिया। इसके बावजूद पेंशन नहीं आ रही है।''

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