बेबे-बापू स्कूल, जहाँ दादी-बाबा हैं पढ़ते

Gaon Connection Desk

Jan 15, 2026

जब उम्र रुकी नहीं

65 साल की बलबीर कौर 70 साल की जसपाल कौर आज किताब और पेंसिल थामे बैठी हैं, उम्र यहाँ रुकावट नहीं बनी।

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अधूरी थी यात्रा

पंजाब के भटिंडा ज़िले के बल्लो गाँव में बना बेबे–बापू स्कूल जहाँ सीखने की कोई आख़िरी उम्र नहीं।

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अंगूठे से हस्ताक्षर तक

जो हाथ सालों तक अंगूठा लगाते रहे, आज वही हाथ ख़ुद अपने दस्तख़त कर रहे हैं।

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शिक्षक भी सीखते हैं

इन्हें पढ़ाती हैं राजविंदर सिंह जो खु़द भी उनसे सीखती हैं।

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हिचक से हौसले तक

शुरुआत में सवाल था- “अब पढ़कर क्या करेंगे?” आज वही लोग अख़बार पढ़ते हैं, गुरबानी समझते हैं।

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शिक्षा नहीं, पहचान

यहाँ पढ़ाई डिग्री के लिए नहीं, आत्मसम्मान के लिए है। अब कोई माँ–बाप अंगूठा नहीं लगाता।

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