Jan 14, 2026
मध्य प्रदेश के शाजापुर ज़िले के पटलावदा गाँव के देवेंद्र सिंह परमार। कोई वैज्ञानिक नहीं, बस एक सोचने वाला किसान।
Credit: Gaon Connection Network
कभी कम बारिश, कभी ज़्यादा बारिश, कभी फसल के दाम नहीं। खेती की अनिश्चितता उन्हें सोचने पर मजबूर करती रही।
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2002 में शुरू हुआ पशुपालन का सफ़र, चार–पाँच पशुओं से आज 180 पशुओं तक की कहानी।
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गोबर सिर्फ खाद नहीं रहा, बायोगैस प्लांट लगा, गैस को शुद्ध किया गया और उसे CNG में बदला गया।
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आज उसी CNG से बाइक, ट्रैक्टर, लोडिंग पिकअप और गाड़ी चलती है, ईंधन गाँव में ही बनता है।
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देवेंद्र महज़ आठवीं पास हैं, लेकिन उनका काम बड़ी प्रयोगशालाओं से कम नहीं, नवाचार किताबों से नहीं, ज़मीन से पैदा होता है।
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