Jan 10, 2026
केरल के वायनाड ज़िले के नेल्लारचल गाँव में रहते हैं कुरुमा जनजाति के के. गोविंदन।
Credit: Gaon Connection Network
एक समय था जब हर घर में धनुष-बाण होते थे जीवन, जंगल और सुरक्षा का हिस्सा लेकिन समय के साथ यह कला ग़ायब होने लगी।
Credit: Gaon Connection Network
गोविंदन को डर था, अगर आज नहीं सहेजा तो यह हुनर उनके साथ ही ख़त्म हो जाएगा।
Credit: Gaon Connection Network
उन्होंने तय किया, यह कला अगली पीढ़ी तक पहुँचेगी गाँव, शहर, स्कूल… जहाँ से भी बच्चे आएँ सबके लिए दरवाज़े खुले।
Credit: Gaon Connection Network
यहाँ बच्चे सिर्फ तीर चलाना नहीं सीखते वे सीखते हैं, धैर्य, एकाग्रता और प्रकृति से रिश्ता।
Credit: Gaon Connection Network
बाँस से खुद बनाए धनुष-बाण पेड़ काटना नहीं, पेड़ों को समझना सिखाया जाता है हिंसा नहीं, संतुलन।
Credit: Gaon Connection Network
सम्मान मिले, उपाधि मिली लेकिन गोविंदन के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है, किसी बच्चे की आँखों में आत्मविश्वास की चमक।
Credit: Gaon Connection Network
Thanks For Reading!