ओडिशा के इस ज़िले में पहली बार स्ट्राबेरी की खेती

Gaon Connection Desk

Jan 31, 2026

परंपरा से बदलाव

सालों से किसान धान और सब्ज़ियों पर निर्भर थे। मुनाफ़ा कम, लागत ज़्यादा और जोखिम हमेशा बना रहता था। लेकिन अब कुछ किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर नई फसल को अपनाया और यहीं से शुरू हुआ बदलाव का सफ़र।

Credit: Gaon Connection Network

सीखकर बदली किस्मत

किसानों ने प्रशिक्षण लिया, वैज्ञानिक तरीकों को समझा, मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई और बेहतर पौध रोपण अपनाया। उन्होंने साबित कर दिया कि नई तकनीक सीखने से खेती भी बदलती है।

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पहली फसल की खुशी

जब खेतों में पहली बार लाल-लाल स्ट्रॉबेरी लटकी, तो किसानों की आँखों में चमक थी। यह सिर्फ़ फल नहीं था, यह मेहनत का फल था, यह भरोसे की जीत थी।

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आमदनी भी बढ़ी

जहाँ पहले किसान सीमित आमदनी में गुज़ारा करते थे, अब स्ट्रॉबेरी से कई गुना ज़्यादा कमाई होने लगी है। बाज़ार में अच्छी मांग और बेहतर दाम ने किसानों की आर्थिक स्थिति बदल दी।

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गाँव में नई सोच

अब गाँव के दूसरे किसान भी इस बदलाव को देख रहे हैं। वे पूछ रहे हैं- “हम भी यह खेती कैसे शुरू करें?” इस तरह एक किसान की सफलता पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन रही है।

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खेती का नया मॉडल

स्ट्रॉबेरी ने यह दिखा दिया कि खेती सिर्फ़ परंपरा नहीं, नवाचार और योजना का खेल भी है। अगर सही फसल, सही तकनीक और सही बाज़ार मिले तो किसान भी उद्यमी बन सकता है।

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