Jan 16, 2026
छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले के राजेंद्र कुमार साहू आम के पेड़ों की छांव में उगा रहे हैं मशरूम।
Credit: Gaon Connection Network
जो पराली जलती थी, आज वही बनी आधार मशरूम उत्पादन का और रोज़गार का।
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सर्दियों में ऑयस्टर, गर्मियों में पैडी स्ट्रॉ की खेती, मौसम बदला तो फसल बदली।
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एक बैग की लागत करीब ₹50 उत्पादन 3–4 किलो मुनाफ़ा सीधा किसान को।
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रोज़ाना 8–10 हज़ार तक मासिक आमदनी करीब 3 लाख रुपये यही तो है खेती से आत्मनिर्भरता।
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