Jan 8, 2026
उत्तर प्रदेश के हाथरस ज़िले के राजपुर गाँव में प्रियंका तिवारी शादी के बाद ससुराल आईं, बाहर कचरे के ढेर, अंदर मन में हलचल। कुछ कहना आसान नहीं था, लेकिन चुप रहना भी मुमकिन नहीं।
Credit: Gaon Connection Network
पंचायत चुनाव आया, प्रियंका ने लड़ने का फैसला किया। गाँव ने भरोसा किया, रिकॉर्ड वोटों से वे ग्राम प्रधान बनीं।
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खुले में कूड़ा फेंकना मना किया, पॉलिथीन पर रोक लगाई और जुर्माने का नियम बनाया गया। शुरू में नाराज़गी, फिर समझ आया कि ये सज़ा नहीं, सुरक्षा है।
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घर-घर कचरा इकट्ठा शुरू हुआ, महिलाओं और बच्चों की भागीदारी बढ़ी और कचरे के बदले पैसे। अब गंदगी नहीं, ज़िम्मेदारी और आय।
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प्रियंका जानती थीं, प्लास्टिक पूरी तरह खत्म नहीं होगा। लेकिन उसे बिखरने से रोका जा सकता है, इसलिए बनाए गए प्लास्टिक बैंक।
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न प्लास्टिक के ढेर, न गंदी नालियाँ, न उड़ती पॉलिथीन। राजपुर पंचायत अब एक मिसाल है।
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