सुंदरियाबाई: एक महिला, एक गाँव और 150 देसी बीजों का खज़ाना

Gaon Connection Desk

Feb 6, 2026

एक अकेली शुरुआत

जब आसपास के किसान एक-एक करके हाइब्रिड बीज अपनाने लगे, सुंदरियाबाई ने पुराने बीजों को बचाने का फैसला किया। लोगों ने मज़ाक उड़ाया, पर उन्होंने हार नहीं मानी।

Credit: Gaon Connection Network

एक गहरा सवाल

उनके मन में हमेशा एक ही चिंता रहती थी, अगर ये देसी बीज खत्म हो गए, तो आने वाली पीढ़ियाँ क्या बोएँगी, क्या खाएँगी?

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बीजों की गुल्लक

धीरे-धीरे उन्होंने अलग-अलग फसलों के बीज जमा करने शुरू किए। आज उनके पास करीब 150 पारंपरिक किस्मों का बीज बैंक है। वे इसे अपनी “भविष्य की गुल्लक” कहती हैं।

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घर ही बीज बैंक

कोदो, कुटकी, सावा, ज्वार, मक्का, धान जैसी फसलें, मिट्टी के बर्तनों और पारंपरिक तरीकों से सहेजकर रखी गई हैं। हर बीज में छुपा है पीढ़ियों का अनुभव और स्वाद।

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मज़ाक से सम्मान तक

शुरुआत में लोग कहते थे- “बीज बचाकर क्या करोगी?” आज वही किसान उनके घर आकर बीज मांगते हैं और उनसे सीखने की कोशिश करते हैं।

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आने वाली पीढ़ियों के लिए

सुंदरियाबाई का सपना है- बीज खत्म न हों, किसान आत्मनिर्भर रहें और आने वाली पीढ़ियाँ शुद्ध, देसी अनाज खा सकें। उनकी लड़ाई सिर्फ बीजों की नहीं, भविष्य की है।

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