Feb 6, 2026
कम जल प्रवाह, बढ़ता प्रदूषण और इंसानी गतिविधियाँ, देसी मछलियों के गायब होने की सबसे बड़ी वजहें हैं।
Credit: Gaon Connection Network
2020–2024 के अध्ययन में पूरी यमुना में 126 प्रजातियाँ दर्ज हुईं, लेकिन दिल्ली के कई इलाके में वैज्ञानिकों को सिर्फ एक प्रजाति मिली।
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औद्योगिक कचरे और बैराजों से रोके गए प्राकृतिक बहाव के कारण कई हिस्सों में पानी में ऑक्सीजन ही नहीं बची है, जहाँ मछलियाँ जीवित नहीं रह पातीं।
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नाइल तिलापिया, कॉमन कार्प और थाई मांगुर जैसी विदेशी प्रजातियाँ प्रदूषित पानी में भी जी लेती हैं और देसी मछलियों की जगह और भोजन छीन रही हैं।
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नदी का बहाव बनाए रखना, प्रदूषण रोकना, अवैध मछली पकड़ पर नियंत्रण और देसी प्रजातियों की “रैंचिंग” से उनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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