ये है यूपी का देशी आयरन मैन

ये है यूपी का देशी आयरन मैनगाँव कनेक्शन

लखनऊ। जहां किसी भी आम इंसान के लिए एक किमी. चलना पसीने छुटने जैसी बात है, वहीं उत्तर प्रदेश के अभिषेक मिश्रा ने चार किमी तैराकी, 180 किलोमीटर साइकिलिंग और 42 किमी की 'आयरनमैन मैराथन दौड़' को 15 घंटे से कम समय में ही खत्म कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वह इस रेस के मिलिंद सोमण के बाद दूसरे भारतीय विजेता धावक हैं। इस असाधारण दौड़ को जीतने वाले अभिषेक एक कुशल धावक के साथ-साथ इंजीनियर भी हैं। अपनी इस परिश्रमी जीवनशैली के कुछ पलों को अभिषेक ने गाँव कनेक्शन के रिपोर्टर देवांशु मणि तिवारी के साथ साझा किया। 

सवाल- आयरन मैन बनने की यात्रा कैसे शुरू हुई। 

जवाब- मुझे बचपन से दौडऩे और फुटबॉल खेलने का शौक था। गाँव बनारस के पास था, इसलिए बीएचयू में हर साल होने वाली नेशनल लेवल स्पोटर्स मीट में हिस्सा लिया करता था। फिर मैने गाजि़याबाद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। मैं एक ऐसी फैमिली से था जहां पढ़ाई को बहुत महत्व दिया जाता था। तो स्पोटर्स के लिए बिल्कुल सपोर्ट नहीं था। 2010 में मेरी नौकरी गुडग़ाँव की जनरल इलेक्ट्रिकल नाम की कंपनी में लग गई। वहां काम करते हुए मुझे दिल्ली हाफ मैराथन दौड़ के बारे में पता चला। जब वहां गया तो मैं बिल्कुल भी उस रेस के बारे में नहीं जानता था। 21 किमी. की इस दौड़ को मैंने ढाई घंटे में पूरा किया जो किसी आम आदमी के लिए बहुत बड़ी बात है। वर्ष 2012 में मैंने तैयारी करके दोबारा दिल्ली हाफ मैराथन और मुंबई मैं 42 किमी. की फुल मैराथन दौड़ों में हिस्सा लिया जिससे मेरी उत्सुकता और बढ़ती गई और इसी कारण मैं स्पेन की आयरनमैन दौड़ में हिस्सा ले पाया।

सवाल- आपने युवा प्रशंसकों को मिलने पर क्या कहते हैं? 

जवाब- मेरी हमेशा से यह कोशिश रही है कि कैसे में अपनी सीमाओं से आगे जा सकूं, तोड़ सकूं उन्हें। जब पहली बार 21 किमी. दौड़ा तो मुझे लगा नहीं था कि मैं यह कर पाऊंगा। फिर मैंने 42 किमी. दौड़ा, 130 किमी. भाटी रेस दौड़ी तो मुझे लगा कि मैं इससे और ज़्यादा दौड़ सकता हूंं। मैं सबसे यही कहता हूं कि अपने आपको सीमाओं में मत बांधों उनसे आगे बढ़ो। अगर आप अपनी फिजि़कल लिमिट तोड़ दें तो आपकी मैंटल लिमिट खुद ब खुद बढ़ जाती है। मैं मंदिर नहीं जाता हूं, मेरे हिसाब से दौडऩा ही मेरे लिए तपस्या है।  

सवाल- स्पेन जाने का मौका कैसे मिला? 

जवाब- जब मैं बॉम्बे फुल मैराथन दौड़ में आया तो मैंने ये कभी सोचा नहीं था कि मैं इतनी बड़ी रेस में हिस्सा ले पाऊंगा। फिर मुझे मेरे एक मित्र ने आयरनमैन रेस के बारे में बताया। जो लोग आयरन मैन रेस दौड़ते हैं उनमें से 90 फीसदी लोग हम जैसे आम नागरिक होते हैं। ये सब देख के मुझे लगा कि यार ये है तो बड़ी चीज़ है पर अगर इसे कर लिया तो बहुत बड़ी बात होगी। 2013 में इस रेस की तैयारी में लग गया। इसी बीच मैंने गुजरात के कच्छ में होने वाली 160 किमी. की गांधी दौड़ को पूरा किया। पहले मुझे तैराकी बिल्कुल भी नहीं आती थी, तैराकी सिखाने में मुझे मेरी कोच मनीशा का बड़ा सहयोग मिला। इसके बाद आयरनमैन की तैयारी में मेरे प्रेरक रहे भारतीय नेशनल एथलीट और सुपर मॉडल मिलिंद सोमण ने मेरा साथ दिया, जिससे में स्पेन जा पाया और इतनी बड़ी दौड़ में हिस्सा ले पाया। मेरे पिता जी कोल इंडिया में हैं। उन्होंने ही मेरी दौड़ को स्पाँसर किया।

सवाल- आयरन मैन का गाँव कनेक्शन भी है। इस बारे में कुछ बताएं?

जवाब- मेरा गाँव रॉबर्टगंज, बनारस के पास ही सोनभद्र जिले में पड़ता है। अपने गाँव से मुझे बहुत लगाव है। जब मैं गाँव जाता था तो पूरा गाँव वाला बन जाता था। मैंने खुद से चावल की खेती की है। पानी में रोपाई की है। ट्रैक्टर चलाकर खेत को समतल किया है। खेती मुझे बहुत पसंद है। गाँव की सादगी बहुत भाती है। मैंने हाल ही मैं दौड़ से संबंधी एक निजी कंपनी खोली 'टोबोनो स्पोर्ट्स एंड एंटरटेनमेंट' है, जिसमें मैं ग्रामीण युवाओं को शामिल करना चाहता हूं जो अक्सर पुलिस भर्ती व सैनिक भर्ती में कड़ी मेहनत करते हैं।

क्या है आयरनमैन दौड़

आयरनमैन मैराथन दौड़ कठिन दौड़ों में से एक हैं। इस प्रतियोगिता में खिलाड़ी को तीन पड़ाव में दौड़ पूरी करनी होती है, जिसमें चार किमी तैराकी,180 किमी साईकिलिंग और 42 किमी बिना किसी ठहराव लिए दौड़ को पूरा करना होता है। इस दौड़ की समय सीमा 17 घंटे होती है। 2015 में ज्यूरिख के आयरन रेस में भारत के मॉडल अभिनेता मिलिंद सोमण ने इसे 15.19 घंटें में पूरा कर किया और विजेता बनें। इस रेस में भारत से हर बार कई लोग हिस्सा लेते हैं।

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