यहां हर साल आती है तबाही

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बागपत। बाढ़ से बचने के लिए प्रशासन ने कोई इंतजाम नहीं किए हैं। जबकि हर वर्ष मानसून आते ही यमुना में बाढ़ आ जाती है और चारों तरफ तबाही का मंज़र दिखाई देती है। उसके बाद भी प्रशासन ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया।

स्वास्थ्य विभाग ने तो बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से बचाव के लिए इंतजाम कर लिए हैं और सभी दवाएं मंगवा ली हैं। बाढ़ रोकने के लिए भी कई स्थानों पर ठोकरें बनाई गई हैं, लेकिन उसके बाद भी कटान नहीं रुकती, जिससे ग्रामीणों को गाँवों से पलायन करना पड़ता है।

मानसून हर वर्ष आता है और अपने साथ बाढ़ और बीमारियों का कहर लाता है। उत्तराखंड के पहाड़ों पर बारिश का दौर शुरू हो चुका है और इससे अब यमुना नदी में भी बाढ़ का खतरा सताने लगा। गंगा के साथ इनकी सहायक नदियों में जलस्तर बढ़ने के साथ ही बाढ़ का खतरा पैदा हो जाता है, क्योंकि गंगा में जब पानी ज्यादा होता है तो यमुना और अन्य नदियों में पानी छोड़ा जाता है, जिससे उनके किनारे बसे गाँवों में बाढ़ आती है।

मानसून आने के बाद नदियों का जल गाँवों को खेतों को डूबोने के लिए बढ़ने लगता है। हर वर्ष बाढ़ की विभीषिका में जन-धन की भारी हानि होती है, जिससे लाखों-करोड़ों का नुकसान ग्रामीणों को उठाना पड़ता है, लेकिन इसके लिए प्रशासन ने अभी तक कोई इंतजाम नहीं किए है और न ही कोई प्लान बनाया गया। प्रशासन बिना प्लान के ही बाढ़ को रोकेगा।

इतना ही नहीं बाढ़ और वर्षा के कारण बीमारियां भी पैर पसार लेती हैं। इस बीमारी पर पूरी तरह से अंकुश पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तो पूरे इंतजाम कर लिए है और सभी दवाओं का कोटा पूरा कर लिया है, जिससे बीमारियों पर जल्द ही अंकुश लगाया जा सके। साथ ही कई स्थानों पर बनाई गई ठोकरें भी बाढ़ को नहीं रोक पाती है, जिससे कटान होता रहता है।

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