यहां नहीं मिलता बाढ़ पीड़ितों को मुआवज़ा

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बागपत। यहां बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिलता है। चाहे उनका कितना भी नुकसान क्यों न हो जाए। सरकार पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता। छह वर्ष पूर्व आयी बाढ़ के नुकसान का भी किसी भी पीड़ित व्यक्ति को कोई मुआवजा नहीं मिला और वर्ष 2014 में शासन में भेजी गयी फाइल का भी अभी तक कोई बजट तक नहीं आया।

बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर व बिजनौर सहित आदि जनपदों के लिए सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने 70 करोड़ रुपये के नुकसान के लिए फाइल भेजी थी, लेकिन इस बजट के लिए फाइल बनाकर भेजने का भी कोई फायदा नहीं हुआ। शासन ने अभी तक भी इन जनपदों को मुआवजा नहीं दिया और उसके बाद से सिंचाई विभाग ने नुकसान के लिए बजट की फाइल बनाना भी उचित नहीं समझा। 

मेरठ और सहारनपुर मंडल के किसानों को बाढ़ से नुकसान उठाने के बाद भी मुआवजा नहीं मिलता। चाहे यहां से मुआवजे के लिए कितनी बार भी फाइल बनाकर क्यों न भेज दे, क्योंकि शासन फाइल बनाकर भेजने के बाद भी बजट भेजने के लिए तैयार नहीं होती। बागपत जनपद सहित कई जनपदों में वर्ष 2010 उत्तराखंड में अधिक बारिश आने के बाद यमुना में अधिक पानी छोड़ने के बाद बाढ़ आ गयी थी, जिसके बाद बागपत में करोड़ों का नुकसान सहित मेरठ और सहारनपुर मंडल के जनपदों में करीब तीस करोड़ का नुकसान किसानों को उठाना पड़ा था।

बाढ़ के बाद बीमारी ने भी अपना कहर बरपाया था, लेकिन उसके बाद भी किसानों को नष्ट फसल का कोई मुआवजा नहीं मिला था। इक्का दुक्का किसानों को छोड़कर अन्य पीड़ित किसान मुआवजे के लिए इंतजार करते रहे। उसके बाद वर्ष 2014 में भी किसानों को बाढ़ आने के कारण फसल नष्ट होने से नुकसान हुआ था।

बाढ़ से बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर व बिजनौर सहित कई जनपद प्रभावित हो गये थे, जिससे यहां करोड़ों का नुकसान किसानों को उठाना पड़ा था। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने करीब 70 करोड़ रुपये का बजट बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन वह बजट भी आज तक इन जनपदों को नहीं मिला।

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